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October 7, 2026

वीरभद्र सिंह के नाम पर पार्टी बनाने के प्रयास का कड़ा विरोध, प्रतिभा सिंह ने जताई आपत्ति

‘राजा’ और ‘बुशहर’ नामों को लेकर भी आपत्ति

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Virbhadra Pratibha Singh

शिमला। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत वीरभद्र सिंह के नाम और उनकी राजनीतिक पहचान से जुड़े नामों को लेकर पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह ने चुनाव आयोग का रुख किया है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र भेजकर कुछ प्रस्तावित राजनीतिक दलों के नामों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है।

परिवार की सहमति नहीं होने का दावा

बकौल प्रतिभा सिंह, उन्हें समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के माध्यम से इस तरह के राजनीतिक दलों के गठन से जुड़ी जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि देश में किसी भी व्यक्ति को नियमानुसार राजनीतिक दल बनाने का अधिकार है, लेकिन किसी दिवंगत नेता के नाम, पहचान या सार्वजनिक प्रतिष्ठा का इस्तेमाल उनकी पत्नी या परिवार की सहमति के बिना नहीं किया जाना चाहिए।

 

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पत्र में प्रतिभा सिंह ने स्पष्ट किया कि न तो उन्होंने और न ही उनके परिवार के किसी सदस्य ने वीरभद्र सिंह के नाम से इन प्रस्तावित दलों के गठन के लिए कोई अनुमति या सहमति दी है।

उन्होंने आयोग से अनुरोध किया है कि ऐसे नामों पर विचार करते समय इस पहलू को भी ध्यान में रखा जाए और बिना संबंधित परिवार की सहमति के ऐसे नामों का पंजीकरण न किया जाए।

मिलते-जुलते नामों पर भी रोक की मांग

प्रतिभा सिंह ने केवल मौजूदा प्रस्तावित नामों तक अपनी आपत्ति सीमित नहीं रखी है। उन्होंने चुनाव आयोग से यह भी आग्रह किया है कि भविष्य में वीरभद्र सिंह की पहचान या राजनीतिक विरासत से मिलते-जुलते नामों पर भी दल के पंजीकरण की अनुमति देने से पहले उनके पक्ष को सुना जाए।

 

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उन्होंने आयोग से मांग की है कि यदि इस तरह के किसी नाम से राजनीतिक दल के पंजीकरण के लिए आवेदन आता है, तो अंतिम निर्णय लेने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।

‘राजा’ और ‘बुशहर’ नामों को लेकर भी आपत्ति

प्रतिभा सिंह ने आयोग से आग्रह किया है कि ‘राष्ट्रवादी वीरभद्र कांग्रेस’ और ‘वीर कांग्रेस’ जैसे नामों से किसी राजनीतिक दल का पंजीकरण न किया जाए। उन्होंने अपने पत्र में ‘राजा’, ‘बुशहर’ और ‘राजा बुशहर’ जैसे शब्दों को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि ये नाम वीरभद्र सिंह की पारिवारिक और ऐतिहासिक पहचान से जुड़े रहे हैं।

 

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वीरभद्र सिंह बुशहर राजपरिवार से संबंधित थे और लंबे समय तक हिमाचल प्रदेश की राजनीति में उनका प्रमुख स्थान रहा। ऐसे में उनके नाम और विरासत से जुड़े शब्दों के राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर प्रतिभा सिंह ने चुनाव आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखा है। अब चुनाव आयोग इस आपत्ति और प्रस्तावित राजनीतिक दलों के नामों को लेकर क्या निर्णय लेता है, इस पर नजर रहेगी।

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