कुल्लू। कल यानी सोमवार को समूचे भारतवर्ष में भाई और बहन के रिश्ते का पवित्र त्योहार रक्षाबंधन मनाया जाना है। यही वो दिन है जहां बहनें साल भर के इंतजार के बाद अपने भाई की कलई पर राखी बांधती हैं और भाई भी अपनी बहन को उपहार देते हैं। रक्षाबंधन को लेकर देश भर में अलग-अलग मान्यताएं और अनोखी परंपराएं भी हैं। ऐसी ही एक अनोखी परंपरा देवभूमि के जिला कुल्लू में भी है।

भाई को दशहरा तक करनी पड़ती है राखी की रक्षा

जिला कुल्लू की पर्यटन नगरी मनाली के कई इलाकों में इस अनोखी परंपरा के चलते रक्षाबंधन के पवित्र पर्व पर बहन अपने भाई की कलाई पर राखी तो बांधती है, मगर फिर उसी राखी को तोड़ने के लिए साली या भाभी की नजर भाई की कलाई पर दशहरा उत्सव तक रहती है। यह भी पढ़ें: देव समाज के ‘महामानव’ नहीं रहें- 15 फीट लंबे बाल, 6 फीट कद- पत्थर की लकीर होती थी वाणी बताया जता है कि भाई को उस राखी की रक्षा दशहरा उत्सव तक करनी होती है। रक्षाबंधन के दिन से लेकर दशहरा पर्व तक साली या फिर भाभी हंसी मजाक के बीच राखी तोड़ने की परंपरा को आज भी निभा रही हैं।

साली या भाभी से बचानी पड़ती है राखी

वहीं, घाटी के स्थानीय लोग बताते हैं कि, रक्षाबंधन की दिन बहन द्वारा पहनाई जाने वाली राखी को दशहरे तक संभाल कर रखना भाई के लिए चुनौतीपूर्ण काम होता है। यदि दशहरा से पहले साली या भाभी ने राखी कलाई से तोड़ दी तो यह भाई की हार मानी जाती है और अगर दशहरा पर्व तक वो राखी को नहीं तोड़ पाई तो इसे भाई की जीत माना जाता है।

जीत पर मनाया जाता है जश्न

इस अनूठी परंपरा के पीछे स्थानीय लोगों की मान्यता व तर्क यह है कि, एक भाई को अपनी बहन की रक्षा के सभी सूत्र आने चाहिए। अगर भाई राखी के दिन से दशहरा पर्व तक कलाई पर बंधी राखी को बचाने में सफल होता है तो माना जाता है कि वह अपनी बहन व समाज की रक्षा करने में भी पूरी तरह से सक्षम है। इस जीत को लेकर वाकायदा लोगों के घर में जश्न भी मनाया जाता है।

पहले पुरोहित बांधते थे राखी

यह परंपरा कुल्लू जिला में कई दशकों से आज भी निरंतर जारी है। स्थानीय लोग बताते हैं कि, तकरीबन दो दशक पहले तक वहां केवल पुरोहित ही लोगों को राखी बांधते थे। मगर समय के साथ-साथ बदलते परिवेश में अब यहां बहनें अपने भाई को राखी बांधती है। जिसके लिए ह इस त्योहार का पूरे साल इंतजार करती हैं। यह भी पढ़ें: नादौन को फिर मिला करोड़ों का तोहफा: जानें अबतक क्या-क्या दे चुके हैं CM सुक्खू

यह भी हैं परम्पराएं

इस बाबत आचार्य विजय कुमार ने बताया कि, रक्षाबंधन के बाद राखी खोलने को लेकर भी तरह-तरह की मान्यताएं हैं। क्षेत्र के कई स्थानों पर तो राखी महज 24 घंटे के भीतर ही उतार दी जाती है और कई स्थानों पर जन्माष्टमी के बाद राखी को खोलकर उसे विसर्जित कर देते हैं। इसके अलावा कुल्लू के कई सारे इलाकों के लोग दशहरा उत्सव के दौरान भगवान रघुनाथ के रथ पर भी अपनी राखी उतारते हैं।

हार्दिक बधाई

आप पाठकों के घर-समाज में राखी को लेकर ऐसी कोई अनूठी परंपरा हो तो जरूर साझा करें। NEWS 4 HIMACHAL की समस्त टीम की ओर से आप सभी पाठकों को भाई-बहन के इस पवित्र पर्व की कोटिश: बधाई।

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