सिरमौर। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर स्थित गिरिपार क्षेत्र का पश्मी गांव गुरुवार को पूरी तरह भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। महासू महाराज के पवित्र दरबार में दूर-दूर के गांवों से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचीं धियांटियों ने लोक रीति-रिवाजों के साथ देव दर्शन किए और पूरे क्षेत्र की खुशहाली की कामना की।
सदियों पुरानी परंपरा का हुआ निर्वहन
सेवग बिरादरी से जुड़े 18 से 22 गांवों की लगभग 1500 धियांटियां इस विशेष धार्मिक आयोजन में शामिल हुईं। महिलाओं ने पारंपरिक गीतों और जयघोष के बीच मंदिर परिसर में प्रवेश किया और विधिवत पूजा-अर्चना की। गुरु पूर्णिमा पर आयोजित यह सामूहिक देव दर्शन गिरिपार क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
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महासू महाराज को अर्पित की चांदी की डोरिया
आयोजन के दौरान छत्रधारी चालदा महाराज और बोठा महाराज को श्रद्धा स्वरूप एक-एक किलोग्राम वजन की चांदी की डोरिया भेंट की गई। इस धार्मिक परंपरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। देव चिन्ह अर्पित करने की रस्म के दौरान मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा।
भक्ति के साथ दिखी संस्कृति की झलक
पूरे आयोजन में बिरसू गायन ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक माहौल से जोड़ दिया। महिलाओं की बड़ी भागीदारी ने एक बार फिर यह दिखाया कि गिरिपार की लोक संस्कृति और देव परंपराओं को संजोने में उनकी अहम भूमिका है। पश्मी गांव और शिलाई बाजार दिनभर धार्मिक उत्साह से सराबोर रहे।
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भंडारे में उमड़े श्रद्धालु
मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की व्यवस्था भी की गई, जहां हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर चार भाई महासू महाराज के वजीर दीवान सिंह राणा को सम्मानित किया गया। श्रद्धालुओं ने देव संस्कृति और अपनी पारंपरिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखने का संकल्प भी दोहराया।
