कांगड़ा/चंबा। हिमाचल प्रदेश में शुक्रवार सुबह कांगड़ा और चंबा ज़िलों में भूकंप के झटके महसूस किए गए। सुबह-सुबह धरती हिलने से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) की ओर से ज़ारी जानकारी के मुताबिक, भूकंप सुबह 6:59 बजे आया और इसकी तीव्रता 3.2 दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र ज़मीन के भीतर 15 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था।

 

कम तीव्रता के इस भूकंप से फिलहाल किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है। हालांकि, सुबह के वक्त आए झटकों ने एक बार फिर हिमाचल के भूकंप प्रभावित क्षेत्रों की ओर ध्यान खींचा है। पिछले कुछ सालों में कांगड़ा और चंबा में कई बार हल्के भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। 

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हिमालयी क्षेत्र में क्यों आते हैं बार-बार भूकंप?

 

हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक स्थिति इसे भूकंपीय गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील बनाती है। भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच लगातार होने वाली भूगर्भीय हलचल के कारण हिमालयी क्षेत्र में भूकंप आते रहते हैं। कांगड़ा और चंबा भी उन इलाकों में शामिल हैं, जहां भूकंप का जोखिम अधिक माना जाता है।

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1905 की त्रासदी आज भी है इतिहास का हिस्सा

 

कांगड़ा में भूकंप का जिक्र आते ही 4 अप्रैल 1905 की वह भयावह घटना याद आती है, जिसने पूरे इलाके की तस्वीर बदल दी थी। करीब 7.8 तीव्रता वाले इस भूकंप से कांगड़ा, धर्मशाला और आसपास के क्षेत्रों में भारी तबाही हुई थी। बड़ी संख्या में इमारतें मलबे में तब्दील हो गई थीं और 18 हजार से ज्यादा लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।

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शुक्रवार को दर्ज किया गया भूकंप उस ऐतिहासिक आपदा से किसी भी तरह तुलनीय नहीं है। फिर भी, हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में भूकंपरोधी निर्माण और आपदा से निपटने की तैयारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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