चंडीगढ़/शिमला। हिमाचल प्रदेश में बाहरी राज्यों के वाहनों पर लगाए गए एंट्री टैक्स को लेकर पंजाब और हिमाचल के बीच तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। इस मुद्दे पर निहंग सिख संगठनों ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि 21 जून तक कोई समाधान नहीं निकला तो हिमाचल में पंजीकृत वाहनों पर सांकेतिक रूप से ‘खालसा टैक्स’ दोबारा लगाया जाएगा। इस घोषणा के बाद दोनों राज्यों के बीच राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है।

कई बार की पंजाब-हिमाचल सरकारों से हस्तक्षेप की मांग

मिल रही जानकारी के अनुसार, निहंग सिखों के एक प्रतिनिधि समूह का कहना है कि उन्होंने कई बार पंजाब और हिमाचल प्रदेश सरकारों से इस विषय पर हस्तक्षेप करने की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली।

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उनका आरोप है कि हिमाचल सरकार द्वारा बाहरी राज्यों के वाहनों पर बढ़ाया गया प्रवेश शुल्क यात्रियों और व्यापारिक गतिविधियों पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब हिमाचल सरकार ने प्रदेश में प्रवेश करने वाले बाहरी वाहनों के लिए एंट्री फीस में वृद्धि की।

पंजाब के कई संगठनों की नाराजगी कम नहीं हुई

हालांकि बाद में निजी वाहनों के लिए शुल्क में कुछ कमी की गई, लेकिन पंजाब के कई संगठनों और वाहन चालकों की नाराजगी कम नहीं हुई। इसी विरोध के तहत कुछ दिन पहले किरतपुर-मनाली मार्ग पर सांकेतिक तौर पर ‘खालसा टैक्स’ वसूला गया था, जिसने पूरे मामले को और अधिक चर्चा में ला दिया।

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विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि यदि हिमाचल सरकार अपना निर्णय वापस नहीं लेती तो पंजाब सरकार को भी जवाबी कदम उठाने चाहिए। उनका मानना है कि दोनों राज्यों के बीच संतुलन और समानता बनाए रखने के लिए एक समान नीति अपनाई जानी चाहिए।

पर्यटन कारोबार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर

उधर, पर्यटन और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों की चिंता भी बढ़ने लगी है। हिमाचल में पर्यटन सीजन शुरू होने वाला है और बड़ी संख्या में पर्यटक पंजाब के रास्ते प्रदेश पहुंचते हैं। ऐसे में यदि सीमा क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन या किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है तो इसका असर पर्यटन कारोबार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

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पर्यटन कारोबारियों और टूर ऑपरेटरों का कहना है कि दोनों राज्य सरकारों को बातचीत के जरिए जल्द समाधान निकालना चाहिए, ताकि यात्रियों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। फिलहाल सभी की निगाहें 21 जून पर टिकी हैं, जब इस मुद्दे पर अगला कदम उठाया जा सकता है।

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