शिमला। हिमाचल प्रदेश में जैसे-जैसे आगामी विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, प्रदेश की राजनीति में सरगर्मियां भी तेज होने लगी हैं। सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के बीच सियासी बयानबाजी का दौर अब और तीखा होता नजर आ रहा है। इसी बीच मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भाजपा पर सीधा हमला बोलते हुए ऐसा दावा कर दिया है, जिसने प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
16 विधायकों की हार का दावा
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दावा किया है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार होगी और कांग्रेस एक बार फिर रिपीट करेगी। इतना ही नहीं भाजपा के मौजूदा विधायकों में से 16 विधायकों को हार का सामना करना पड़ेगा। सीएम सुक्खू के इस दावे के बाद राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। हालांकि सीएम सुक्खू ने भाजपा के कौन कौन विधायक अगला चुनाव हारेंगे, इसका खुलासा नहीं किया है। हालांकिए चुनाव में किस दल को कितनी सीटें मिलेंगी और किन विधायकों को जीत या हार का सामना करना पड़ेगाए इसका वास्तविक आकलन मतदान और नतीजों के बाद ही संभव होगा।
भाजपा के आरोपों का नहीं पड़ता फर्क, फैसला जनता करेगी
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भाजपा की ओर से सरकार के खिलाफ चाहे कितने भी आरोप लगाए जाएं, लेकिन अंतिम फैसला जनता को ही करना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार अपने कार्यकाल में हर वर्ग के विकास के लिए काम कर रही है और सरकार के पास अभी 13 महीने का कार्यकाल शेष है।
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ऐसे में कांग्रेस सरकार अपने कामकाज और जनकल्याणकारी योजनाओं के आधार पर जनता के बीच जाएगी। सुक्खू के इस बयान ने चुनाव से पहले ही सियासी मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। अब सवाल यह है कि भाजपा मुख्यमंत्री के इस दावे का किस अंदाज में जवाब देती है और क्या यह बयान आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव को और तेज करेगा।
भाजपा में गुटबाजी पर बोले सुक्खू- हर गुट का अपना नेता
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भाजपा की अंदरूनी राजनीति को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश भाजपा पांच गुटों में बंटी हुई है और पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर खींचतान चल रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार भाजपा में एक गुट के विधायकों को दूसरे गुट में जाने से रोकने के लिए तरह-तरह के बयान दिए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के प्रत्येक गुट का अपना नेता है और भाजपा के भीतर आपसी खींचतान की स्थिति बनी हुई है।
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नेता प्रतिपक्ष को हटाने में जुटा है एक गुट
सुक्खू ने यह भी कहा कि भाजपा का एक गुट नेता प्रतिपक्ष को ही हटाना चाहता है। उनके इस बयान ने प्रदेश भाजपा के संगठनात्मक समीकरणों और नेतृत्व की स्थिति को लेकर नई राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। हालांकि, गुटबाजी को लेकर मुख्यमंत्री की ओर से लगाए गए इन आरोपों पर भाजपा की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
चुनाव से पहले जोड़तोड़ की राजनीति की चर्चा तेज
हिमाचल की राजनीति में चुनावी तैयारियां केवल जनसभाओं, आरोप-प्रत्यारोप और विकास कार्यों के दावों तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि नेताओं के बीच बदलते समीकरण भी अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में भाजपा में गुटबाजी को लेकर मुख्यमंत्री का बयान राजनीतिक जोड़तोड़ की संभावनाओं पर भी चर्चा को हवा दे सकता है। चुनाव नजदीक आने के साथ ही दोनों प्रमुख दलों में टिकट के दावेदारों, संगठन में प्रभाव रखने वाले नेताओं और अपने-अपने समर्थकों को मजबूत करने की कवायद तेज होने की संभावना है।
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जयराम ठाकुर सुर्खियां बटोरने का कर रहे प्रयास
मुख्यमंत्री सुक्खू ने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि जयराम ठाकुर केवल सुर्खियों में बने रहने के लिए बयानबाजी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक अगले दिन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, विशेषकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को समाचारों की कटिंग दिखाने के उद्देश्य से प्रतिदिन नए बयान दिए जा रहे हैं।
सुक्खू के इस हमले को प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस और भाजपा के बीच बढ़ती तल्खी के तौर पर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने जिस तरह नेता प्रतिपक्ष की बयानबाजी पर सवाल उठाए, उससे स्पष्ट है कि सरकार अब विपक्ष के हमलों का जवाब राजनीतिक मोर्चे पर भी आक्रामक तरीके से देने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर, भाजपा लगातार सरकार के कामकाज और विभिन्न मुद्दों को लेकर कांग्रेस को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है।
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16 विधायकों की हार का दावा
मुख्यमंत्री का यह दावा कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के 16 मौजूदा विधायकों को हार का सामना करना पड़ेगा, इस बयानबाजी का सबसे अहम राजनीतिक पहलू है। इस तरह का दावा विपक्षी दल के चुनावी प्रदर्शन को लेकर जनता के बीच एक संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, चुनाव में किस दल को कितनी सीटें मिलेंगी और किन विधायकों को जीत या हार का सामना करना पड़ेगा, इसका वास्तविक आकलन मतदान और नतीजों के बाद ही संभव होगा।
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चुनावी रण से पहले सियासी माहौल गरम
हिमाचल प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से राजनीतिक जमीन तैयार होने लगी है। कांग्रेस जहां सरकार के कामकाज और विकास के मुद्दों को आगे रखने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा सरकार को घेरने और विपक्ष की भूमिका को मजबूत करने में जुटी है। इस बीच गुटबाजी, नेतृत्व की खींचतान और संभावित राजनीतिक जोड़तोड़ जैसे मुद्दे चुनावी चर्चा का हिस्सा बनते जा रहे हैं।
