शिमला। आजादी के दशकों बाद भी हमारा समाज जातिवाद और छुआछूत की बेड़ियों से कितना जकड़ा हुआ है, इसकी एक शर्मनाक बानगी हिमाचल प्रदेश के पंचायत चुनावों में देखने को मिली है। यहां एक दलित प्रत्याशी के घर सिर्फ डिनर करने को लेकर ऐसा बवाल खड़ा हुआ कि बात अब सामाजिक बहिष्कार की धमकियों तक पहुंच गई है। ये घटना साबित करती है कि कागजों पर मिट चुका जातीय भेदभाव आज भी जमीनी हकीकत में पूरी तरह सक्रिय और आक्रामक है।
क्या है पूरा मामला ?
ठियोग के टियाली जिला वार्ड से इस बार एक दलित महिला प्रत्याशी ओपन सीट से चुनाव लड़ रही हैं। बीते दिनों माकपा (CPI-M) के दो नेता रोबिन वर्मा और सोहन ठाकुर इस प्रत्याशी के घर गए और वहां रात का भोजन किया।
यह भी पढ़ें- हिमाचल में 'कुरकुरे' ने ले ली जान: सांस की नली में फंसा था टुकड़ा- सिर्फ 28 साल का था हेमंत
समानता के अधिकार को चुनौती देते हुए किसी शख्स ने इस डिनर का वीडियो बना लिया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इसके बाद कुछ रूढ़िवादी तत्वों ने इसे ‘देव समाज का अपमान’ करार देकर विवाद खड़ा कर दिया।
दोहरी मानसिकता: वोट चाहिए पर साथ बैठकर खाना नहीं
इस पूरे विवाद ने चुनावी राजनीति और समाज के दोहरे चरित्र को बेनकाब कर दिया है। माकपा नेता रोबिन वर्मा ने समाज की इस कड़वी सच्चाई पर तीखा प्रहार करते हुए कहा: आजादी के इतने सालों बाद भी अगर एक दलित के घर भोजन करने पर विवाद हो रहा है तो ये पूरे समाज के लिए डूब मरने वाली बात है। सबसे बड़ा विरोधाभास ये है कि जो लोग इस वीडियो को वायरल कर नफरत फैला रहे हैं, वही लोग चुनाव जीतने के लिए इन्हीं दलित परिवारों के चौखट पर जाकर वोट की भीख मांग रहे हैं।
यह भी पढ़ें- हिमाचल पंचायत चुनाव: तीसरे चरण का मतदान जारी, बारिश के बीच भी मतदाताओं का जोश हाई
'ओपन सीट' पर दलित महिला का लड़ना नहीं हो रहा बर्दाश्त
पूर्व जिला परिषद सदस्य सोहन ठाकुर ने सीधे तौर पर कहा कि ये विवाद सिर्फ खाने को लेकर नहीं बल्कि गहरी बैठी जातिवादी मानसिकता का नतीजा है। एक दलित महिला का सामान्य (ओपन) सीट से चुनाव लड़ना कुछ ऊंची सोच का दावा करने वाले लोगों को बर्दाश्त नहीं हो रहा है। यही वजह है कि अब नेताओं को सामाजिक रूप से बहिष्कृत करने की गुप्त रणनीतियां बनाई जा रही हैं और लोगों को भड़काया जा रहा है। नेताओं ने साफ किया कि वे इस मनुवादी सोच के खिलाफ संविधान की लड़ाई लड़ेंगे।
इस विवाद पर ठियोग के पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने समाज को बांटने की कोशिश करने वालों को खुली चुनौती देते हुए साफ कहा कि ये देश बाबा साहब के संविधान से चलेगा, '16वीं सदी की सोच' रखने वाले मनु के विचारों से नहीं। सिंघा ने तीखे शब्दों में कहा कि समाज के कुछ 'ठेकेदार' अपनी संकीर्ण मानसिकता के चलते लोगों को आपस में बांटने का घिनौना प्रयास कर रहे हैं।
यह भी पढ़ें- हिमाचल: दो सगे भाई एक साथ हुए भर्ती... साथ रिटायर, अब 2 माह में एक जैसी मौ*त; मां ने खोए फौजी बेटे
उन्होंने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कुछ लोग आज भी समाज पर अपनी मनुवादी सोच थोपने की कोशिश करेंगे तो इसके खिलाफ सड़कों पर उतरकर एक बड़ा जन आंदोलन खड़ा किया जाएगा। पूर्व विधायक ने स्पष्ट किया कि वे ऐसी दकियानूसी ताकतों के खिलाफ हर स्तर पर लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और उनकी इस चुनौती को खुले तौर पर स्वीकार करते हैं।
सामाजिक संस्थाओं ने जताई चिंता: 'समानता का अपमान'
हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति ने भी इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि 21वीं सदी में भी इस तरह का छुआछूत और भेदभाव ना सिर्फ हमारे संविधान का उल्लंघन है बल्कि सामाजिक समानता के मुंह पर तमाचा भी है। चुनाव के वक्त जातीय ध्रुवीकरण करने के लिए इस संवेदनशील मुद्दे को हवा दी जा रही है।
यह भी पढ़ें- हिमाचल में महंगाई से मिली राहत: डिपुओं में सस्ता हुआ सरसों तेल, बाजार से 60 रुपए कम हुए दाम
प्रशासन का रुख
इस गंभीर मामले पर ठियोग SDM शशांक गुप्ता ने कहा कि फिलहाल प्रशासन के पास इस संबंध में कोई लिखित या औपचारिक शिकायत नहीं आई है। अगर सामाजिक बहिष्कार, छुआछूत या किसी भी तरह के भेदभाव की शिकायत दर्ज होती है तो पुलिस और प्रशासन नियमों के तहत सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाएगा।
