सोलन। दूसरों के जीवन और चिकित्सा शिक्षा के लिए मृत्यु के बाद अपना शरीर दान करने की इच्छा लेकर पहुंचे 78 वर्षीय बुजुर्ग को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) शिमला से निराश लौटना पड़ा।

देहदान करने IGMC पहुंचे 78 वर्षीय बुजुर्ग

सोलन जिले के सुबाथू निवासी सुरेंद्र सिंह का आरोप है कि वह देहदान की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए दो दिनों तक अस्पताल के अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन अंत में उन्हें यह कहकर मना कर दिया गया कि उनके क्षेत्र से शव लाने की व्यवस्था संभव नहीं है।

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जवाब से हुए निराश

सुरेंद्र सिंह के अनुसार वह 3 जुलाई को IGMC पहुंचे और पंजीकरण के दौरान देहदान की इच्छा जताई। उनका कहना है कि इसके बाद उन्हें एक विभाग से दूसरे विभाग भेजा गया और पूरा दिन औपचारिकताओं में निकल गया। पहले दिन प्रक्रिया पूरी न होने पर उन्हें अगले दिन फिर बुलाया गया।

दूसरे दिन भी नहीं मिला समाधान

बुजुर्ग का दावा है कि 4 जुलाई को भी उन्हें कई विभागों में भेजा गया। सभी जानकारी लेने के बाद अधिकारियों ने उन्हें बताया कि सुबाथू काफी दूर है और अस्पताल के लिए वहां से शव लाना संभव नहीं होगा। इसके बाद उनकी देहदान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई।

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इतनी दूर से नहीं ला सकते बॉडी

सुरेंद्र सिंह का कहना है कि सुबाथू तक पहुंचने के पर्याप्त साधन मौजूद हैं और वहां दो हेलिपैड भी हैं। उनका मानना है कि दूरी को आधार बनाकर देहदान जैसी पहल को अस्वीकार करना उचित नहीं है।

बेटियों पर बोझ नहीं बनना चाहते

सुरेंद्र सिंह की दो बेटियां हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। वह अपनी पत्नी के साथ रहते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने पत्नी की सहमति से देहदान का निर्णय लिया, ताकि निधन के बाद परिवार पर अंतिम संस्कार का बोझ कम हो और उनका शरीर चिकित्सा शिक्षा एवं शोध के काम आ सके।

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मेडिकल शिक्षा के लिए जरूरी होता है देहदान

मेडिकल कॉलेजों में शरीर रचना विज्ञान की पढ़ाई, सर्जरी का प्रशिक्षण और चिकित्सा अनुसंधान के लिए देहदान का विशेष महत्व होता है। इसी उद्देश्य से समय-समय पर लोगों को जागरूक करने के अभियान भी चलाए जाते हैं। ऐसे में बुजुर्ग के अनुभव ने देहदान की प्रक्रिया और व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

IGMC ने जांच का दिया भरोसा

वहीं, IGMC के एनाटॉमी विभाग की अध्यक्ष डॉ. अंजु प्रताप ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर देहदान से इनकार किया गया है तो पूरे मामले की जांच कर संबंधित स्टाफ या चिकित्सक से जवाब मांगा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि संस्थान में पहले भी कई लोग देहदान कर चुके हैं और सामान्य तौर पर किसी को मना नहीं किया जाता।

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