दिल्ली/हमीरपुर। पेपर लीक और परीक्षा में संगठित नकल के खिलाफ केंद्र सरकार की प्रस्तावित सख्ती को लेकर लोकसभा में जमकर चर्चा हुई। हमीरपुर से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2026 का समर्थन करते हुए कहा कि पेपर लीक केवल परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर खतरा है। उन्होंने इसे आतंकवाद और नक्सलवाद जैसी गंभीर चुनौतियों के समान बताते हुए परीक्षा माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया।

पेपर लीक को युवाओं के भविष्य पर हमला बताया

लोकसभा में चर्चा के दौरान अनुराग ठाकुर ने कहा कि जब किसी प्रतियोगी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होता है तो नुकसान सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहता। इससे वर्षों तक तैयारी करने वाले लाखों अभ्यर्थियों का समय, मेहनत और भरोसा प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि परीक्षा में धांधली करने वाले संगठित गिरोह युवाओं की मेहनत के साथ खिलवाड़ करते हैं। ऐसे नेटवर्क को खत्म करना जरूरी है, ताकि योग्य उम्मीदवारों को उनकी प्रतिभा और मेहनत के आधार पर अवसर मिल सके।

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अनुराग ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2024 में सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर रोक लगाने के लिए देश में पहली बार व्यापक एंटी-चीटिंग कानून लागू किया था। अब प्रस्तावित संशोधन के जरिए इस कानूनी ढांचे को और प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उनके मुताबिक संशोधित प्रावधानों में दोषियों पर कार्रवाई को अधिक कठोर बनाने, जांच को समयबद्ध करने और जिम्मेदारी तय करने पर विशेष जोर दिया गया है। उद्देश्य यह है कि परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई लंबी प्रक्रिया में न फंसे और प्रभावित अभ्यर्थियों को समय पर न्याय मिल सके।

परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही भी होगी तय

सांसद ने कहा कि परीक्षा में अनियमितता होने पर सिर्फ पेपर लीक करने वाले व्यक्ति तक कार्रवाई सीमित नहीं रहनी चाहिए। परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों और उनके वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी भी निर्धारित होनी चाहिए। उनके अनुसार, प्रस्तावित संशोधन इसी दिशा में जवाबदेही का दायरा बढ़ाने का प्रयास करता है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही, मिलीभगत या अनुचित गतिविधि सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए। लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस पर भी हमला बोला।

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उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों ने पेपर लीक और परीक्षा माफिया से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पर्याप्त कठोर कानूनी व्यवस्था तैयार नहीं की। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आए कथित अनियमितता के मामलों का उल्लेख किया। साथ ही राजस्थान, झारखंड, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में भर्ती परीक्षाओं को लेकर सामने आए विवादों का भी जिक्र किया। अनुराग ठाकुर ने कहा कि परीक्षा से जुड़े मामलों में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई हो।

हिमाचल में भर्ती व्यवस्था को लेकर सरकार पर हमला

अपने संबोधन के दौरान अनुराग ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश की भर्ती और शिक्षा व्यवस्था को लेकर प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विवादों ने प्रदेश के युवाओं के बीच सरकारी परीक्षाओं को लेकर विश्वास को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि जब कोई युवा वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करता है और बाद में पेपर लीक या नकल की खबर सामने आती है तो उसका मनोबल टूटता है। इसलिए भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना सरकार की बड़ी जिम्मेदारी है।

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अनुराग ठाकुर ने विपक्षी दलों से अपील की कि परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे को केवल राजनीतिक बहस तक सीमित न रखा जाए। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़ा विषय होने के कारण सभी दलों को ऐसे कानूनों का समर्थन करना चाहिए, जो परीक्षा में भ्रष्टाचार, नकल और पेपर लीक के नेटवर्क पर प्रभावी रोक लगा सकें। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को भरोसा हो कि उनका भविष्य किसी परीक्षा माफिया या संगठित नकल गिरोह के हाथों में नहीं है।

परीक्षा माफिया पर शिकंजा कसने का संदेश

अनुराग ठाकुर के संबोधन का मुख्य फोकस परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और दोषियों की जवाबदेही पर रहा। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास केवल पेपर लीक होने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जिसमें प्रश्नपत्र लीक करने या परीक्षा में संगठित धांधली करने वाले नेटवर्क के लिए जगह ही न बचे।

अब प्रस्तावित संशोधन पर आगे की संसदीय प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। यदि विधेयक कानून का रूप लेता है, तो परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं, अभ्यर्थियों और कथित परीक्षा माफिया के खिलाफ कार्रवाई के मौजूदा ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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