शिमला। मातृत्व अवकाश की मांग करने के महज तीन दिन बाद नौकरी से हटाई गई महिला वैज्ञानिक को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनकी सेवा समाप्ति के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए उन्हें तत्काल पद पर बहाल करने और काम जारी रखने की अनुमति देने के निर्देश दिए हैं। गर्भवती महिला वैज्ञानिक से जुड़े इस मामले में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप को मातृत्व लाभ और महिला कर्मचारियों के अधिकारों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
मां बनना किसी भी महिला के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है और मातृत्व लाभ से जुड़े अधिकारों को लेकर कानून में भी प्रावधान किए गए हैं। ऐसे में मातृत्व लाभ की मांग के तुरंत बाद किसी कर्मचारी की सेवाएं समाप्त किए जाने का मामला अदालत पहुंचा तो हाईकोर्ट ने इस पर गंभीरता से विचार किया। हालांकि अदालत का मौजूदा आदेश अंतरिम राहत है और मामले के अंतिम कानूनी निष्कर्ष पर अभी फैसला होना बाकी है।
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मातृत्व लाभ मांगा तो नौकरी से निकाला
यह मामला डॉ. आईना शर्मा का है, जिन्हें केंद्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग से वित्त पोषित वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैबोरेटरी (वीआरडीएल) योजना के तहत साइंटिस्ट-बी (मेडिकल) के पद पर नियुक्त किया गया था। उनकी नियुक्ति 14 मार्च 2024 को जारी विज्ञापन के आधार पर हुई थी। शुरुआत में एक वर्ष के लिए दी गई नियुक्ति को बाद में बढ़ाकर 31 मार्च 2027 तक कर दिया गया था।
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याचिका के अनुसार, डॉ. शर्मा ने 4 अगस्त 2026 को विभाग के समक्ष मातृत्व लाभ के लिए आवेदन किया था। इसके महज तीन दिन बाद, 7 अगस्त 2026 को विभाग ने उनकी सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद महिला वैज्ञानिक ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और सेवा समाप्ति के फैसले को चुनौती दी।
विभाग ने स्टाफिंग पैटर्न में बदलाव का दिया हवाला
सेवाएं समाप्त करने के पीछे विभाग ने 16वें वित्त आयोग की अवधि यानी वर्ष 2026-27 से 2030-31 के दौरान संशोधित वीआरडीएल योजना के नए स्टाफिंग पैटर्न को लागू करने का तर्क दिया। विभाग की ओर से इसी बदलाव को सेवा समाप्ति के फैसले का आधार बताया गया।
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वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि जब उनकी नियुक्ति की अवधि पहले ही 31 मार्च 2027 तक बढ़ाई जा चुकी थी, तो बीच में सेवाएं समाप्त करने का निर्णय उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि योजना को पूरी तरह बंद नहीं किया जा रहा, बल्कि इसके नाम और स्टाफिंग व्यवस्था में बदलाव कर नए सिरे से अनुबंध के आधार पर कर्मचारियों को रखने की प्रक्रिया प्रस्तावित है। याचिकाकर्ता ने मातृत्व लाभ के लिए आवेदन करने के तुरंत बाद सेवा समाप्त किए जाने को अवैध और भेदभावपूर्ण बताते हुए अदालत से राहत मांगी।
हाईकोर्ट ने सेवा समाप्ति के आदेश पर लगाई अंतरिम रोक
मामले की सुनवाई न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत में हुई। याचिका में पेश किए गए तथ्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले में हस्तक्षेप को उचित पाया। हाईकोर्ट ने 7 अगस्त 2026 को जारी सेवा समाप्ति के आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी। अदालत ने निर्देश दिया कि डॉ. आईना शर्मा को उनके मूल नियुक्ति पत्र के तहत साइंटिस्ट-बी के पद पर काम जारी रखने दिया जाए। इस आदेश से फिलहाल महिला वैज्ञानिक को राहत मिली है और उन्हें अपनी नौकरी जारी रखने का अवसर मिला है।
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केंद्र और अन्य प्रतिवादियों से चार सप्ताह में जवाब तलब
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है। आगे की सुनवाई में प्रतिवादियों का पक्ष और मामले से जुड़े अन्य कानूनी पहलू सामने आएंगे।
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फिलहाल अदालत के अंतरिम आदेश ने महिला वैज्ञानिक को राहत दी है। यह मामला एक अहम सवाल भी उठाता है कि मातृत्व लाभ की मांग और किसी कर्मचारी की सेवा समाप्ति के बीच संबंध होने के आरोपों की जांच किस तरह की जानी चाहिए। अब सभी की नजरें अगली सुनवाई पर रहेंगी, जहां इस विवाद के अन्य पहलुओं पर विचार किया जाएगा।
