#राजनीति
June 17, 2026
मिसेज CM नहीं करा पाईं सहमित, देहरा में अध्यक्ष पद पर बहुमत के बाद भी बुरी फंसी कांग्रेस
पार्टी के भीतर अलग-अलग समूह सक्रिय
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा जिले की देहरा नगर परिषद में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव से पहले कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। परिषद में स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद पार्टी अपने पार्षदों के बीच सहमति बनाने में सफल नहीं हो पाई, जिसके चलते पहली बैठक में कोरम पूरा नहीं हुआ और चुनाव प्रक्रिया टल गई। इस घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
दरअसल, नवनिर्वाचित पार्षदों के शपथ ग्रहण समारोह के बाद नगर परिषद की पहली बैठक आयोजित की गई थी। इस अवसर पर देहरा की विधायक कमलेश ठाकुर भी मौजूद रहीं। उन्होंने सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों को बधाई देते हुए शहर के विकास के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि परिषद के सभी सदस्य नेतृत्व करने की क्षमता रखते हैं और अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चयन लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा।

शपथ ग्रहण के बाद कांग्रेस समर्थित पार्षदों की एक अहम बैठक मुख्यमंत्री कार्यालय परिसर में आयोजित की गई, जिसमें अध्यक्ष पद के लिए सहमति बनाने की कोशिश की गई। हालांकि लंबे विचार-विमर्श के बावजूद कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका। इसके बाद जब परिषद की औपचारिक बैठक शुरू हुई तो आवश्यक संख्या में पार्षद उपस्थित नहीं हुए, जिससे कोरम अधूरा रह गया और चुनाव आगे बढ़ाना पड़ा।
सूत्रों के अनुसार अध्यक्ष पद को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग समूह सक्रिय हैं। कुछ पार्षद एक उम्मीदवार के समर्थन में हैं, जबकि अन्य किसी दूसरे चेहरे को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। यही वजह रही कि बहुमत होने के बावजूद कांग्रेस एकमत दिखाई नहीं दी।
बैठक में कांग्रेस के अधिकांश पार्षद मौजूद रहे, लेकिन एक कांग्रेस समर्थित सदस्य की नाराजगी चर्चा का विषय बन गई। बताया जा रहा है कि वे बैठक में पहुंचे जरूर, लेकिन बाद में असंतोष जताते हुए वहां से चले गए। दूसरी ओर भाजपा के दोनों पार्षद भी बैठक में अनुपस्थित रहे।
अब अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद का चुनाव 19 जून को होने वाली अगली बैठक में कराया जाएगा। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि अध्यक्ष पद की दौड़ में दो महिला पार्षदों के नाम सबसे आगे चल रहे हैं। पार्टी नेतृत्व सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर फैसला लेने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अंदरूनी मतभेद उसके लिए चुनौती बने हुए हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि कांग्रेस समय रहते अपने पार्षदों के बीच सहमति नहीं बना पाती, तो बहुमत होने के बावजूद उसे राजनीतिक असहजता का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल देहरा नगर परिषद का अध्यक्ष कौन बनेगा, इस पर सभी की नजरें 19 जून की बैठक पर टिकी हुई हैं।