बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश की सियासत में बिलासपुर जिले स्थित घुमारवीं से उठी चिंगारी अब प्रदेश की राजधानी तक पहुंचती दिख रही है। पिछले 14 दिन से चल रहे भाजपा के क्रमिक अनशन के बीच सांसद अनुराग ठाकुर के धरना स्थल पर पहुंचते ही मामला और गरमा गया।
मंच से सांसद अनुराग ठाकुर ने सीधे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और सरकार पर निशाना साधते हुए ऐसा बयान दिया, जिसने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने सरकार को पुलिस के पीछे छिपने के बजाय सीधे सामने आकर भाजपा के सवालों का जवाब देने की चुनौती दी।
अनुराग बोले- सरकार सामने आकर जवाब दे
सांसद अनुराग ठाकुर ने अनशन पर बैठे भाजपा कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और उनकी मांगों को सुना। दरअसल, यह आंदोलन पुलिस कार्रवाई में कथित भेदभाव और भाजपा कार्यकर्ताओं की शिकायतों पर कार्रवाई न होने के आरोपों को लेकर चल रहा है।
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भाजपा का कहना है कि 2 सितंबर को उसके कार्यकर्ताओं के खिलाफ FIR दर्ज की गई, जबकि इसी घटनाक्रम से जुड़ी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ दी गई शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई।
लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना अपराध नहीं
अनुराग ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और प्रदेश सरकार के मंत्रियों को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि सरकार को पुलिस के पीछे रहने के बजाय सामने आकर भाजपा के सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना अपराध नहीं है।
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उनके मुताबिक अगर सरकार से जवाब मांगना गुनाह माना जाता है तो भाजपा कार्यकर्ता बार-बार सवाल उठाते रहेंगे। सांसद ने सरकार से दर्ज मामलों को वापस लेने और पूरे विवाद पर माफी मांगने की मांग भी रखी।
मुकदमे संघर्ष नहीं रोक सकते
अनुराग ठाकुर ने कहा कि पुलिस की ओर से दर्ज धाराएं और मुकदमे अपनी जगह हैं, लेकिन भाजपा कार्यकर्ता सरकार से जवाब मांगने का सिलसिला जारी रखेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यकर्ताओं की आवाज दबाने के लिए FIR का सहारा लिया जा रहा है।
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यह आरोप भाजपा नेताओं की ओर से लगाया गया है। पुलिस और सरकार का इस पूरे प्रकरण में पक्ष अलग हो सकता है और FIR में दर्ज आरोपों का अंतिम निर्धारण जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।
दो सितंबर की FIR के बाद शुरू हुआ विवाद
भाजपा नेताओं के मुताबिक, 2 सितंबर को थाना घुमारवीं में पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ FIR संख्या 176 और 178 दर्ज की गई थी। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने समान प्रकृति के मामलों को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी पुलिस में शिकायतें दीं। भाजपा का आरोप है कि इन शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
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इसी मुद्दे को लेकर 8 सितंबर से थाना घुमारवीं के बाहर क्रमिक धरना और अनशन शुरू किया गया। बाद में भाजपा ने जिला मुख्यालय तक प्रदर्शन करते हुए पुलिस अधीक्षक कार्यालय में ज्ञापन भी सौंपा और पूरे मामले में समान एवं निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।
आंदोलन को आगे बढ़ाने की चेतावनी
भाजपा नेताओं का कहना है कि यदि उनकी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई और विवाद से जुड़े मामलों में निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। इससे पहले भी भाजपा की ओर से आंदोलन को प्रदेश स्तर तक ले जाने की चेतावनी दी जा चुकी है।
फिलहाल घुमारवीं का यह विवाद स्थानीय पुलिस कार्रवाई से आगे बढ़कर प्रदेश की सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव का मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में सरकार और पुलिस प्रशासन की ओर से होने वाली कार्रवाई पर आंदोलन की अगली दिशा निर्भर करेगी।
