कुल्लू: हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के बाद पहाड़ों के दरकने और जगह-जगह भूस्खलन की घटनाओं ने पहले ही लोगों की चिंता बढ़ा रखी है। इसी बीच कुल्लू जिले की सैंज घाटी से एक और चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां सिउंड स्थित पार्वती जलविद्युत परियोजना के पावर हाउस से पानी का रिसाव बढ़ने की बात सामने आई है। ग्रामीणों के अनुसार पहाड़ी के भीतर से निकलने वाले पानी की मात्रा लगातार बढ़ रही है, जिसके चलते आसपास के कई गांवों में दहशत का माहौल है।
ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि पानी का रिसाव इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले समय में स्थिति गंभीर हो सकती है। रैला, शुलगा, बागीधार और जीवा गांवों पर खतरे की आशंका जताई जा रही है। हालांकि परियोजना प्रबंधन ने लोगों से घबराने की अपील नहीं की है और तकनीकी टीम द्वारा स्थिति पर निगरानी किए जाने की बात कही है।
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पहाड़ के भीतर से बढ़ रहा पानी का रिसाव
ग्रामीणों के मुताबिक सिउंड स्थित पावर हाउस के आसपास पहाड़ी के भीतर से पहले भी पानी का रिसाव होता था, लेकिन उस समय इसकी मात्रा काफी कम थी। अब पिछले कुछ समय से पानी का रिसाव बढ़ने के बाद लोगों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में पहले ही जमीन कमजोर हो रही है और कई स्थानों पर भूस्खलन हो रहे हैं। ऐसे में पावर हाउस के आसपास बढ़ता पानी का रिसाव किसी बड़े खतरे का संकेत तो नहीं, इसे लेकर ग्रामीणों में आशंका बनी हुई है।
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चार गांवों पर मंडरा रहा खतरे का साया
पानी के बढ़ते रिसाव को लेकर स्थानीय लोगों ने आसपास के गांवों की सुरक्षा पर चिंता जताई है। ग्रामीणों के अनुसार रैला, शुलगा, बागीधार और जीवा क्षेत्र इस स्थिति से प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि अभी किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन ग्रामीण चाहते हैं कि खतरे को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते इसकी वैज्ञानिक जांच करवाई जाए। लोगों का कहना है कि यदि रिसाव के कारणों का पता समय रहते नहीं लगाया गया तो भविष्य में स्थिति गंभीर रूप ले सकती है।
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पावर हाउस निर्माण के दौरान हुई थी ब्लास्टिंग
स्थानीय ग्रामीणों बबलू, डेहरु राम, मेहर सिंह, मोहन लाल और हरि सिंह धामी ने परियोजना क्षेत्र को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पावर हाउस के निर्माण के दौरान पहाड़ी के भीतर ब्लास्टिंग की गई थी। ग्रामीणों की आशंका है कि निर्माण कार्य के दौरान पहाड़ की आंतरिक संरचना प्रभावित हुई हो सकती है। उनका कहना है कि अब परियोजना में पानी भरने के दौरान रिसाव बढ़ना चिंता का विषय है। हालांकि इन आशंकाओं की वास्तविकता का पता वैज्ञानिक और तकनीकी जांच के बाद ही चल सकेगा।
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भू-वैज्ञानिक जांच की उठी मांग
स्थानीय रैला पंचायत के प्रधान टेक सिंह ठाकुर और पंचायत समिति सदस्य रीता देवी ने प्रशासन तथा परियोजना प्रबंधन से क्षेत्र का विस्तृत भू-वैज्ञानिक और भू-तकनीकी सर्वेक्षण करवाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पानी आखिर कहां से और किस दिशा में रिस रहा है, इसका वैज्ञानिक तरीके से पता लगाया जाना चाहिए। इसके साथ ही संवेदनशील स्थानों की नियमित निगरानी और जरूरत पड़ने पर सुरक्षा के आवश्यक कदम उठाने की भी मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ में बदलाव दिखाई देने के बाद जांच का इंतजार करने के बजाय पहले से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना जरूरी है।
एसडीएम ने परियोजना प्रमुख से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
मामले की सूचना प्रशासन तक पहुंचने के बाद एसडीएम बंजार पंकज शर्मा ने परियोजना प्रबंधन को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की ओर से पानी के रिसाव की सूचना मिली है। एसडीएम के अनुसार परियोजना प्रमुख को पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर प्रशासन को सौंपने के आदेश दिए गए हैं। रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अब प्रशासन की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि रिसाव की वास्तविक स्थिति क्या है, इसके पीछे संभावित कारण क्या हैं और आसपास के क्षेत्रों में किसी तरह का खतरा मौजूद है या नहीं।
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परियोजना प्रबंधन बोला- घबराने की जरूरत नहीं
वहीं, पार्वती जलविद्युत परियोजना फेज-II के प्रमुख रणजीत सिंह ने कहा कि पावर हाउस में पानी के रिसाव की तकनीकी टीम लगातार निगरानी कर रही है। उन्होंने स्थानीय लोगों से घबराने की आवश्यकता नहीं होने की बात कही है। परियोजना प्रबंधन की ओर से निगरानी किए जाने की बात सामने आने के बाद फिलहाल ग्रामीणों की नजर प्रशासन और तकनीकी टीम की रिपोर्ट पर है।
