शिमला/ऊना। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव के तीसरे और अंतिम चरण का मतदान शनिवार सुबह सात बजे से जारी है। प्रदेश की 1189 ग्राम पंचायतों में मतदाता अपने जनप्रतिनिधियों के चयन के लिए मतदान केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। लेकिन मतदान शुरू होते ही मौसम ने अचानक करवट बदल ली और कई इलाकों में तेज बारिश, आंधी और तूफान ने चुनावी व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी।
बारिश और तेज हवाओं के कारण कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति ठप हो गई, जिससे कई मतदान केंद्र अंधेरे में डूब गए। कहीं मतदान कर्मियों को मोबाइल फोन की रोशनी में मतदान प्रक्रिया संचालित करनी पड़ी तो कहीं जनरेटर के सहारे लोकतंत्र की गाड़ी आगे बढ़ाई गई। कई स्थानों पर बिजली गुल होने के कारण मतदान प्रक्रिया कुछ समय के लिए प्रभावित भी हुई।
मौसम के एक झटके ने खोली तैयारियों की पोल
प्रदेशभर में मतदान के लिए प्रशासन ने व्यापक इंतजामों के दावे किए थे, लेकिन बारिश शुरू होते ही कई जगहों पर व्यवस्थाओं की कमियां सामने आने लगीं। तेज हवाओं और बारिश से बिजली आपूर्ति बाधित हुई तो मतदान केंद्रों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई बूथों पर मतदान कर्मियों को वैकल्पिक संसाधनों का सहारा लेना पड़ा। अंधेरे के बीच मतदाताओं को मतदान कराने के लिए मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट तक का उपयोग किया गया। ऐसे हालात देखकर मतदाता भी हैरान नजर आए।
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मोबाइल की रोशनी में चला मतदान
जिला ऊना के कुछ मतदान केंद्रों में मतदान शुरू होने के समय बिजली उपलब्ध नहीं थी। अंधेरे के बीच चुनाव कर्मियों ने मोबाइल फोन की रोशनी का सहारा लेकर मतदान प्रक्रिया शुरू करवाई। मतदान केंद्रों में मौजूद लोगों ने कहा कि लोकतंत्र के इस महापर्व में ऐसी स्थिति की किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। हालांकि कर्मचारियों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए मतदान कार्य को पूरी तरह रुकने नहीं दिया और उपलब्ध संसाधनों से प्रक्रिया जारी रखी।
जनरेटर बने सहारा, लेकिन हर जगह नहीं मिले कामयाब
कई मतदान केंद्रों में बिजली गुल होने के बाद जनरेटरों का सहारा लिया गया। हालांकि कुछ स्थानों पर वैकल्पिक व्यवस्था भी फेल होती नजर आई। कहीं तकनीकी खराबी तो कहीं अन्य कारणों से जनरेटर समय पर काम नहीं कर पाए, जिससे मतदान प्रभावित हुआ। इस स्थिति ने प्रशासनिक तैयारियों और आपातकालीन व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि मौसम विभाग पहले ही खराब मौसम की संभावना जता चुका था, ऐसे में बैकअप व्यवस्थाओं की बेहतर निगरानी की जानी चाहिए थी।
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बारिश नहीं तोड़ पाई मतदाताओं का हौसला
मौसम की बाधाओं के बावजूद मतदाताओं का उत्साह देखने लायक रहा। बारिश और खराब मौसम के बीच भी लोग छाता और बरसाती लेकर मतदान केंद्रों तक पहुंचे और अपने मताधिकार का प्रयोग किया। सुबह के शुरुआती घंटों में ही कई क्षेत्रों में मतदान केंद्रों पर अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने मौसम को नजरअंदाज करते हुए लोकतंत्र के इस पर्व में बढ़-चढ़कर भागीदारी दिखाई।
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लोकतंत्र के जज्बे के आगे फीका पड़ा खराब मौसम
बारिश, तूफान और बिजली संकट ने भले ही चुनावी व्यवस्थाओं को चुनौती दी हो, लेकिन मतदाताओं के उत्साह को नहीं रोक पाया। एक ओर मतदान केंद्रों पर अंधेरा था तो दूसरी ओर लोकतंत्र को मजबूत बनाने का उजाला भी दिखाई दे रहा था। कहीं मोबाइल की टॉर्च लोकतंत्र की मशाल बनी तो कहीं जनरेटर की आवाज के बीच वोटों की गूंज सुनाई दी। मौसम ने व्यवस्थाओं की परीक्षा जरूर ली, लेकिन मतदाताओं के जोश ने यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र के प्रति हिमाचल के लोगों की आस्था किसी भी चुनौती से बड़ी है।
