शिमला। जहां एक ओर अधिकतर लोग सरकारी नौकरी के पीछे भागदौड़ में लगे हैं, वहीं कुछ युवा ऐसे भी हैं जो नौकरी के साथ-साथ अपने दम पर कुछ अलग करने की सोच रखते हैं। ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण जिला शिमला से सामने आया है, जहां एक युवा इंजीनियर ने सीमित संसाधनों के बावजूद बागवानी के क्षेत्र में अनोखी पहल कर नई मिसाल कायम की है।
घर की छत पर ही कर दी खेती
शिमला जिले के बडश गांव के रहने वाले मनन ने जमीन की कमी को बहाना बनाने के बजाय उसे ही अपनी ताकत बना लिया। जब खेतों में जगह कम पड़ने लगी, तो उन्होंने अपने घर की छत को ही खेती के लिए इस्तेमाल करने का फैसला किया।
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एक हजार ब्लूबेरी के पौधे उगाए
आज हालात यह हैं कि उन्होंने अपने घर के तीन लेंटर (छतों) पर करीब 1000 ब्लूबेरी के पौधे उगा दिए हैं। उनकी यह अनोखी पहल अब इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग दूर-दूर से इसे देखने भी पहुंच रहे हैं।
परिवार से मिली बागवानी की प्रेरणा मिला
दरअसल, मनन को बागवानी की प्रेरणा अपने परिवार से ही मिली। उनके पिता पीयूष शर्मा, जो कि सेवानिवृत्त तहसीलदार हैं, पहले से ही खेती और बागवानी में रुचि रखते थे। उन्होंने अपने खेतों में स्ट्रॉबेरी की सफल खेती शुरू की थी। उसी को देखकर मनन के मन में भी कुछ नया करने का विचार आया। लेकिन जब जमीन कम पड़ने लगी, तो उन्होंने पारंपरिक तरीके छोड़कर छत पर खेती करने का अनोखा रास्ता अपनाया।
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ब्लूबेरी की खेती की सीखी आधुनिक तकनीक
इस काम को शुरू करने से पहले मनन ने पूरी तैयारी की। उन्होंने नौणी यूनिवर्सिटी और एक निजी नर्सरी से ब्लूबेरी की खेती की आधुनिक तकनीक सीखी। इसके बाद उन्होंने वैज्ञानिक तरीके अपनाते हुए गमलों और विशेष कंटेनरों में पौधे तैयार किए। पौधों के लिए खास तरह की मिट्टी तैयार की गई, साथ ही पानी निकासी (ड्रेनेज) और सिंचाई की बेहतर व्यवस्था भी की गई, ताकि पौधों का विकास सही तरीके से हो सके।
हजारों में बिकती है ब्लूबेरी
मनन बताते हैं कि ब्लूबेरी एक हाई-वैल्यू फसल है, जिसकी बाजार में काफी मांग है। इसकी कीमत भी अच्छी मिलती है, एक किलो ब्लूबेरी 2500 से 3000 रुपये तक बिकती है। ऐसे में कम जगह में भी अच्छी कमाई की जा सकती है। छत पर बागवानी करने से न सिर्फ जमीन की कमी की समस्या हल हुई, बल्कि शहरों में खेती के नए रास्ते भी खुल गए हैं।
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सलाह लेने पहुंच रहे हैं लोग
उनकी इस पहल का असर अब आसपास के लोगों पर भी दिखने लगा है। कई लोग उनसे सलाह लेने पहुंच रहे हैं और खुद भी अपनी छतों पर बागवानी शुरू करने की योजना बना रहे हैं। मनन का यह मॉडल खास तौर पर उन लोगों के लिए प्रेरणा बन रहा है, जिनके पास जमीन कम है लेकिन कुछ नया करने की इच्छा है।
सरकार दे रही है युवाओं को बढ़ावा
वहीं, सरकार भी सेब के अलावा अन्य फलों की खेती को बढ़ावा दे रही है। बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने भी मनन जैसे युवाओं के प्रयासों की सराहना की है और कहा है कि ऐसे नवाचारों को सरकार की ओर से प्रोत्साहित किया जाएगा।
