कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश में कच्चे मकानों में जीवन यापन कर रहे गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने जरूरतमंद परिवारों को पक्के मकानों की सौगात देने की दिशा में एक बड़ा और बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य सरकार के ग्रामीण विकास विभाग ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के माध्यम से पात्र लोगों को पक्के मकान उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है, ताकि कोई भी वास्तविक जरूरतमंद इस योजना के लाभ से वंचित न रह जाए।
इस पूरी मुहिम की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि अब किसी भी पात्र परिवार को अपने हक के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे, बल्कि पक्के घरों के हकदार परिवारों का फैसला सीधे तौर पर गांव की संसद यानी ग्राम सभा के माध्यम से किया जाएगा।
पंचायत स्तर पर होगी असली जरूरतमंदों की पहचान
सुक्खू सरकार का मानना है कि स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों की सीधी भागीदारी से ही इस कल्याणकारी योजना का लाभ बिना किसी राजनीतिक दबाव या भेदभाव के सही और हकदार व्यक्ति तक पहुंच सकेगा। विभाग की ओर से जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों के मुताबिक आवास प्लस सर्वेक्षण के तहत तैयार की गई प्रारंभिक प्रतीक्षा सूची को अंतिम रूप देने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। नियमों के अनुसार इस सूची की बारीकी से जांच करने, उसका सत्यापन (वेरिफिकेशन) करने और उसे अंतिम रूप से मंजूरी देने का पूरा अधिकार ग्राम सभा को सौंप दिया गया है, ताकि कोई भी अमीर या रसूखदार व्यक्ति गरीबों का हक न मार सके।
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गांव की चौपाल में तय होगा किसे मिलेगी पक्की छत
ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब परिवारों की पहचान ग्राम सभाओं के माध्यम से की जाएगी। पंचायत स्तर पर आयोजित होने वाली बैठकों में गांव के लोग स्वयं पात्र परिवारों के नामों पर चर्चा करेंगे और उनकी स्थिति का आकलन करेंगे। स्थानीय स्तर पर सत्यापन होने से अपात्र लोगों के नाम शामिल होने की संभावना कम होगी और वास्तविक जरूरतमंदों को प्राथमिकता मिल सकेगी।
जुलाई में ग्राम सभाओं पर रहेगी सबकी नजर
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए जुलाई माह में आयोजित होने वाली ग्राम सभा बैठकों को अहम माना जा रहा है। इन बैठकों में आवास के लिए पात्र परिवारों की सूची पर विस्तार से चर्चा होगी और सर्वसम्मति से उसे मंजूरी दी जाएगी। इसके बाद पंचायतों से सत्यापित सूची को ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा और पारदर्शिता भी बनी रहेगी।
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हर गरीब के सिर पर हो अपनी छत
प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराया जाए। ग्रामीण इलाकों में अभी भी कई ऐसे परिवार हैं जो जर्जर मकानों या अस्थायी आवासों में रहने को मजबूर हैं। ऐसे परिवारों को योजना के तहत प्राथमिकता के आधार पर लाभ देने की तैयारी की जा रही है। सरकार का मानना है कि पक्का मकान केवल रहने की जगह नहीं बल्कि सामाजिक सुरक्षा और बेहतर जीवन स्तर की आधारशिला भी है। इसी सोच के साथ ग्रामीण विकास विभाग ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के निर्देश जारी किए हैं।
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अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देश
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला और विकास खंड स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि पात्र परिवारों की पहचान और सूची के सत्यापन में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। प्रत्येक चरण की निगरानी की जाएगी ताकि योजना का लाभ सही लोगों तक समय पर पहुंच सके।
खंड विकास अधिकारी (BDO) परागपुर मीना शर्मा ने बताया कि उच्च स्तर से मिले इन दिशा-निर्देशों के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में इस महत्वपूर्ण कार्य को तय समय सीमा के भीतर और पूरी पारदर्शिता के साथ पूरा किया जाएगा। जुलाई माह में होने वाली ग्राम सभा की विशेष बैठकों में ग्रामीण खुद बैठकर सबसे गरीब और पात्र परिवारों को चिह्नित करेंगे, जिन्हें योजना के तहत पक्के मकान की सौगात दी जाएगी।
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जल्द मिलेगा सपनों के आशियाने का तोहफा
यदि सब कुछ तय प्रक्रिया के अनुसार पूरा होता है तो आने वाले समय में प्रदेश के हजारों गरीब परिवारों का पक्के घर का सपना साकार हो सकेगा। पंचायतों के माध्यम से होने वाली यह प्रक्रिया न केवल पारदर्शिता बढ़ाएगी बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगी कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में उन लोगों तक पहुंचे जिनके लिए वे बनाई गई हैं।
