मंडी। हिमाचल प्रदेश में बीते रोज घोषित हुए बीडीसी और जिला परिषद चुनाव परिणामों ने कई राजनीतिक समीकरण बदल दिए। इस बार के चुनावों में जहां कई दिग्गज नेता अपनी साख बचाने में नाकाम रहे, वहीं कई क्षेत्रों में जनता ने सादगी, समर्पण और जमीनी कार्यशैली को प्राथमिकता देकर चौंकाने वाले फैसले सुनाए। ऐसे ही परिणामों के बीच मंडी जिला के सदयाणा वार्ड से सामने आई एक कहानी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई हैए जिसने लोकतंत्र की ताकत और आम कार्यकर्ता के सम्मान को नई पहचान दी है।
भाजपा ने चाय वाले को दिया था टिकट
दरअसल सदयाणा वार्ड से चाय पिलाने वाले परस राम जिला परिषद का चुनाव जीते हैं। परस राम वर्षों से मंडी भाजपा कार्यालय में आने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं को गर्मा गर्म चाय पिलाते थे। परस राम की इसी वफादारी को देखते हुए भाजपा ने सदयाणा वार्ड से इस बार परसराम को जिला परिषद का टिकट दे दिया। हालांकि शुरूआत में जब भाजपा ने उन्हें उम्मीदवार बनाया तो राजनीतिक गलियारों में तरह.तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कई लोगों ने इसे जोखिम भरा फैसला माना, लेकिन जब परिणाम सामने आए तो सभी चौंक गए। परस राम ने कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार को भारी मतों से शिकस्त दे दी थी।
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जनता ने दिया भरोसे का मजबूत जनादेश
सदयाणा वार्ड में हुए मुकाबले में परस राम को मतदाताओं का भरपूर समर्थन मिला। उन्होंने 7,031 मत हासिल किएए जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस समर्थित धर्मेंद्र कुमार को 5,615 वोट मिले। इस तरह परस राम ने 1,416 मतों के उल्लेखनीय अंतर से जीत दर्ज कर जिला परिषद सदस्य का चुनाव अपने नाम किया। चुनावी परिणाम घोषित होते ही समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। क्षेत्र में जश्न का माहौल बन गया और लोगों ने इसे आम कार्यकर्ता की जीत के रूप में देखा।
चाय वाले को सौंपी सत्ता की कुर्सी
परस राम की कहानी केवल एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि सादगी और समर्पण की मिसाल है। कल तक जो परस राम भाजपा कार्यालय की सीढ़ियों पर खड़े होकर, कड़कड़ाती ठंड और तपती धूप में हर आने-जाने वाले नेता और कार्यकर्ता के हाथों में अदब के साथ चाय का गर्म कप थमाते थे, आज जनता ने उन्हीं हाथों में अपनी तकदीर और क्षेत्र के विकास की चाबी सौंप दी है। भाजपा कार्यालय हो या पार्टी की कोई बड़ी रैली, पीठ पर जिम्मेदारियों का बोझ और चेहरे पर हमेशा एक निश्छल मुस्कान लिए सभी को चाय परोसने वाले परस राम आज खुद मंच के केंद्र में आ गए हैं।
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सादगी और सेवा की राजनीति को मिला सम्मान
परस राम की जीत केवल एक सीट जीतने तक सीमित नहीं मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम उस सोच का प्रतीक है जिसमें मतदाता अब केवल बड़े नामों या प्रभावशाली चेहरों के बजाय जमीन से जुड़े लोगों को भी अवसर देने लगे हैं। वर्षों तक संगठन के लिए काम करने वाले परस राम ने कभी सुर्खियों में आने की कोशिश नहीं की। वे पर्दे के पीछे रहकर पार्टी की गतिविधियों में योगदान देते रहे। यही वजह रही कि चुनाव के दौरान उनकी सादगी और सहज व्यवहार मतदाताओं को प्रभावित करने में सफल रहा।
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परिणाम के बाद भावुक हुए परस राम
जीत की घोषणा के बाद परस राम भावुक नजर आए। समर्थकों ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया, जबकि बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह जीत केवल उनकी नहीं, बल्कि उन सभी साधारण कार्यकर्ताओं की है जो वर्षों तक संगठन के लिए निस्वार्थ भाव से काम करते हैं।
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उन्होंने कहा कि जनता ने उन पर जो विश्वास जताया है, वह उसे विकास कार्यों और जनसेवा के माध्यम से पूरा करने का प्रयास करेंगे। उनके अनुसार, चुनाव जीतने के बाद भी उनकी प्राथमिकता वही रहेगी जो पहले थी—लोगों की सेवा और क्षेत्र के विकास के लिए काम करना।
सदयाणा का संदेश बना प्रदेशभर में चर्चा का विषय
हिमाचल के इस चुनावी दौर में सदयाणा वार्ड का परिणाम सबसे अधिक चर्चित नतीजों में शामिल हो गया है। एक ऐसे व्यक्ति का जिला परिषद तक पहुंचना, जिसकी पहचान वर्षों तक पार्टी कार्यालय में चाय परोसने वाले कार्यकर्ता के रूप में रही हो, लोकतंत्र की उस ताकत को दर्शाता है जहां आम व्यक्ति भी जनता के भरोसे से नेतृत्व की जिम्मेदारी तक पहुंच सकता है।
सदयाणा वार्ड का यह फैसला अब प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है और इसे उन हजारों कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा के रूप में देखा जा रहा है, जो बिना किसी पद या पहचान की अपेक्षा के संगठन और समाज के लिए काम करते हैं।
