धीरा (कांगड़ा)। देवभूमि हिमाचल प्रदेश ने एक और वीर सपूत खो दिया। आज इस जवान का उनके पैतृक गांव में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। जवान को अंतिम विदाई देने के लिए भारी बारिश में भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे हुए थे। यह जवान कांगड़ा जिला के धीरा उपमंडल के मतेहड़ गांव के रहने वाले भारतीय सेना के ऑनरेरी लेफ्टिनेंट अनुपम कश्यप थे। अब वह इस दुनिया में नहीं रहे। देश सेवा में समर्पित यह बहादुर जवान 31 अक्तूबर 2026 को सेवानिवृत्त होने वाला था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। रिटायरमेंट से महज सात महीने पहले ही उसने अंतिम सांस ले ली।
बताया जा रहा है कि अंडमान.निकोबार में तैनात लेफ्टिनेंट अनुपम कश्यप का ड्यूटी के दौरान हृदय गति रुकने से अचानक निधन हो गया। इस खबर ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र को गहरे सदमे में डाल दिया।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में बड़ा हा..दसा, गहरी खाई में गिरी कार के उड़े परखच्चे, दो लोगों की मौके पर मौ*त
तिरंगे में लिपटा जब घर पहुंचा बेटा...
रविवार सुबह जब तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव मतेहड़ पहुंचाए तो हर आंख नम हो उठी। बारिश की बूंदों के बीच गांव का माहौल शोक में डूब गया। हर कोई अपने वीर बेटे के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़ा। मां.बाप की सिसकियांए पत्नी का विलाप और बच्चों की मासूम आंखों में छलकते आंसू- यह दृश्य हर किसी को भीतर तक झकझोर गया।
जैसे ही जवान की पार्थिव देह उनके घर पहुंची तो मां और पत्नी बेसुध हो गईं। वहीं बेटियों की चीखों से पूरा क्षेत्र दहल उठा। परिजनों के आंसू थमने का नाम ही नहीं ले रहे थे। पत्नी बार बार अपनी सुध बुध खो रही थी। वहीं जवान के बुढ़े पिता पूरी तरह से मौन हो गए थे।
यह भी पढ़ें : देवभूमि शर्मसार: कन्या पूजन के बहाने 3 साल की मासूम को घर ले गया पड़ोसी, कर दी नीचता
सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
बलोटी स्थित श्मशानघाट में पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। सेना की टुकड़ी ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर हवा में फायर किए और अपने साथी को अंतिम सलामी दी। उस पल माहौल और भी भावुक हो गया, जब उनके बेटे ने कांपते हाथों से अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी।
तीन बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
लेफ्टिनेंट अनुपम कश्यप अपने पीछे बुजुर्ग माता-पिता, पत्नी और तीन बच्चों—दो बेटियां और एक बेटे को छोड़ गए हैं। उनके अचानक निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जिस घर में कुछ ही महीनों बाद रिटायरमेंट की खुशियां मनाने की तैयारी थी, वहां अब मातम पसरा हुआ है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: खेत में मिली महिला की देह, मां बोली - संतान नही होने पर पति ने कर दी बेटी की ह*त्या
26 जनवरी को मिला था सम्मान
अनुपम कश्यप ने वर्ष 1998 में भारतीय सेना में भर्ती होकर देश सेवा की राह चुनी थी। अपनी लगन और कर्तव्यनिष्ठा के दम पर उन्हें 26 जनवरी 2026 को लेफ्टिनेंट के पद पर पदोन्नति मिली थी। यह उनके जीवन का गौरवपूर्ण क्षण था, लेकिन अफसोस, वह इस नई जिम्मेदारी को ज्यादा समय तक निभा नहीं पाए।
यह भी पढ़ें : हिमाचल की ये नदी बुझाएगी दिल्ली की प्यास: 50 साल का इंतजार खत्म, मजबूत होगी प्रदेश की आर्थिकी
क्षेत्र में शोक की लहर, नम आंखों से दी विदाई
उनकी अंतिम यात्रा में जनप्रतिनिधियों, सेना के अधिकारियों, पूर्व सैनिकों और सैकड़ों स्थानीय लोगों ने भाग लिया। हर किसी ने नम आंखों से अपने इस वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी और परिवार को सांत्वना दी। आज हिमाचल की वादियों में एक सन्नाटा है—एक ऐसा सन्नाटा, जो उस वीर की कमी को महसूस कर रहा है जिसने अपना पूरा जीवन देश के नाम कर दिया।
लेफ्टिनेंट अनुपम कश्यप भले ही इस दुनिया से चले गए हों, लेकिन उनका साहस, उनकी सेवा और उनकी यादें हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगी।
