कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश की ग्राम पंचायतों के लिए 16वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली परफॉर्मेंस ग्रांट को लेकर नया वित्तीय मानक सामने आया है। वर्ष 2028-29 से परफॉर्मेंस ग्रांट हासिल करने के लिए पंचायतों को अपने स्तर पर प्रति परिवार न्यूनतम 1,200 रुपये सालाना स्वस्रोत राजस्व अर्जित करने का मानक पूरा करना होगा। निर्धारित प्रदर्शन और पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करने वाली पंचायतों को परफॉर्मेंस ग्रांट मिलने में परेशानी हो सकती है।

2027-28 से राजस्व बढ़ाने की शर्त

हालांकि, इस प्रावधान का अर्थ यह नहीं है कि पंचायत प्रत्येक परिवार से सीधे 1,200 रुपये अनिवार्य रूप से वसूल करेगी। यह पंचायत की कुल स्वस्रोत आय को परिवारों की संख्या के अनुपात में देखने वाला वित्तीय मानक है। पंचायतें कर, शुल्क और अन्य स्वीकृत स्थानीय आय स्रोतों के माध्यम से इस लक्ष्य को पूरा कर सकती हैं।

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16वें वित्त आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार पंचायतों को पहले चरण में अपने स्वस्रोत राजस्व में लगातार वृद्धि सुनिश्चित करनी होगी। वर्ष 2027-28 में स्वस्रोत आय में न्यूनतम 2.5 प्रतिशत की सालाना वृद्धि का मानक रखा गया है। इसके बाद वर्ष 2028-29 से प्रति परिवार कम से कम 1,200 रुपये सालाना स्वस्रोत राजस्व अर्जित करने का मानक लागू होगा। यानी पंचायतों को अपनी स्थानीय आय बढ़ाने के लिए अभी से राजस्व स्रोतों को मजबूत करने की दिशा में काम करना होगा।

किन स्रोतों से बढ़ानी होगी पंचायतों की आय?

पंचायतों के पास स्थानीय स्तर पर आय अर्जित करने के कई वैध स्रोत होते हैं। इनमें निर्धारित कर, शुल्क और अन्य स्वीकृत राजस्व स्रोत शामिल हो सकते हैं। नई व्यवस्था में पंचायतों को इन्हीं माध्यमों का बेहतर इस्तेमाल करने और राजस्व संग्रहण को व्यवस्थित बनाने पर जोर देना होगा। इसके साथ ही पंचायतों को यह भी देखना होगा कि उनके क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों से किस तरह वैध और पारदर्शी तरीके से आय बढ़ाई जा सकती है। राजस्व की वसूली नियमित हो और उसका रिकॉर्ड भी व्यवस्थित रखा जाए, यह भी वित्तीय प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

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परफॉर्मेंस ग्रांट को पंचायतों के प्रदर्शन और पात्रता से जोड़ा गया है। ऐसे में केवल पंचायत क्षेत्र में विकास कार्य करवाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि वित्तीय प्रबंधन और अपने संसाधनों से आय बढ़ाने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होगी। यदि किसी पंचायत की स्वस्रोत आय निर्धारित मानक के अनुरूप नहीं रहती है, तो उसे परफॉर्मेंस ग्रांट हासिल करने में दिक्कत आ सकती है। इसलिए पंचायतों के सामने अब स्थानीय राजस्व बढ़ाने की चुनौती भी होगी।

16वें वित्त आयोग की अवधि पांच साल

16वें वित्त आयोग की सिफारिशों की अवधि वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक है। इसके तहत ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए मूल अनुदान के साथ परफॉर्मेंस ग्रांट का भी प्रावधान किया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य स्थानीय निकायों को केवल केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाले अनुदानों पर निर्भर रखने के बजाय उनके अपने राजस्व स्रोतों को मजबूत करना है। इससे पंचायतों को स्थानीय जरूरतों के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाने में मदद मिल सकती है।

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नई व्यवस्था लागू होने के बाद पंचायतों को अपने क्षेत्र के राजस्व स्रोतों का आकलन करना होगा। जिन पंचायतों की वर्तमान आय कम है, उन्हें आय बढ़ाने के नए वैध साधन तलाशने पड़ेंगे। इसके लिए कर और शुल्क की व्यवस्था को प्रभावी बनाने के साथ-साथ बकाया राजस्व की वसूली, रिकॉर्ड का रखरखाव और संग्रहण प्रक्रिया में पारदर्शिता पर भी ध्यान देना होगा।

विभाग ने भी साफ की स्थिति

पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त निदेशक केवल शर्मा के अनुसार, 16वें वित्त आयोग के तहत परफॉर्मेंस ग्रांट पाने के लिए पंचायतों को निर्धारित मानकों को पूरा करना होगा। उन्होंने कहा कि पंचायतों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध वैध आय के साधनों का प्रभावी इस्तेमाल करते हुए अपने राजस्व में वृद्धि करनी होगी।

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उनके अनुसार निर्धारित अवधि में स्वस्रोत आय में अपेक्षित बढ़ोतरी और बाद के वर्षों में प्रति परिवार तय राजस्व मानक को पूरा करना महत्वपूर्ण रहेगा। यदि किसी पंचायत की आय निर्धारित स्तर से कम रहती है तो उसे इसमें सुधार करना होगा, क्योंकि इसका असर परफॉर्मेंस ग्रांट की पात्रता पर पड़ सकता है।

पंचायतों को अभी से करनी होगी तैयारी

वर्ष 2028-29 में लागू होने वाले प्रति परिवार 1,200 रुपये के मानक को देखते हुए पंचायतों के पास अपनी वित्तीय व्यवस्था मजबूत करने के लिए समय है। अब पंचायतों को अपने मौजूदा राजस्व स्रोतों की समीक्षा करने के साथ यह भी तय करना होगा कि स्थानीय स्तर पर आय को किस तरह बढ़ाया जा सकता है। यानी आने वाले समय में पंचायतों के लिए विकास कार्यों के साथ-साथ अपनी कमाई बढ़ाना और वित्तीय प्रबंधन मजबूत करना भी प्रदर्शन का अहम हिस्सा बनने जा रहा है।

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