शिमला। हिमाचल प्रदेश में जमीन से बेदखली के खिलाफ किसानों और बागवानों का गुस्सा फूट पड़ा है। मंगलवार को भारी बारिश के बीच भी सैकड़ों की संख्या में किसान और बागवान शिमला स्थित सचिवालय के घेराव करेंगे।
सचिवालय का घेराव करेंगे किसान-बागवान
यह प्रदर्शन हिमाचल किसान सभा और सेब उत्पादक संघ के बैनर तले किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि उन्हें जमीन का मालिकाना हक मिले और हाईकोर्ट के आदेशों के तहत चल रही बेदखली की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए।
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आक्रेश रैली निकालेंगे
राजधानी के टॉलैंड क्षेत्र में सुबह से ही किसान-बागवान जुटना शुरू हो गए हैं- यहां से कुछ ही देर में ये सभी सचिवालय की ओर आक्रोश रैली निकालेंगे। प्रदर्शन की अगुवाई सेब उत्पादक संघ के अध्यक्ष सोहन ठाकुर कर रहे हैं।
भारी बारिश में फंसे कुछ
उन्होंने बताया कि भारी बारिश के बावजूद चंबा, भरमौर और किन्नौर जैसे दूरदराज क्षेत्रों से किसान रातोंरात बसों और निजी वाहनों में शिमला के लिए निकल गए हैं। वहीं, कुल्लू और मंडी जिलों में भारी वर्षा और भूस्खलन के कारण कुछ किसान रास्तों में फंस गए हैं, फिर भी वे संपर्क में हैं और जल्द प्रदर्शन में शामिल होंगे।
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क्या है प्रमुख मांगें?
प्रदर्शनकारियों की तीन मुख्य मांगे हैं-
- भूमिहीन किसानों को 5 बीघा जमीन दी जाए।
- वर्षों से जो किसान वन भूमि पर खेती कर रहे हैं उन्हें मालिकाना हक दिया जाए।
- हाईकोर्ट द्वारा दी गई बेदखली की कार्रवाई पर स्थाई रोक लगाई जाए।
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क्या है पूरा मामला?
बता दें कि हिमाचल हाईकोर्ट ने बीती 2 जुलाई को आदेश जारी कर वन भूमि पर कब्जा कर उगाए गए सेब के बगीचों को हटाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद शिमला जिले के कोटखाई और कुमारसैन क्षेत्रों में 4500 से अधिक सेब के पेड़ काटे जा चुके हैं।
सेब के पेड़ काटे
यह कार्रवाई किसानों के लिए किसी सदमे से कम नहीं रही। हालांकि, बाद में शिमला के पूर्व डिप्टी मेयर टिकेंद्र सिंह पंवर और एक अन्य याचिकाकर्ता द्वारा यह आदेश सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने फलों से लदे पेड़ों को काटने पर रोक तो लगा दी, लेकिन बेदखली की तलवार अभी भी लटकी हुई है।
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इसी असमंजस और आशंका के बीच किसान अब सरकार से सीधी मांग कर रहे हैं कि उन्हें बेदखल न किया जाए, बल्कि उनकी मेहनत और वर्षों के श्रम को सम्मान देते हुए उन्हें जमीन का मालिकाना हक दिया जाए। सचिवालय के बाहर माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। पुलिस तैनात है लेकिन किसान शांतिपूर्ण प्रदर्शन की बात कह रहे हैं। आने वाले घंटों में सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं।
