शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा बाहरी राज्यों के वाहनों पर लगाए गए एंट्री टैक्स को लेकर अब विवाद गहराता जा रहा है। इसी के विरोध में पंजाब के विभिन्न संगठनों ने दैणी बॉर्डर पर जोरदार प्रदर्शन किया- जिसने देखते ही देखते बड़े आंदोलन का रूप ले लिया।
एंट्री टैक्स पर प्रदर्शन
प्रदर्शनकारियों ने कीरतपुर-मनाली नेशनल हाईवे को जाम कर दिया। जिससे दोनों राज्यों के बीच यातायात पूरी तरह ठप हो गया और हजारों वाहन लंबी कतारों में फंस गए।
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रास्तों में लगा लंबा जाम
शनिवार को शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन करीब छह घंटे तक जारी रहा। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी लाइनें लग गईं, जिनमें पर्यटकों की गाड़ियां, निजी वाहन और मालवाहक ट्रक शामिल थे।
कई घंटे फंसे रही गाड़ियां
खासतौर पर सीमेंट से लदे 150 से अधिक ट्रक बघेरी से पंजाब और हिमाचल की ओर जा रहे थे- जो इस जाम में बुरी तरह फंस गए। जाम का असर कीरतपुर से लेकर स्वारघाट तक साफ देखा गया, जहां यात्री घंटों परेशान रहे।
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मंत्री ने CM को दी सीधी वार्निंग
धरना-प्रदर्शन के दौरान माहौल उस समय और गर्म हो गया जब पंजाब सरकार के मंत्री हरजोत सिंह बैंस मौके पर पहुंचे। उन्होंने हिमाचल सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अगर यह तथाकथित “जजिया टैक्स” वापस नहीं लिया गया- तो पंजाब सरकार भी हिमाचल से आने वाले वाहनों पर समान एंट्री टैक्स लगाने से पीछे नहीं हटेगी।
नए-नए टैक्स थोप रही सुक्खू सरकार
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस स्थिति के लिए हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू जिम्मेदार होंगे। बैंस ने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश आर्थिक दबाव से जूझ रहा है और सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए आम जनता पर नए-नए टैक्स थोप रही है। उन्होंने यह भी बताया कि इस मुद्दे पर उनकी बातचीत पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से हो चुकी है और जल्द ही इस पर कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा।
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कारोबार पर पड़ेगा सीधा असर
इस मुद्दे पर स्थानीय व्यापार और पर्यटन से जुड़े लोग भी खुलकर सामने आ गए हैं। हिमाचल टैक्सी यूनियन के प्रधान राम रतन ने सरकार के इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि हरियाणा और पंजाब से आने वाले वाहनों पर एंट्री टैक्स लगाने से पर्यटन उद्योग पर सीधा असर पड़ेगा।
उनका कहना था कि हिमाचल की पहचान एक खुले और स्वागत करने वाले पर्यटन स्थल के रूप में रही है। मगर इस तरह के फैसलों से पर्यटकों में गलत संदेश जा रहा है।
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अफसरशाही को ठहराया जिम्मेदार
वहीं टैक्सी-मैक्सी ऑपरेटर एसोसिएशन मनाली के अध्यक्ष अभि ठाकुर ने इस पूरे विवाद के लिए अफसरशाही को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि अधिकारी जमीनी सच्चाई को समझने में नाकाम रहे हैं और दोनों राज्यों की सरकारों को गलत जानकारी दे रहे हैं।
भाजाप MLA भी धरने पर
उनका कहना था कि सड़क पर फंसे लोगों और व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जबकि प्रशासनिक स्तर पर स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
धरना स्थल पर पहुंचे भाजपा विधायक डॉ. जनक राज ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि अपने ही देश में एक राज्य से दूसरे राज्य में आने-जाने पर इस तरह का टैक्स लगाना लोगों की भावनाओं के खिलाफ है।
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पंजाब-हिमाचल में बढ़ा तनाव
फिलहाल, एंट्री टैक्स को लेकर हिमाचल और पंजाब के बीच यह तनातनी थमती नजर नहीं आ रही है। प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द कोई समाधान नहीं निकाला, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर और बड़ा रूप ले सकता है।
