धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश में नगर निगम चुनावों का बिगुल बजते ही सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस चुनावी महाकुंभ में एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने कार्यकर्ताओं में जोश और आम जनता में भावुकता भर दी है। भाजपा के सबसे वरिष्ठ स्तंभ और 92 वर्षीय पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार खुद चुनावी रणक्षेत्र में उतर आए हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी शांता कुमार की सक्रियता ने यह साफ कर दिया है कि पालमपुर नगर निगम का चुनाव भाजपा के लिए केवल एक चुनावी मुकाबला नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा का प्रश्न है। 

 

पालमपुर में शांता कुमार ने भावुक अंदाज में कहा कि यह संभवतः उनके राजनीतिक जीवन का अंतिम चुनाव हो सकता है और वह हार के साथ नहीं बल्कि जीत के साथ भगवान के पास जाना चाहते हैं। उनके इस बयान ने भाजपा कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भर दिया है।

 

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'हार के साथ ईश्वर के पास नहीं जाना चाहता'

सोमवार को पालमपुर भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान 'पानी वाले मुख्यमंत्री' के नाम से विख्यात शांता कुमार बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने अपने जीवन की अंतिम इच्छा साझा करते हुए कार्यकर्ताओं से कहा कि यह संभवतः उनके राजनीतिक जीवन का अंतिम चुनाव हो सकता है और वह हार के साथ नहीं बल्कि जीत के साथ भगवान के पास जाना चाहते हैं। उनके इस बयान ने भाजपा कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भर दिया है।

 

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शांता कुमार ने कहा "मैं जीवन के अंतिम मोड़ पर हूं और पता नहीं कौन सी मुलाकात आखिरी हो। मुझे लगता है कि 2027 का चुनाव मेरे जीवन का आखिरी चुनाव होगा। मैं हार कर भगवान के पास नहीं जाना चाहता।" उन्होंने कार्यकर्ताओं से भावुक अपील की कि वे एकजुट होकर काम करें ताकि जब वे इस दुनिया से विदा लें, तो उनके हाथ में जीत का परचम हो।

 

संघर्ष के दिनों से स्वर्णिम युग तक का सफर

92 साल के इस कद्दावर नेता ने भारतीय जनसंघ के दौर को याद करते हुए बताया कि उन्होंने उस भाजपा को देखा है जिसके केवल 2 सांसद हुआ करते थे। उन्होंने कहा कि 1951 के कानपुर अधिवेशन से लेकर आज 22 राज्यों में भाजपा की सरकार बनने तक का सफर उनकी आंखों के सामने गुजरा है। शांता कुमार ने जोर देकर कहा कि आज भाजपा जिस मुकाम पर है, वह कार्यकर्ताओं की निष्ठा का परिणाम है। उन्होंने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे आपसी मतभेद भुलाकर पालमपुर को 'कांग्रेस मुक्त' बनाने और नगर निगम पर भाजपा का कब्जा सुनिश्चित करने के लिए जुट जाएं।

 

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शांता कुमार के मन में अधुरे सपने की टीस

अपनी सियासी पारी का आगाज एक पंच के तौर पर करने वाले शांता कुमार ने पालमपुर के विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने विशेष रूप से 'पालमपुर रोपवे परियोजना' का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार बदलने के कारण उनका यह सपना अधूरा रह गया। उन्होंने विश्वास जताया कि नगर निगम और प्रदेश में भाजपा की सत्ता आने पर पालमपुर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी। उन्होंने जनता से अपील की कि विकास की जो नींव भाजपा ने रखी थी, उसे पूर्णता तक पहुंचाने के लिए भाजपा को ही चुनें।

 

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कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार

शांता कुमार के इस भावुक दांव ने पालमपुर के राजनीतिक समीकरणों को बदल कर रख दिया है। एक तरफ जहां कांग्रेस और भाजपा के दिग्गज नेता अपनी जीत के दावे कर रहे हैं, वहीं शांता कुमार की इस अपील ने कार्यकर्ताओं को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया है। 1977 और 1990 में प्रदेश की कमान संभालने वाले इस दिग्गज नेता ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी अंतिम राजनीतिक पारी को 'विजयी विदाई' के रूप में देखना चाहते हैं। अब देखना यह होगा कि पालमपुर की जनता अपने इस लाडले नेता की 'अंतिम इच्छा' को जीत के साथ पूरा करती है या नहीं।

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