शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने एक ऐसा ऐलान कर दिया है, जिसने निर्धन परिवारों की नींद उड़ा दी है। हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बजट सत्र के बीच हिमाचल में पूर्व की जयराम सरकार की सबसे लोकप्रिय और चर्चित योजनाओं में शामिल हिमकेयर योजना को बंद करने का ऐलान कर दिया है। बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस फैसले की घोषणा करते हुए इसे जरूरी कदम बताया। हालांकि सीएम सुक्खू ने हिमकेयर योजना के स्थान पर नई इंश्योरेंस पॉलिसी शुरू करने की बात कही है।

हिमकेयर पर लगा गड़बड़ी का दाग

बजट पर चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने हिमकेयर योजना को बंद करने के पीछे बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी और पारदर्शिता की कमी का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि हिमकेयर योजना में करीब 1ए100 करोड़ रुपये की हेराफेरी सामने आई है। मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि एक मेडिकल कॉलेज के ऑडिट में ही 100 करोड़ रुपये का घोटाला उजागर हुआ है। इन सभी आरोपों की गंभीरता को देखते हुए, सरकार ने हिमकेयर योजना में हुई कथित अनियमितताओं की जांच विजिलेंस ब्यूरो को सौंप दी है।

 

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मुख्यमंत्री ने सदन में लूट शब्द का इस्तेमाल करते हुए स्पष्ट किया कि जब जनता के पैसे को बिना किसी उचित व्यवस्था और योजना के खर्च किया जाता है, तो वह जनता के पैसे की बर्बादी और लूट ही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व सरकार ने इस योजना को सही तरीके से लागू करने के बजाय निजी हितों को फायदा पहुंचाने के लिए इसका इस्तेमाल किया।

सुक्खू सरकार लाएगी नई इंश्योरेंस पॉलिसी

हालांकि सुक्खू सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि हिमकेयर की जगह एक नई इंश्योरेंस पॉलिसी लाई जाएगी। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था पहले से अधिक पारदर्शी और जवाबदेह होगी, जिसमें सभी भुगतान ट्रेजरी के माध्यम से होंगे। लेकिन इस नई योजना का स्वरूप क्या होगा, लाभार्थियों को किस तरह फायदा मिलेगा और क्या पहले जैसी पांच लाख तक की मुफ्त इलाज सुविधा जारी रहेगी इन सवालों पर अभी तस्वीर साफ नहीं है।

 

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गरीबों के लिए बढ़ता संकट

सुक्खू सरकार के इस फैसले का सीधा असर उन निर्धन परिवारों पर पड़ेगा, जो हिमकेयर योजना के माध्यम से पांच लाख तक के महंगे इलाज फ्री में करवा पा रहे थे। इस योजना के बंद होने के ऐलान से गरीब और निर्धन परिवारों में भय और अनिश्चितता का माहौल बन गया है। अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या उन्हें अब अस्पताल में इलाज के लिए अपनी जेब ढीली करनी पड़ेगी और क्या नई पॉलिसी उन्हें वह राहत प्रदान कर पाएगी जो हिमकेयर दे रही थी। बता दें कि हिमकेयर योजना के तहत कार्डधारकों को चुनिंदा सरकारी और निजी अस्पतालों में 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता था। 

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सीएम सुक्खू ने विपक्ष को 

मुख्यमंत्री ने पूर्व सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर हिमकेयर पर खर्च की गई राशि को सही तरीके से स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने में लगाया जाता, तो प्रदेश को ज्यादा फायदा मिलता। उन्होंने नेरचौक मेडिकल कॉलेज का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां आवश्यक मशीनरी और डॉक्टरों की कमी के बावजूद बाहरी निजी हितों को बढ़ावा दिया गया, जिससे मरीजों को महंगा इलाज झेलना पड़ा।

विपक्ष बोला गरीबों की स्वास्थ्य सुविधाएं छीन रही सरकार

वहीं, विपक्ष इस फैसले को लेकर सरकार पर हमलावर है। उनका कहना है कि हिमकेयर योजना को बंद करना सीधे तौर पर गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित करना है। विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार अपनी नीतिगत विफलताओं को छिपाने के लिए पिछली सरकार की योजनाओं को निशाना बना रही है।

 

इस पूरे घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि हिमाचल में स्वास्थ्य योजनाओं को लेकर सियासत तेज हो गई है। एक तरफ सरकार पारदर्शिता और सुधार का दावा कर रही हैए तो दूसरी तरफ आम जनता इस बात को लेकर असमंजस में है कि आने वाले समय में उन्हें सस्ती और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल पाएंगी या नहीं।

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