कुल्लू। हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित कसोल रेव पार्टी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कुल्लू के तत्कालीन DC और SP को बड़ी राहत दी है। सर्वोच्च अदालत ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा दोनों अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और आपराधिक कार्रवाई शुरू करने संबंधी आदेशों पर फिलहाल रोक लगा दी है। हालांकि, हाईकोर्ट द्वारा दोनों अधिकारियों के तबादले को लेकर दिए गए निर्देशों पर कोई रोक नहीं लगाई गई है, जिससे उनके स्थानांतरण का आदेश फिलहाल प्रभावी बना हुआ है।

हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

हाईकोर्ट के फैसले के बाद दोनों अधिकारियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने की।

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सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्रथम दृष्टया हाईकोर्ट के एफआईआर संबंधी निर्देशों पर रोक लगाने का फैसला सुनाया। हालांकि अदालत ने तबादले से जुड़े निर्देशों में कोई हस्तक्षेप नहीं किया। ऐसे में राज्य सरकार को हाईकोर्ट के स्थानांतरण संबंधी आदेशों का पालन करना होगा।

रेव पार्टी को लेकर उठे थे गंभीर सवाल

यह पूरा मामला जून माह में कुल्लू जिले के पर्यटन स्थल कसोल में आयोजित एक रेव पार्टी से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार 7 से 11 जून के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचे थे। कार्यक्रम के लिए साउंड सिस्टम लगाने की अनुमति स्थानीय प्रशासन की ओर से दी गई थी। बाद में इस आयोजन को लेकर जनहित याचिका दायर की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि प्रशासन और पुलिस ने संभावित अवैध गतिविधियों को लेकर पर्याप्त कार्रवाई नहीं की।

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मामले की सुनवाई के दौरान हिमाचल हाईकोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण यानी DLSA के सचिव से मौके का निरीक्षण करवाया था। निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर टिप्पणी करते हुए तत्कालीन डीसी, एसपी और एसडीएम के तबादले के निर्देश जारी किए थे।

पहले ही दी गई थी संभावित खतरे की चेतावनी

इसके अलावा हाईकोर्ट ने कथित लापरवाही और रेव पार्टी को मौन सहमति देने के आरोपों की जांच के लिए एफआईआर दर्ज करने और विशेष जांच दल से जांच कराने के भी निर्देश दिए थे। अदालती रिकॉर्ड में यह भी सामने आया कि कार्यक्रम से पहले स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में आशंका जताई थी कि,

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आयोजन स्थल पर तीन से साढ़े तीन हजार लोगों के पहुंचने की संभावना है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया था कि इलाके में मादक पदार्थों की तस्करी और नशे के इस्तेमाल का खतरा बना रह सकता है। याचिकाकर्ता का आरोप था कि इस चेतावनी के बावजूद पर्याप्त एहतियाती कदम नहीं उठाए गए, जिसके बाद मामला न्यायालय तक पहुंचा।

अगली सुनवाई पर टिकी नजर

सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद फिलहाल डीसी और एसपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होगी। हालांकि तबादले के आदेश लागू रहेंगे। अब इस पूरे मामले की आगे की सुनवाई निर्धारित तिथि पर होगी, जहां दोनों पक्ष अपना-अपना पक्ष अदालत के सामने रखेंगे। इस मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को प्रस्तावित है।

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