शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की प्रतिनियुक्तियां खत्म करने के फैसले के बाद अब पसंदीदा स्टेशन पर बने रहने के लिए मानवीय आधार पर राहत मांगने के मामले सामने आने लगे हैं। बताया जा रहा है कि कुछ कर्मचारी और अधिकारी अपनी या परिवार के सदस्यों की बीमारी से जुड़े दस्तावेजों के साथ सरकार के समक्ष मौजूदा तैनाती जारी रखने का आग्रह कर रहे हैं।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने लिया फैसला
पिछले कुछ दिनों में ऐसे मामलों में तेजी आने की बात कही जा रही है। कर्मचारी अपनी परिस्थितियों का हवाला देते हुए मंत्रियों से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक राहत की गुहार लगा रहे हैं।
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दरअसल, प्रतिनियुक्तियों को लेकर हाईकोर्ट के आदेश के बाद कार्मिक विभाग ने 19 सितंबर को सरकारी विभागों, निगमों, बोर्डों और अन्य संस्थानों में चल रही प्रतिनियुक्तियां समाप्त करने के निर्देश जारी किए थे। इसके तहत दूसरे विभागों या कार्यालयों में डेपुटेशन पर सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को अब अपने मूल विभाग और निर्धारित तैनाती स्थल पर वापस लौटना है।
करीब 2500 कर्मचारियों की वापसी
जानकारी के अनुसार, शिक्षा, स्वास्थ्य समेत विभिन्न विभागों में करीब 2500 कर्मचारियों की प्रतिनियुक्तियां समाप्त की गई हैं। इसके बाद संबंधित कर्मचारियों की अपने मूल पदों और कार्यालयों में वापसी शुरू हो गई है। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन कर्मचारियों पर पड़ा है, जो लंबे समय से शिमला या अन्य पसंदीदा स्थानों पर प्रतिनियुक्ति के आधार पर सेवाएं दे रहे थे। सामान्य तबादलों पर रोक और डेपुटेशन समाप्त करने के आदेशों के बीच अब कई कर्मचारी राहत का रास्ता तलाश रहे हैं।
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मौजूदा स्थिति में कुछ कर्मचारी अपनी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों या परिवार के किसी सदस्य के इलाज का हवाला देकर मानवीय आधार पर मौजूदा स्टेशन पर सेवाएं जारी रखने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए संबंधित कर्मचारी मेडिकल रिपोर्ट और इलाज से जुड़े दस्तावेज भी प्रस्तुत कर रहे हैं। ऐसे मामलों में सरकार के सामने एक तरफ नियमों का पालन सुनिश्चित करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर वास्तविक चिकित्सा जरूरतों और पारिवारिक परिस्थितियों पर भी विचार करना होगा।
अब हाजिरी की भी होगी निगरानी
डेपुटेशन समाप्त करने के साथ सरकार ने कर्मचारियों की वास्तविक तैनाती और उपस्थिति को लेकर भी व्यवस्था सख्त की है। अब डीडीओ को वेतन बिल जारी करते समय यह प्रमाणित करना होगा कि संबंधित कर्मचारी ने उस महीने अपने मूल पद और निर्धारित स्टेशन पर वास्तव में सेवाएं दी हैं। केवल कागजों में तैनाती दिखाना पर्याप्त नहीं होगा।
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वेतन जारी करने से पहले कर्मचारी की वास्तविक उपस्थिति और कार्यस्थल पर सेवाएं देने की स्थिति का सत्यापन जरूरी होगा। नियमों की अनदेखी कर वेतन जारी किए जाने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई का प्रावधान रहेगा।
निदेशालयों में भी दिख रहा असर
प्रतिनियुक्तियां समाप्त होने का असर शिमला स्थित निदेशालयों में भी दिखाई देने लगा है। स्कूल शिक्षा निदेशालय से करीब दो दर्जन कर्मचारियों के अपने मूल तैनाती स्थलों पर लौटने की जानकारी है।
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इसी तरह अन्य निदेशालयों में भी डेपुटेशन पर तैनात कर्मचारियों की वापसी शुरू हो रही है। इससे लंबे समय से मूल कार्यालयों में खाली पड़े पदों पर कर्मचारी उपलब्ध होंगे। वहीं शिमला स्थित कार्यालयों में भी कर्मचारियों की संख्या और कार्यप्रणाली में बदलाव देखने को मिलेगा।
असली चुनौती अब सरकार के सामने
डेपुटेशन खत्म होने के बाद अब सरकार के सामने सबसे महत्वपूर्ण सवाल उन मामलों को लेकर है, जहां कर्मचारी वास्तव में गंभीर बीमारी या पारिवारिक चिकित्सा जरूरतों से जूझ रहे हैं। ऐसे मामलों में नियमों के पालन के साथ मानवीय आधार पर राहत देने के बीच संतुलन बनाना होगा।
साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि मानवीय आधार की व्यवस्था केवल पसंदीदा स्टेशन पर बने रहने का माध्यम न बन जाए। आने वाले दिनों में ऐसे मामलों पर सरकार का रुख महत्वपूर्ण रहेगा और इससे यह भी स्पष्ट होगा कि डेपुटेशन समाप्त करने के फैसले के बाद मानवीय आधार पर राहत के लिए क्या मानदंड अपनाए जाते हैं।
