सिरमौर। सरकारी सेवा में अनुशासन और जवाबदेही केवल औपचारिक शब्द नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। शिक्षक जैसे पद पर आसीन व्यक्ति से न सिर्फ नियमित उपस्थिति, बल्कि नैतिक आचरण और वित्तीय पारदर्शिता की भी उम्मीद की जाती है।
स्कूल निदेशालय ने लिया सख्त फैसला
जब इन मूल्यों से समझौता होता है, तो उसका असर सिर्फ एक संस्थान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र पर सवाल खड़े हो जाते हैं। इसी कड़ी में हिमाचल प्रदेश के स्कूल शिक्षा निदेशालय ने एक सख्त फैसला लिया है।
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शिक्षक की कर दी छुट्टी
निदेशालय ने शासकीय सेवा नियमों के गंभीर उल्लंघन के मामले में जिला सिरमौर के दाहन स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में तैनात एक शिक्षक के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। निदेशालय ने अंग्रेजी प्रवक्ता संजीव पासी को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया है।
234 दिन रहा गैरहाजिर
विभागीय अभिलेखों के अनुसार, संजीव पासी अपने कार्यकाल के दौरान लंबे समय तक बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित रहा। पहली जून 2022 से 30 नवंबर 2023 के बीच वे अलग–अलग चरणों में कुल 234 दिन बिना किसी स्वीकृत अवकाश के स्कूल से अनुपस्थित पाया गय़ा। यह न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन माना गया, बल्कि इससे विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था भी प्रभावित होने की आशंका जताई गई।
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जानबूझकर नियमों की अनदेखी की गई
मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग ने विधिवत विभागीय जांच शुरू की। जांच अधिकारी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में सभी आरोपों को प्रमाणित पाया गया। जांच के दौरान उपस्थिति रजिस्टर, अवकाश रिकॉर्ड और अन्य संबंधित दस्तावेजों का गहन परीक्षण किया गया। इन तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित शिक्षक द्वारा जानबूझकर सेवा नियमों की अनदेखी की गई।
कर्मचारी के भविष्य पर गहरा असर
जांच रिपोर्ट और समस्त अभिलेखों पर विचार–विमर्श के बाद सक्षम प्राधिकारी ने तत्काल प्रभाव से अनिवार्य सेवानिवृत्ति का मुख्य दंड अधिरोपित किया। यह दंड सरकारी सेवा में सबसे कड़े प्रशासनिक कदमों में से एक माना जाता है, जो कर्मचारी के भविष्य पर गहरा असर डालता है।
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4.13 लाख वित्तीय गबन
इतना ही नहीं, दाहन स्कूल में तैनाती के दौरान संजीव पासी पर लगभग 4.13 लाख रुपये के वित्तीय गबन का भी आरोप सामने आया है। इस मामले में शिक्षा विभाग द्वारा 04 अक्टूबर 2025 को पृथक आरोप-पत्र जारी किया गया है। फिलहाल, इस वित्तीय अनियमितता की विभागीय जांच जारी है और विभाग का कहना है कि जांच पूर्ण होने के बाद इसमें अलग से स्वतंत्र दंड भी दिया जा सकता है।
