शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आदेशों की अनुपालना न करना प्रदेश की एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी के शीर्ष अधिकारियों को महंगा पड़ गया है। बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किए जाने पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए विश्वविद्यालय के दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिए हैं। इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक और शैक्षणिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।
हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती
मामला डॉक्टर यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी सोलन से जुड़ा हुआ है। अदालत ने पाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन को पहले ही न्यायालय के आदेशों की अनुपालना करने और उससे संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। इतना ही नहीं, आदेशों का पालन न होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने के लिए भी कहा गया था। लेकिन निर्धारित समय के भीतर न तो आदेशों की अनुपालना की गई और न ही संबंधित अधिकारी अदालत में पेश हुए। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कड़ा कदम उठाया।
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कार्रवाई की जद में विश्वविद्यालय के दो शीर्ष अधिकारी
हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय के कुलपति और रजिस्ट्रार के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए हैं। अदालत ने दोनों अधिकारियों को निर्धारित तिथि पर न्यायालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय की इस कार्रवाई को अदालत के आदेशों की अवहेलना के मामलों में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
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पेंशन लाभ से जुड़ा है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार यह मामला एक कर्मचारी के सेवा काल को पेंशन लाभ के लिए मान्यता देने से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की थी कि उसके कार्यकाल को पेंशन संबंधी लाभों के लिए गिना जाए। इस संबंध में हाईकोर्ट ने पहले ही विश्वविद्यालय को आवश्यक कार्रवाई करने और तय समय के भीतर मामले पर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे।
कई अवसरों के बावजूद नहीं हुआ पालन
अदालत ने विश्वविद्यालय प्रशासन को आदेशों की अनुपालना के लिए एक नहीं बल्कि कई अवसर प्रदान किए। न्यायालय ने उम्मीद जताई थी कि विश्वविद्यालय प्रशासन समय रहते आदेशों पर अमल करेगा, लेकिन बार-बार मौका मिलने के बावजूद कोई ठोस प्रगति सामने नहीं आई। इसके बाद अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए वारंट जारी करने का फैसला लिया।
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अधिकारियों को अदालत में होना होगा पेश
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती। अब दोनों अधिकारियों को अदालत में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना होगा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला सरकारी और स्वायत्त संस्थानों के अधिकारियों के लिए भी एक बड़ा संदेश है कि न्यायालय के आदेशों का पालन करना अनिवार्य है।
प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना मामला
प्रदेश की प्रमुख शैक्षणिक संस्थाओं में शामिल इस विश्वविद्यालय के दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ जमानती वारंट जारी होने के बाद यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। अब सभी की निगाहें आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह स्पष्ट होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन अदालत के आदेशों को लेकर क्या स्पष्टीकरण देता है और आगे क्या कार्रवाई होती है।
