शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी तूफान उठने वाला है। देहरा उपचुनाव के दौरान आचार संहिता में कथित रूप से महिला मंडलों को पैसे बांटने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी और देहरा की विधायक कमलेश ठाकुर के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। जिससे उनके लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
होशियार सिंह ने दायर की याचिका
यह जनहित याचिका देहरा के पूर्व विधायक और भाजपा प्रत्याशी रहे होशियार सिंह ने दायर की है। उन्होंने याचिका में गंभीर आरोप लगाते हुए मांग की है कि कमलेश ठाकुर को अयोग्य घोषित किया जाए, क्योंकि आचार संहिता के दौरान सरकारी तंत्र के जरिए महिला मंडलों को लाखों रुपये बांटे गए।
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हाईकोर्ट के होशियार सिंह को पांच लाख जमा करने के आदेश
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावलिया और न्यायाधीश जियालाल भारद्वाज की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को 5 लाख रुपये कोर्ट में जमा करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि पहले याचिकाकर्ता अपने इरादों की बोनाफाइड मंशा दिखाए, उसके बाद ही अगली सुनवाई होगी और आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
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आचार संहिता के दौरान बांटे थे पैसे
पूर्व विधायक होशियार सिंह ने आरोप लगाया है कि चुनाव से 10 से 15 दिन पहले कांगड़ा सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक और वेलफेयर डिपार्टमेंट के माध्यम से महिला मंडलों को 50-50 हजार रुपये बांटे गए। उन्होंने कहा कि यह कदम वोटरों को प्रभावित करने के लिए उठाया गया था, जो चुनाव आचार संहिता का सीधा उल्लंघन है।
राजनीतिक पारा चढ़ा
इस मामले के सामने आने के बाद हिमाचल में सियासी तापमान बढ़ गया है। भाजपा ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि सरकार लोकतंत्र और चुनाव प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ कर रही है। भाजपा नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री की पत्नी पर लगे आरोप गंभीर हैं और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
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कांग्रेस में भी हलचल
मामले के तूल पकड़ने के बाद कांग्रेस खेमे में भी हलचल मच गई है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि सरकार इस केस को लेकर रणनीतिक रूप से बचाव की तैयारी में जुट गई है। यदि आरोपों की जांच शुरू होती है तो यह कांग्रेस सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है।
अगली सुनवाई में तय होगा मामला आगे बढ़ेगा या नहीं
हाईकोर्ट ने फिलहाल प्रतिवादियों को नोटिस जारी नहीं किया है। 5 लाख रुपये जमा करवाने के बाद अगली सुनवाई में तय होगा कि मामले की विस्तृत सुनवाई होगी या नहीं। राजनीतिक हलकों में इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक मोड़ माना जा रहा है।
