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October 12, 2026

शिमला पुलिस ने पकड़ा 5 किलो चिट्टा!... 10 माह में 549 नशा तस्कर गिरफ्तार; LSD भी मिला

पुलिस ने नशा तस्करों की 12ण्61 करोड़ की संपत्ति की जब्त

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Shimla Chitta News

शिमला। देवभूमि हिमाचल प्रदेश में सफेद जहर यानी चिट्टे का जाल किस कद्र पैर पसार चुका है, इसकी बानगी हैरान करने वाली है। राज्य के युवाओं की रगों में घुल रहे इस जहर के आंकड़े इतने डरावने हैं कि खुद कानून के रखवाले भी दंग रह गए हैं। हालात यह हैं कि सिर्फ एक ही जिले (शिमला) में पुलिस ने महज 10 महीनों के भीतर 5 किलोग्राम से अधिक चिट्टा बरामद कर सनसनी फैला दी है। पुलिस की ताजा रिपोर्ट इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि नशा तस्कर अब किस खतरनाक स्तर पर हिमाचल की युवा पीढ़ी को अपनी गिरफ्त में ले रहे हैं।

10 महीने में 271 मामले, 549 आरोपियों की गिरफ्तारी

शिमला पुलिस की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, 9 अक्टूबर 2026 तक एनडीपीएस एक्ट के तहत कुल 271 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में 549 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। दर्ज मुकदमों में 22 मामले वाणिज्यिक मात्रा और 177 मामले मध्यवर्ती मात्रा से संबंधित बताए गए हैं। पुलिस की कार्रवाई का दायरा जिले में नशे की बरामदगी, आरोपियों की गिरफ्तारी और तस्करी से जुड़े नेटवर्क की पहचान तक फैला हुआ है। हालांकि, गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों को दोषी नहीं माना जा सकता; मामलों में दोष का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।

 

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चिट्टा-चरस के साथ एलएसडी जैसा खतरनाक नशा भी पकड़ा

पुलिस की कार्रवाई में चिट्टे के अलावा कई अन्य नशीले पदार्थ भी पकड़े गए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इस वर्ष अब तक करीब 15.5 किलोग्राम चरस, 14 किलोग्राम अफीम, पांच किलोग्राम पोस्त और 58.5 ग्राम मेथ क्रिस्टल बरामद किया गया है। इसके अलावा वाणिज्यिक मात्रा में एलएसडी भी जब्त की गई है। अलग-अलग नशीले पदार्थों की बरामदगी से स्पष्ट है कि पुलिस को जिले में नशे से जुड़े विभिन्न प्रकार के मामलों पर कार्रवाई करनी पड़ रही है।

61 सप्लाई नेटवर्क ध्वस्त, मुख्य सप्लायरों पर शिकंजा

शिमला पुलिस ने नशे के कारोबार की जड़ तक पहुंचने के लिए आरोपियों से पूछताछ और बैकवर्ड लिंकेज की जांच पर जोर दिया है। पुलिस के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक 61 ड्रग सप्लाई नेटवर्क को ध्वस्त किया गया है और 80 मुख्य सप्लायरों को गिरफ्तार किया गया है। इस जांच में उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है, जो नशे की खेप उपलब्ध कराने और उसकी सप्लाई व्यवस्था संचालित करने में शामिल बताए जाते हैं। पुलिस का मानना है कि नेटवर्क के मुख्य लोगों तक पहुंचने से नशे के अवैध कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई की जा सकती है।

 

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नशे की कमाई से बनाई संपत्तियों पर भी कार्रवाई

नशा तस्करी के खिलाफ अभियान में पुलिस ने आर्थिक गतिविधियों पर भी ध्यान केंद्रित किया है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार, नशे के अवैध कारोबार से अर्जित बताई गई 12.61 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों को जब्त या फ्रीज किया गया है। इसके अतिरिक्त, एक मामले में आरोपी द्वारा लोक निर्माण विभाग की सरकारी जमीन पर कब्जा कर बनाए गए अस्थायी ढाबे या रेस्टोरेंट को संबंधित विभाग ने पुलिस की सहायता से ध्वस्त किया और भूमि को अतिक्रमण मुक्त करवाया। इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य अवैध कारोबार से जुड़े आर्थिक लाभ पर रोक लगाना भी है।

 

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भांग और अफीम की अवैध खेती भी नष्ट

पुलिस ने नशीले पदार्थों की तस्करी के साथ-साथ अवैध खेती के खिलाफ भी कार्रवाई की है। जारी आंकड़ों के मुताबिक, अभियान के दौरान भांग के लगभग 10 लाख पौधे और अफीम के करीब छह हजार पौधे नष्ट किए गए। पुलिस ने वर्ष 2026 में अब तक 40 लोगों को पीआईटी-एनडीपीएस एक्ट के तहत निरुद्ध करने की कार्रवाई भी की है। इन कदमों के जरिए नशीले पदार्थों के उत्पादन और उनकी अवैध सप्लाई से जुड़े स्रोतों पर रोक लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

 

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एसएसपी गौरव सिंह बोले, सप्लाई चेन तक पहुंचना प्राथमिकता

एसएसपी शिमला गौरव सिंह के अनुसार, नशा तस्करी के मामलों में पुलिस की जांच केवल स्थानीय स्तर पर बरामदगी और गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। आरोपियों से पूछताछ और बैकवर्ड लिंकेज के आधार पर मुख्य सप्लायरों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में इस तरह की जांच के आधार पर आठ और वर्ष 2024 में 14 गिरफ्तारियां हुई थीं, जबकि 2026 में यह संख्या पिछले दोनों वर्षों के आंकड़ों से अधिक रही है। पुलिस नशे के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने और अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए कार्रवाई जारी रखे हुए है।

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युवाओं को नशे से बचाना बड़ी चुनौती

चिट्टे और अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी के मामले परिवारों और समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। पुलिस की कार्रवाई के आंकड़े जिले में नशे के खिलाफ अभियान के व्यापक स्तर को सामने रखते हैं, लेकिन नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल गिरफ्तारियां ही पर्याप्त नहीं हैं। जागरूकता, समय पर सहायता, परिवारों की भागीदारी और नशे की लत से जूझ रहे लोगों के पुनर्वास की भी अहम भूमिका है। शिमला पुलिस की कार्रवाई के बीच अब चुनौती यह है कि नशे की सप्लाई पर रोक लगाने के साथ युवाओं को इसके दुष्प्रभावों से बचाने के प्रयास भी मजबूत किए जाएं।

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