देहरा (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा की देहरा नगर परिषद इस समय पूरे प्रदेश की राजनीति का केंद्र बन गई है। यह महज एक नगर निकाय का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि इसे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उनकी पत्नी व देहरा से विधायक कमलेश ठाकुर की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जा रहा है। देहरा नगर परिषद पर पिछले 15 सालों से भाजपा का एकछत्र राज है। इस बार विधायक कमलेश ठाकुर के सामने सबसे बड़ी चुनौती भाजपा के इस 15 साल पुराने 'अभेद्य किले' को ढहाने की है। 17 मई को होने वाले मतदान के लिए बिछी सियासी बिसात ने इस मुकाबले को बेहद हाई-प्रोफाइल बना दिया है।

क्या कमलेश ढहा पाएगी भाजपा का सियासी दुर्ग

देहरा नगर परिषद की सत्ता पर कब्जा कांग्रेस के लिए अब साख का सवाल बन चुका है। पिछले चुनाव में भाजपा ने सातों वार्डों में जीत दर्ज कर कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर दिया था। अब चूंकि यह मुख्यमंत्री का अपना राजनीतिक क्षेत्र (ससुराल और पत्नी का निर्वाचन क्षेत्र) है, इसलिए कांग्रेस हाईकमान और खुद कमलेश ठाकुर इस किले में सेंध लगाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अगर कांग्रेस यहां जीत दर्ज करती है, तो यह कमलेश ठाकुर के राजनीतिक कद को और ऊंचाइयों पर ले जाएगा, लेकिन हार की स्थिति में भाजपा के गढ़ को भेदना आने वाले समय में और मुश्किल हो सकता है।

 

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भाजपा में मचे घमासान से उम्मीद की किरण

जहां एक ओर कांग्रेस अपनी साख बचाने की कोशिश में है, वहीं भाजपा अपने इस दुर्ग को बचाने के लिए आंतरिक गुटबाजी से जूझ रही है। पूर्व मंत्री रमेश धवाला और पूर्व विधायक होशियार सिंह के समर्थकों के बीच की खींचतान ने भाजपा के लिए राह मुश्किल कर दी है। पार्टी अब तक अपने आधिकारिक प्रत्याशियों की सूची तक फाइनल नहीं कर पाई है, जिसका सीधा फायदा कांग्रेस उठाने की फिराक में है। भाजपा के भीतर मचे इस दंगल ने 'कमल' की चमक को फीका करने का डर पैदा कर दिया है, जिससे कांग्रेस के खेमे में हलचल तेज हो गई है।

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सीएम की पत्नी की पर्दे के पीछे की रणनीति

विधायक कमलेश ठाकुर इस समय 'वेट एंड वॉच' की रणनीति पर काम कर रही हैं। सात वार्डों में उतरे 19 प्रत्याशियों में से कांग्रेस उन चेहरों पर दांव लगाने की तैयारी में है जो जीत के बाद पार्टी का हाथ थाम सकें। पार्टी सिंबल पर चुनाव न होने के बावजूद, पर्दे के पीछे से पूरा सरकारी तंत्र और संगठन सक्रिय है। विधायक की सीधी नजरें हर वार्ड की गतिविधियों पर हैं, क्योंकि वह जानती हैं कि 15 साल के भाजपाई वर्चस्व को खत्म करने के लिए केवल जनसंपर्क नहीं, बल्कि सटीक राजनीतिक कौशल की जरूरत है।

 

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17 मई को होगा बड़ा फैसला

देहरा नगर परिषद में इस बार सात वार्डों के लिए 19 उम्मीदवार मैदान में हैं। उम्मीदवार घर-घर जाकर प्रचार कर रहे हैं और स्थानीय मुद्दों को लेकर जनता के बीच पहुंच रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर गांवों की चौपालों तक चुनावी चर्चा तेज हो चुकी है। अब सबकी नजरें 17 मई को होने वाले मतदान और उसके नतीजों पर टिकी हैं। यह चुनाव तय करेगा कि देहरा में भाजपा का 15 साल पुराना किला कायम रहेगा या फिर कांग्रेस यहां नई राजनीतिक इबारत लिखने में कामयाब होगी।

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