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October 18, 2026

वीरभद्र सिंह की प्रतिमा अनावरण में नहीं पहुंचे सुक्खू कैबिनेट के कई मंत्री और नेता; गरमाई सियासत

सुक्खू काल में कांग्रेस से निष्कासित नीरज भारती की एंट्री से भी बढ़ी हलचल

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Virbhadra Singh Statue Unveiling

रामपुर बुशहर/शिमला। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय राजा वीरभद्र सिंह की जन्मभूमि सराहन में उनकी प्रतिमा के अनावरण का कार्यक्रम धार्मिक आस्था और श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी सियासत के कई संकेत भी दे गया। आठवें नवरात्र और दुर्गाष्टमी के अवसर पर मां भीमाकाली की नगरी में आयोजित इस समारोह में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता एक मंच पर नजर आए, लेकिन दूसरी ओर कुछ प्रमुख नेताओं और सुक्खू मंत्रिमंडल के कई सदस्यों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाओं को भी जगह दे दी। इसी बीच, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर पहले सार्वजनिक रूप से नाराजगी जता चुके पूर्व विधायक नीरज भारती की कार्यक्रम में मौजूदगी ने समारोह को एक अलग राजनीतिक संदर्भ दे दिया।

 

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वीरभद्र सिंह की प्रतिमा का अनावरण ऐसे समय हुआ, जब प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व, राजनीतिक विरासत और अलग-अलग नेताओं के बीच संबंधों को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में सराहन में जुटे नेताओं की मौजूदगी के साथ-साथ अनुपस्थित चेहरों पर भी नजर रही। हालांकि, किसी नेता की गैरमौजूदगी को अपने आप में राजनीतिक विरोध या गुटबाजी का प्रमाण नहीं माना जा सकता, लेकिन इस कार्यक्रम में किसने शिरकत की और कौन नहीं पहुंचा, यह प्रदेश की सियासत के लिहाज से चर्चा का विषय जरूर बना।

एक मंच पर कांग्रेस के दिग्गज

सराहन में आयोजित समारोह में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, लोक निर्माण मंत्री एवं बुशहर रियासत के राजा विक्रमादित्य सिंह, पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सह-प्रभारी विदित चौधरी पहुंचे। इनके अलावा विधायक एवं एचपीटीडीसी के चेयरमैन रघुवीर सिंह बाली, वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर, विधायक कुलदीप सिंह राठौर और मोहन लाल ब्रागटा सहित अन्य नेता भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

 

 

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कांग्रेस के इन वरिष्ठ चेहरों की मौजूदगी ने वीरभद्र सिंह की राजनीतिक विरासत को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया। मंदिर में शीश नवाने के बाद नेताओं ने उनकी प्रतिमा का अनावरण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। स्थानीय लोगों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी नेताओं का स्वागत किया।

 

वीरभद्र सिंह छह बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और प्रदेश की राजनीति में उनका लंबा प्रभाव रहा। सराहन और रामपुर बुशहर से उनका गहरा संबंध था। ऐसे में उनकी जन्मभूमि पर प्रतिमा की स्थापना उनके राजनीतिक सफर, क्षेत्रीय जुड़ाव और समर्थकों के साथ उनके रिश्तों को याद करने का अवसर बनी।

 

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कई नेताओं की गैरमौजूदगी ने भी खींचा ध्यान

कार्यक्रम में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी के बीच कुछ नेताओं का नहीं पहुंचना भी राजनीतिक चर्चा का विषय रहा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रामपुर के विधायक नंदलाल का कार्यक्रम में शामिल होने का पहले प्रस्ताव था, लेकिन बीमारी के कारण वह नहीं पहुंच पाए। इसके अलावा सुक्खू मंत्रिमंडल के कई मंत्री भी समारोह में शामिल नहीं हुए।

 

ऐसे में सवाल उठे कि वीरभद्र सिंह जैसे वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस के सभी प्रमुख चेहरे एक साथ क्यों नजर नहीं आए। हालांकि, अनुपस्थित नेताओं की ओर से इसके पीछे के कारणों की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए उनकी गैरमौजूदगी को किसी खास राजनीतिक संदेश या असहमति से जोड़ना फिलहाल अटकल ही होगा।

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इसके बावजूद, हिमाचल कांग्रेस की राजनीति में वीरभद्र सिंह की विरासत का महत्व देखते हुए इस कार्यक्रम की राजनीतिक व्याख्या होना स्वाभाविक है। एक तरफ प्रदेश सरकार और संगठन से जुड़े कई बड़े नेता सराहन पहुंचे, तो दूसरी तरफ कुछ प्रमुख चेहरों का नहीं दिखना चर्चा का अलग विषय बन गया।

 

