शिमला। राजनीति में तस्वीरें अक्सर शब्दों से ज्यादा बोलती हैं। हिमाचल प्रदेश की कड़कड़ाती ठंड में गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर एक ऐसी ही तस्वीर सामने आईए जिसने प्रदेश का सियासी पारा अचानक गरमा दिया है। हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार में लोक निर्माण विभाग का जिम्मा संभाल रहे मंत्री विक्रमादित्य सिंह गणतंत्र दिवस की संध्या पर अचानक नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के सरकारी अवास पर मिलने पहुंच गए। विक्रमादित्य सिंह का अचानक नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के सरकारी आवास पर पहुंचना महज एक शिष्टाचार भेंट है या फिर इसके पीछे भविष्य की कोई नई राजनीतिक पटकथा लिखी जा रही है, इसे लेकर अब कयासों का बाजार गर्म है।

मुलाकात की टाइमिंग ने खड़े किए सवाल

इस मुलाकात की टाइमिंग ही इसे सबसे ज्यादा अहम बनाती है। यह मुलाकात ऐसे वक्त में हुई है जब मंत्री विक्रमादित्य सिंह अपनी ही सरकार में थोड़े असहज महसूस कर रहे थे। हाल ही में अधिकारियों को लेकर दिए गए उनके तल्ख बयान पर जहां मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने उन्हें सार्वजनिक रूप से अपने विभाग पर फोकस करने की नसीहत दे डाली थी, वहीं कैबिनेट के अन्य मंत्री भी उनके विरोध में खड़े नजर आए।

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दिलचस्प बात यह है कि जब कांग्रेस के भीतर विक्रमादित्य घिर रहे थे, तब विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने उनके बयान का समर्थन किया था। ऐसे में, ठीक इस विवाद के बाद विक्रमादित्य का अपनी पत्नी डॉ. अमरीन के साथ जयराम ठाकुर के घर पहुंचना, मुख्यमंत्री सुक्खू और कांग्रेस हाईकमान के लिए एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है।

वायरल तस्वीर और सियासी संदेश

विक्रमादित्य सिंह ने स्वयं अपने सोशल मीडिया हैंडल पर इस मुलाकात की तस्वीरें साझा की हैं। तस्वीरों में दोनों नेताओं के बीच की "केमिस्ट्री" सहज नजर आ रही है। राजनीति की परख रखने वालों का मानना है कि राजनीति में कोई भी कदम बेवजह नहीं होता। विक्रमादित्य सिंह ने भले ही इसे गणतंत्र दिवस की बधाई और शिष्टाचार भेंट का नाम दिया हो, लेकिन इसके जरिए उन्होंने यह जता दिया है कि राजनीति में विकल्प हमेशा खुले होते हैं।

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फेसबुक पोस्ट में छिपे संकेत

जयराम ठाकुर से मुलाकात के बाद विक्रमादित्य सिंह ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए एक लंबी पोस्ट लिखी, उसके हर शब्द को राजनीतिक चश्मे से देखा जा रहा है। उन्होंने लिखा:-

"गणतंत्र दिवस के अवसर पर अपनी पत्नी डॉ. अमरीन के साथ माननीय नेता प्रतिपक्ष श्री जयराम ठाकुर जी से शिष्टाचार भेंट की। हमारा संविधान हमें यह मार्गदर्शन देता है कि लोकतंत्र में विचारों का भिन्न होना स्वाभाविक है, परंतु राज्य के समग्र विकास और जनता की भलाई के लिए सभी दलों का एकजुट होकर कार्य करना आवश्यक है"।


राजनीतिक विचारधाराएँ भले अलग हों, पर हिमाचल प्रदेश के विकास की भावना हम सभी को एक सूत्र में बाँधती है। यही लोकतंत्र की खूबसूरती और गणतंत्र दिवस का सच्चा संदेश है आपसी संवाद, सहयोग और समर्पण के साथ आगे बढ़ना ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुनहरा, सशक्त और समृद्ध हिमाचल निर्माण किया जा सके।

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अपनी इसी पोस्ट में विक्रमादित्य सिंह आगे लिखते हैं, 'यह हमारा सतत प्रयास रहेगा कि सभी राजनीतिक विभेदों से ऊपर उठकर प्रदेश के हित में सकारात्मक कार्य संबंध बनाए रखें और राज्य की प्रगति की गति को और तेज़ करें'.

विक्रमादित्य-जयराम की मुलाकात से सियासी चर्चाएं हुई तेज

बता दें कि यह पहली बार नहीं है, जब दोनों नेताओं की नजदीकियों को सार्वजनिक रूप से देखा गया हो। इससे पहले भी विक्रमादित्य सिंह जयराम ठाकुर के जन्म दिन पर उन्हें बधाई देने के लिए उनके आवास पर पहुंचे थे। उस दौरान भी दोनों नेताओं की मुलाकात से सियासी चर्चाओं का लंबा दौर चला था। वहीं बीते रोज गणतंत्र दिवस के राज्य स्तरीय समारोह के दौरान भी विक्रमादित्य सिंह और जयराम ठाकुर एक साथ बैठे नजर आए थे। वहीं राजभवन में आयोजित एट होम में भी दोनों नेता एक साथ दिखे थे। जिसकी तस्वीरें भी विक्रमादित्य सिंह ने अपने फेसबुक पर पोस्ट की थी। दोनों नेताओं की नजदिकियों के लोग अपने अपने तरीके से कयास लगा रहे हैं।

 

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क्या बन रहे हैं नए समीकरण

हिमाचल की राजनीति में अक्सर यह कहा जाता है कि यहां कोई किसी का सगा नहीं होता। विक्रमादित्य सिंह जो कि वीरभद्र सिंह की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं, उनका अपनी ही सरकार के लाइन से अलग जाकर विपक्ष के नेता से मिलना, पार्टी के भीतर उनके बागी तेवरों की झलक दिखा रहा है।

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