शिमला। हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के चार साल पूरे होने से पहले प्रदेश की सियासत में मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल को लेकर हलचल फिर तेज हो गई है। लंबे समय से खाली चल रहे मंत्रिपद को भरने, विधानसभा उपाध्यक्ष के पद और मौजूदा मंत्रियों के विभागों में संभावित बदलाव को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। इस बीच दिल्ली दौरे से लौटे मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने मंत्रिमंडल विस्तार और पुनर्गठन को लेकर दिसंबर में सरकार के चार साल पूरे होने से पहले फैसला लेने के संकेत दिए हैं। उनके इस बयान के बाद अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री के अगले कदम और कांग्रेस हाईकमान के साथ होने वाली चर्चा पर टिक गई हैं।
दिल्ली दौरे लौटे सीएम सुक्खू ने दिया बड़ा संकेत
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू हाल ही में दिल्ली दौरे पर गए थे। इस दौरे में कुल्लू के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार भी उनके साथ दिल्ली गए थे। दिल्ली से लौटने के बाद मुख्यमंत्री ने शिमला में सचिवालय के दो नए विस्तार भवनों के उद्घाटन के अवसर पर उन्होंने मंत्रिमंडल के विस्तार और पुनर्गठन को लेकर सरकार की योजना स्पष्ट की।
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सीएम सुक्खू ने किया खुलासा कब होगा मंत्रिमंडल विस्तार
मुख्यमंत्री के मुताबिक कांग्रेस सरकार दिसंबर में अपने चार साल पूरे करने जा रही है और इससे पहले मंत्रिमंडल में रिक्त पदों को भरने तथा फेरबदल के स्वरूप पर निर्णय लिया जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि किस विधायक को मंत्री बनाया जाएगा या किन मंत्रियों के विभाग बदले जा सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि अंतिम निर्णय पार्टी हाईकमान के साथ विस्तृत चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।
खाली मंत्री पद पर किसकी लगेगी लॉटरी?
हिमाचल की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सुक्खू मंत्रिमंडल में खाली पद को भरने के लिए किस विधायक के नाम पर मुहर लगेगी। सरकार के कार्यकाल के अंतिम चरण की ओर बढ़ने के साथ इस पद को लेकर राजनीतिक चर्चाएं स्वाभाविक रूप से तेज हो गई हैं। संभावित नियुक्ति को लेकर विधायकों की दावेदारी, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संगठन के साथ तालमेल जैसे पहलुओं पर भी नजर रहेगी।
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हालांकि, अभी तक मुख्यमंत्री या कांग्रेस नेतृत्व की ओर से किसी संभावित मंत्री के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए फिलहाल किसी विधायक को तय दावेदार मानना जल्दबाजी होगी। इतना जरूर है कि मुख्यमंत्री की ओर से दिसंबर से पहले फैसला लेने का संकेत मिलने के बाद खाली पद को भरने की प्रक्रिया को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं।
विधानसभा उपाध्यक्ष का पद भी चर्चा में
मंत्रिमंडल विस्तार के साथ विधानसभा उपाध्यक्ष के पद को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं फिर शुरू हो गई हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और पार्टी नेतृत्व इस पद को लेकर क्या रुख अपनाते हैं। मंत्रिपद और विधानसभा उपाध्यक्ष के पद को लेकर होने वाले किसी भी निर्णय में राजनीतिक संतुलन, विधायकों की भूमिका और संगठनात्मक जरूरतें अहम हो सकती हैं।
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फिलहाल विधानसभा उपाध्यक्ष के पद को लेकर किसी नए निर्णय की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इस विषय को संभावित राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में ही देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में कांग्रेस नेतृत्व की बैठकों और मुख्यमंत्री के बयानों से इन चर्चाओं को लेकर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।
सिर्फ नया मंत्री या पूरी कैबिनेट में बदलाव?