सुक्खू और हॉलीलॉज खेमे की सियासत के बीच नीरज भारती की एंट्री

इस समारोह का एक अहम राजनीतिक पहलू पूर्व विधायक एवं पूर्व मुख्य संसदीय सचिव नीरज भारती की मौजूदगी भी रही। कांग्रेस से छह साल के लिए निष्कासित नीरज भारती अपनी पत्नी मोनिका भारती के साथ सराहन पहुंचे और कार्यक्रम में पहली पंक्ति में बैठे नजर आए। यह दृश्य इसलिए चर्चा में आया, क्योंकि पार्टी से निष्कासन के बाद वह कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी वाले इस आयोजन में शामिल हुए।

नीरज भारती ने सुक्खू सरकार की कार्यशैली पर उठए थे सवाल

नीरज भारती को वीरभद्र सिंह की राजनीतिक विचारधारा और शैली से जुड़ा नेता माना जाता रहा है। दूसरी ओर, वह मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और प्रदेश सरकार की कार्यशैली को लेकर सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से नाराजगी भी जता चुके हैं। उन्होंने पार्टी नेतृत्व और जमीनी कार्यकर्ताओं से जुड़े मुद्दे उठाए थे। इसके बाद उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई और जून 2026 में उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किए जाने की जानकारी सामने आई।

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ऐसे राजनीतिक घटनाक्रम के बाद वीरभद्र सिंह की प्रतिमा के अनावरण समारोह में नीरज भारती की मौजूदगी ने चर्चाओं को और बढ़ा दिया। मुख्यमंत्री सुक्खू से नाराजगी जाहिर कर चुके पूर्व विधायक का वीरभद्र सिंह से जुड़े कार्यक्रम में पहुंचना इस लिहाज से अहम रहा कि समारोह में विक्रमादित्य सिंह और प्रतिभा सिंह सहित हॉलीलॉज से जुड़े प्रमुख चेहरे भी मौजूद थे।

 

हालांकि, नीरज भारती के कार्यक्रम में पहुंचने को कांग्रेस में वापसी, किसी औपचारिक राजनीतिक समीकरण या किसी खेमे के साथ नए तालमेल का संकेत मानने के लिए अभी पर्याप्त आधार नहीं है। लेकिन उनकी मौजूदगी ने यह जरूर दिखाया कि पार्टी की औपचारिक सदस्यता से बाहर होने के बावजूद वीरभद्र सिंह की राजनीतिक विरासत से जुड़ा संबंध उनके सार्वजनिक राजनीतिक व्यवहार में महत्वपूर्ण बना हुआ है।

 

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क्या वीरभद्र सिंह की विरासत फिर बनेगी सियासी चर्चा का केंद्र?

हिमाचल कांग्रेस में वीरभद्र सिंह की राजनीतिक विरासत का सवाल लंबे समय से अहम रहा है। सराहन में आयोजित यह समारोह भी इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। एक ओर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता श्रद्धांजलि देने पहुंचे, तो दूसरी ओर नीरज भारती जैसे निष्कासित नेता की मौजूदगी और कुछ मंत्रियों की गैरहाजिरी ने आयोजन को राजनीतिक चर्चा का विषय बना दिया।

 

 

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मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और हॉलीलॉज से जुड़े नेताओं के बीच राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं के बीच यह कार्यक्रम अलग-अलग नेताओं की मौजूदगी के कारण भी सुर्खियों में रहा। फिर भी, केवल उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर कांग्रेस के भीतर किसी नए शक्ति-संतुलन या गुटीय बदलाव का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। आने वाले दिनों में संबंधित नेताओं के बयान और पार्टी की गतिविधियां ही इन चर्चाओं को अधिक स्पष्ट आधार दे सकती हैं।

प्रतिमा के आधार में 54 पंचायतों की मिट्टी

वीरभद्र सिंह की प्रतिमा की स्थापना बुशहर स्पोर्ट्स, कल्चर एंड एनवायरनमेंट एसोसिएशन की ओर से की गई है। प्रतिमा के आधार में बुशहर क्षेत्र की 54 पंचायतों की मिट्टी रखी गई है। आयोजकों की इस पहल को वीरभद्र सिंह के क्षेत्र की धरती और यहां के लोगों के साथ उनके जुड़ाव के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। सराहन में मां भीमाकाली के दरबार के पास आयोजित इस समारोह ने एक बार फिर वीरभद्र सिंह के लंबे राजनीतिक जीवन और बुशहर क्षेत्र से उनके रिश्ते को याद करने का अवसर दिया। लेकिन श्रद्धांजलि के इस आयोजन में जुटे नेताओं और अनुपस्थित चेहरों के साथ नीरज भारती की मौजूदगी ने इसे हिमाचल कांग्रेस की मौजूदा सियासत के लिहाज से भी चर्चा में ला दिया।

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