चंबा। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव के पहले चरण के नतीजे सामने आने के बाद कई रोचक और चौंकाने वाली कहानियां चर्चा में हैं, लेकिन चंबा जिले से सामने आया एक चुनाव परिणाम हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। यहां एक ऐसी पंचायत है, जहां पिछले करीब 65 वर्षों से एक ही परिवार का दबदबा कायम है। पहले पिता लगातार प्रधान बनते रहे और फिर उनकी बेटी ने जिम्मेदारी संभाली। अब बेटी ने ऐसा रिकॉर्ड बना दिया है, जिसे तोड़ना आसान नहीं होगा।
कृष्णा महाजन ने रचा इतिहास
चंबा जिले की चुराह घाटी स्थित भंजराड़ू पंचायत में कृष्णा महाजन ने एक बार फिर जीत का परचम लहराकर इतिहास रच दिया है। पंचायत चुनाव के ताजा परिणामों में कृष्णा महाजन लगातार आठवीं बार प्रधान पद पर निर्वाचित हुई हैं। उनकी इस जीत के बाद पूरे क्षेत्र में उनकी चर्चा हो रही है।
यह भी पढ़ें : क्या जीतने वालों पर बिंदल का ठप्पा लगा....विक्रमादित्य ने BJP के पंचायत चुनाव जीतने के दावे पर कसा तंज
एक बार भी नहीं हारी चुनाव
कृष्णा महाजन की राजनीतिक यात्रा वर्ष 1990 में शुरू हुई थी। उस समय उन्होंने पहली बार पंचायत प्रधान का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। हर चुनाव में जनता ने उन पर भरोसा जताया और वह लगातार जीतती चली गईं।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि 1990 से लेकर अब तक कृष्णा महाजन ने कभी हार का सामना नहीं किया। आठ बार चुनाव मैदान में उतरीं और आठों बार विजयी रहीं। यही वजह है कि क्षेत्र के लोग मजाक में कहते हैं कि उनकी डिक्शनरी में "हार" नाम का कोई शब्द ही नहीं है।
पिता के बाद बेटी ने संभाली कुर्सी
भंजराड़ू पंचायत की यह कहानी केवल कृष्णा महाजन तक सीमित नहीं है। उनसे पहले उनके पिता भी पंचायत के लोकप्रिय प्रधान रहे थे। बताया जाता है कि उन्होंने लगातार पांच बार पंचायत का नेतृत्व किया और वर्षों तक लोगों का विश्वास बनाए रखा।
यह भी पढ़ें- हिमाचल पंचायत चुनाव में सगे भाई-बहन की बड़ी जीत : एक बना प्रधान, दूसरा उपप्रधान
इस तरह देखें तो पहले पिता और फिर बेटी ने पंचायत की कमान संभाली। यही कारण है कि इस पंचायत में लगभग छह दशक से अधिक समय से एक ही परिवार का नेतृत्व कायम है। पंचायत के इतिहास में यह अपने आप में एक अनोखा रिकॉर्ड माना जा रहा है।
पिता की बीमारी बनी राजनीति में आने की वजह
कृष्णा महाजन के राजनीति में आने की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। उनके पिता लंबे समय तक पंचायत का नेतृत्व करते रहे] लेकिन बाद में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण सक्रिय राजनीति से दूर हो गए। उस समय स्थानीय लोगों ने परिवार से आग्रह किया कि पंचायत के विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए कृष्णा महाजन चुनाव मैदान में उतरें।
उस दौर में ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं का चुनाव लड़ना आम बात नहीं थी। बावजूद इसके उन्होंने चुनौती स्वीकार की और पहली बार चुनाव जीतकर पंचायत नेतृत्व संभाला। इसके बाद उन्होंने अपने काम के दम पर लोगों का भरोसा लगातार बनाए रखा।
यह भी पढ़ें : वन भूमि पर कब्जा करने वालों की अब खैर नहीं, हाईकोर्ट के सुक्खू सरकार को सख्त निर्देश; तय की डेडलाइन
विकास और जनसेवा बनी ताकत
स्थानीय लोगों का कहना है कि कृष्णा महाजन की सबसे बड़ी ताकत उनकी कार्यशैली और सभी वर्गों के लोगों के साथ समान व्यवहार रहा है। उन्होंने पंचायत में विकास कार्यों को प्राथमिकता दी और राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर लोगों की समस्याओं के समाधान का प्रयास किया। ग्रामीणों का मानना है कि उन्होंने कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं किया। यही वजह रही कि समय बदलता रहा, सरकारें बदलती रहीं, लेकिन पंचायत में जनता का विश्वास कृष्णा महाजन के साथ बना रहा।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: ग्रामीणों ने एक ही परिवार को सौंप दी पंचायत की कमान, पत्नी प्रधान-पति बना उपप्रधान
रिकॉर्ड जीत ने फिर बनाया चर्चा का केंद्र
ताजा चुनाव में कृष्णा महाजन ने अपने प्रतिद्वंद्वी को बड़े अंतर से हराकर एक बार फिर अपनी लोकप्रियता साबित कर दी। लगातार आठवीं जीत के साथ उन्होंने पंचायत राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: सड़क हा.दसे ने छीना 18 साल का बेटा, बीमा कंपनी ने भी खूब रूलाए मां-बाप; कोर्ट ने सिखाया सबक
क्या कहती हैं कृष्णा महाजन
अपनी जीत पर कृष्णा महाजन बताती है कि उन्होंने 1973 में चंबा के कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की थी। उसके बाद उनकी इच्छा लॉ करने की थी, लेकिन अचानक उनकी मां की मौत के चलते वह अपनी पढ़ाई को आगे जारी नहीं रख सकी। 1987 में पिता जब प्रधान थे, तब उन्हें भी अचानक पैरालाइज का अटैक आ गया।
बीमारी के चलते वह आगे चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे। इसी बीच लोगों के कहने पर 1990 में पिता ने मुझे पंचायत प्रधान पद के लिए मैदान में उतारा और लोगों के भरपूर सहयोग से मैं पहली बार प्रधान बनी। उसके बाद से अब तक मैं लगातर पंचायत चुनाव जीत रही हूं। कृष्णा महाजन ने बताया कि वह कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियों के साथ मिलकर काम करती हूं और गांव के हर वर्ग का बराबर विकास ही मेरा पहला मूल मंत्र है।