सुक्खू सरकार के सामने अब मंत्रिमंडल विस्तार के साथ फेरबदल का विकल्प भी चर्चा में है। मुख्यमंत्री ने केवल खाली पद भरने की बात नहीं कही, बल्कि मंत्रिमंडल के पुनर्गठन का भी उल्लेख किया है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार केवल नए मंत्री को शामिल करेगी या कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव किया जाएगा।
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यदि मंत्रिमंडल में फेरबदल होता है, तो विभागों के कामकाज, प्रशासनिक प्राथमिकताओं और राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखा जा सकता है। हालांकि, किस मंत्री का विभाग बदलेगा या किसी मौजूदा मंत्री को हटाया जाएगा, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। अंतिम तस्वीर हाईकमान के साथ चर्चा और मुख्यमंत्री के निर्णय के बाद ही साफ होगी।
चार साल पूरे होने से पहले सरकार के लिए अहम दौर
हिमाचल में कांग्रेस सरकार दिसंबर में अपने चार साल पूरे करने की ओर बढ़ रही है। ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार को केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया के तौर पर नहीं, बल्कि सरकार और संगठन के बीच तालमेल से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में भी देखा जा रहा है। खाली पद को भरना, संभावित फेरबदल और विधानसभा उपाध्यक्ष के पद पर चर्चा आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति के प्रमुख विषय बने रह सकते हैं।
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मुख्यमंत्री सुक्खू ने स्पष्ट किया है कि मंत्रिमंडल से जुड़े फैसले पार्टी हाईकमान के साथ विचार-विमर्श के बाद लिए जाएंगे। अब राजनीतिक नजरें इस बात पर रहेंगी कि दिल्ली दौरे के बाद शुरू हुई चर्चाएं कब ठोस फैसले में बदलती हैं और क्या दिसंबर से पहले हिमाचल को नया मंत्री मिलता है।
दिल्ली में INDIA गठबंधन के प्रदर्शन की भी तैयारी
मंत्रिमंडल विस्तार के मुद्दे के अलावा मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर भी केंद्र और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण में अनियमितताओं के कारण वोटों की चोरी हुई और चुनावी नतीजे प्रभावित हुए। ये आरोप मुख्यमंत्री और कांग्रेस पक्ष के हैं।
सुक्खू ने कहा कि एसआईआर के मुद्दे पर INDIA गठबंधन जल्द दिल्ली में संयुक्त विरोध प्रदर्शन करेगा। उनके अनुसार, यह मुद्दा किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर देशव्यापी हो सकता है। कांग्रेस और गठबंधन के अन्य दल इस विषय पर एकजुट होकर अपनी आपत्ति दर्ज कराने की तैयारी में हैं।
प्रशासनिक पुनर्गठन पर भी सरकार का रुख स्पष्ट
राज्य में ब्लॉक, तहसील और जिलों की प्रशासनिक सीमाओं के पुनर्गठन को लेकर भी मुख्यमंत्री ने सरकार का पक्ष रखा। विपक्ष की ओर से आयोग के फैसलों को कानूनी और राजनीतिक चुनौती देने की रणनीति पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है।
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मुख्यमंत्री के मुताबिक, पुनर्गठन आयोग में दो नए सदस्य शामिल किए गए हैं और उनके कार्यालय की व्यवस्था की जा रही है। आयोग विभिन्न क्षेत्रों के भौगोलिक और जनसांख्यिकीय स्वरूप का अध्ययन करेगा। जरूरत के अनुसार जिला और तहसील सीमाओं में बदलाव, एसडीएम ब्लॉकों का पुनर्गठन और क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण किया जा सकता है। सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जनहितैषी बनाना है।
अब फैसले की तारीख और नए मंत्री के नाम का इंतजार
मुख्यमंत्री के ताजा बयान के बाद हिमाचल की राजनीति में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर अटकलों ने फिर जोर पकड़ लिया है। दिसंबर से पहले फैसले के संकेत ने खाली मंत्री पद, संभावित फेरबदल और विधानसभा उपाध्यक्ष के पद को लेकर चर्चा को नई दिशा दी है। लेकिन अभी तक न नए मंत्री का नाम घोषित हुआ है और न ही फेरबदल का अंतिम खाका सामने आया है।
