#राजनीति
June 17, 2026
हिमाचल का 7 हजार करोड़ लौटाएं पंजाब-हरियाणा, CM सुक्खू ने दिल्ली जाकर मांगा अपना हक
हिमाचल को लंबित ऊर्जा बकाया भुगतान सुनिश्चित किया जाए
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास-शहरी कार्य मंत्री से मुलाकात कर राज्य के लंबे समय से लंबित ऊर्जा बकाया और जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को उसके अधिकारों और संसाधनों का पूरा लाभ मिलना चाहिए तथा वर्षों से लंबित मामलों का जल्द समाधान किया जाना आवश्यक है।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश में स्थित केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की जलविद्युत परियोजनाओं से मिलने वाली मुफ्त बिजली रॉयल्टी में बढ़ोतरी की मांग रखी। उन्होंने विशेष रूप से बैरा-स्यूल जलविद्युत परियोजना का मुद्दा उठाते हुए कहा कि परियोजना के संचालन को चार दशक से अधिक समय बीत चुका है, इसलिए राज्य की मुफ्त बिजली हिस्सेदारी बढ़ाकर 50 प्रतिशत की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड यानी BBMB परियोजनाओं से जुड़े ऊर्जा बकाया का मुद्दा भी प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के निर्माण के दौरान हिमाचल प्रदेश ने भारी सामाजिक और पर्यावरणीय कीमत चुकाई है। हजारों परिवारों को विस्थापन झेलना पड़ा और कई प्रभावित परिवार आज भी पुनर्वास से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
सीएम सुक्खू ने केंद्र से आग्रह किया कि पंजाब और हरियाणा की सहमति लेकर हिमाचल प्रदेश को लंबित ऊर्जा बकाया का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। राज्य सरकार का दावा है कि यदि बकाया ऊर्जा का मूल्य और उस पर ब्याज जोड़ा जाए तो यह राशि लगभग 7,784 करोड़ रुपये तक पहुंचती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह धनराशि प्रदेश के विकास और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
बैठक में शानन जलविद्युत परियोजना का मुद्दा भी उठाया गया। मुख्यमंत्री ने इस परियोजना पर हिमाचल के अधिकारों का पक्ष रखते हुए राज्य के हितों की रक्षा की मांग की। इसके अलावा उन्होंने कांगड़ा में प्रस्तावित एयरो सिटी और ‘हिम चंडीगढ़’ जैसे महत्वाकांक्षी शहरी विकास परियोजनाओं के लिए भी केंद्र से आर्थिक सहयोग मांगा।
मुख्यमंत्री ने शहरी विकास से जुड़ी कई योजनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार विभिन्न नगर निकायों में बड़े स्तर पर विकास परियोजनाएं शुरू करने की तैयारी कर रही है, जिनके लिए केंद्र की वित्तीय सहायता आवश्यक है।
साथ ही स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और शहरी बुनियादी ढांचे से संबंधित लंबित फंड जारी करने का भी अनुरोध किया गया। राज्य सरकार का मानना है कि यदि लंबित वित्तीय दावों और विकास परियोजनाओं को मंजूरी मिलती है तो इससे हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था, पर्यटन, निवेश और रोजगार के अवसरों को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।