शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव की नियुक्ति को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य सचिव IAS अधिकारी संजय गुप्ता, प्रदेश सरकार और केंद्रीय कार्मिक विभाग को नोटिस जारी किए हैं। जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि अधिकारी के खिलाफ पहले से तीन एफआईआर दर्ज होने के बावजूद उन्हें राज्य के सबसे अहम प्रशासनिक पद की जिम्मेदारी सौंपी गई।
अगली सुनवाई 21 जुलाई को
मिली जानकारी के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने सभी पक्षों से जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को तय की गई है।
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यह जनहित याचिका तिलक राज शर्मा की ओर से दायर की गई है, जिसमें IAS अधिकारी संजय गुप्ता को मुख्य सचिव पद का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि अक्टूबर 2025 में राज्य सरकार ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी थी, जबकि उनके खिलाफ पहले से तीन एफआईआर दर्ज थीं। याचिका में दावा किया गया है कि इन मामलों में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े आरोप भी शामिल हैं।
याचिका किसी निजी हित से प्रेरित नहीं
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि मुख्य सचिव का पद बेहद संवेदनशील और जिम्मेदारी वाला माना जाता है। ऐसे में जिन अधिकारियों पर गंभीर आरोप हों, उन्हें इस पद की जिम्मेदारी देना उचित नहीं माना जा सकता।
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मामले में याचिकाकर्ता ने अदालत को यह भी बताया कि याचिका किसी निजी हित से प्रेरित नहीं है। अदालत के निर्देशों के अनुसार उन्होंने दो लाख रुपये की राशि भी जमा करवाई है।
यह नहीं है पहला मामला
गौरतलब है कि यह पहला मामला नहीं है जब हिमाचल प्रदेश में मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया गया हो। इससे पहले पूर्व मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना को दिए गए सेवा विस्तार के खिलाफ भी हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी।
