हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश में एक पटवारी के तबादले को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। हमीरपुर जिले के बलोह पटवार सर्कल में तैनात पटवारी का तबादला किन्नौर के रिकांगपिओ क्षेत्र में किए जाने के बाद स्थानीय भाजपा विधायक ने सरकार पर निशाना साधा है।

जिला परिषद चुनाव से जुड़ा है मामला

दरअसल, हमीरपुर सदर से विधायक आशीष शर्मा ने आरोप लगाया है कि पटवारी अमित कुमार को निष्पक्ष और ईमानदार तरीके से काम करने की कीमत तबादले के रूप में चुकानी पड़ी है। इस मुद्दे ने प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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पूरा मामला जिला परिषद चुनाव से जुड़ा हुआ है। चमनेड वार्ड से भाजपा समर्थित उम्मीदवार रोहित शर्मा का नामांकन उस समय विवादों में आ गया था जब उनके खिलाफ सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण की शिकायत दर्ज करवाई गई। शिकायत के आधार पर चुनाव अधिकारी ने उनका नामांकन निरस्त कर दिया था। हालांकि मामला बाद में अदालत पहुंचा, जहां उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड और तथ्यों की जांच के बाद उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति मिल गई।

विधायक ने इस कार्रवाई को बताया दुर्भाग्यपूर्ण

हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद रोहित शर्मा चुनावी मैदान में उतरे और जीत हासिल कर जिला परिषद सदस्य बने। इसी घटनाक्रम को आधार बनाते हुए विधायक आशीष शर्मा ने कहा कि जिस राजस्व कर्मचारी ने तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष रिपोर्ट तैयार की, उसी कर्मचारी को अब दूरदराज क्षेत्र में भेज दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा क्या कारण था कि संबंधित कर्मचारी का तबादला ऐसे समय पर किया गया जब उसका नाम चुनावी विवाद से जुड़े मामले में सामने आया था।

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विधायक ने इस कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारियों को निष्पक्षता और ईमानदारी के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, न कि उन्हें दंडात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़े। उनका कहना है कि यदि अधिकारी सही तथ्य सामने रखने के बावजूद दबाव का सामना करेंगे तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था की निष्पक्षता प्रभावित होगी।

कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया सामने

वहीं इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। विपक्ष इसे सरकार की कार्यशैली से जोड़कर देख रहा है, जबकि प्रशासन की ओर से अभी तक तबादले को लेकर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। ऐसे में यह सवाल बना हुआ है कि क्या यह एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया थी या फिर इसके पीछे कोई अन्य कारण मौजूद है।

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उल्लेखनीय है कि चुनाव के दौरान रोहित शर्मा के खिलाफ सरकारी भूमि पर कब्जे का आरोप लगाया गया था। शिकायत में उनके परिवार से जुड़ी पुरानी राजस्व प्रविष्टियों का भी उल्लेख किया गया था। हालांकि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान आरोपों को पर्याप्त आधार नहीं मिला और उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति प्रदान कर दी गई। इसके बाद उनकी जीत ने इस पूरे मामले को और अधिक चर्चा का विषय बना दिया।

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