लाहौल-स्पीति। हिमाचल जितना खुबसूरत राज्य है, यहां के पहाड़ और ग्लेशियर उतने ही खतरनाक भी हैं। ग्लोबल वार्मिंग के चलते पिघलते यह ग्लेशियर झीलों का रूप धारण कर रहे हैं। जो कि हिमाचल के लिए बड़ी खतरे की घंटी है। ऐसे ही एक ग्लेशियर के पिघलने से आपदा की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका जाहिर की गई है।

बढ़ रहा झील का स्तर

बता दें कि लाहौल स्पीती में 4098 मीटर की ऊंचाई पर स्थित घेपांग घाट ग्लेशियर झील की सेटेलाइट तस्वीरों से इस बात का खुलासा हुआ है कि ग्लोबल वार्मिंग के होने से इस झील का दायरा लगातार बढ़ रहा है। यह भी पढ़ें: ट्रक ने स्कूटी को मारी टक्कर, बेटे की आंखों के सामने स्वर्ग सिधार गया पिता साथ ही झील के जलस्तर में भी बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में झील और उसके आसपास मौजूद इलाकों में आपदा की स्थिति उत्पन्न होने की भी आशंका जताई गई है।

आ सकती है कोई बड़ी आपदा

जानकारी देते हुए DC लाहौल-स्पीति राहुल कुमार ने बताया कि खतरे को देखते हुए उन्होंने भी एक्सपर्ट टीम के साथ घेपांग घाट गलेशियर झील का मुआयना किया है। वैज्ञानिकों द्वारा झील से जुड़े कई महत्त्वपूर्ण पहलुओं पर स्टडी की गई है। यह भी पढ़ें: HRTC बस में सो रही थी महिला: खराब हो गई कंडक्टर की नीयत- हुआ सस्पेंड इसका बारीकी से निरीक्षण कर इस पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को सौंपी जाएगी- ताकि समय रहते किसी भी प्राकृतिक आपदा से बचने के लिए धरातल पर ठोस कदम उठाया जा सके।

हर पहलु की हुई गहनता से जांच

उन्होंने बताया कि एक्सपीडिशन के दौरान टीम के द्वारा घेपांग झील से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर स्टडी की गई है। जिसमें मुख्य रूप से झील की गहराई, मोरेन-डेम हाइट एंड बिडथ, बेरियर स्ट्रेंथ, झील में जल स्तर, क्षेत्र की जूलॉजिकल स्थिति, भूस्खलन और एवलांच की संभावना जैसे करीब 20 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गहन जांच की गई है। DC राहुल ने बताया कि भारत सरकार ने सभी हिमालीय राज्यों में स्थित संभावित जल ग्रहण क्षेत्रों में प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित करने की पहल की है। ऐसे में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा झील के क्षेत्र में प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित करने की संभावनाएं तलाशने की कवायद शुरू कर दी गई है। यह भी पढ़ें: हिमाचल की कमाऊ पूत बनी यह फैक्ट्री, GST से भर रही सरकार का खजाना

चार बुनियादी विषयों पर काम शुरू

हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने चार बुनियादी विषयों पर काम करना शुरू किया है। जैसे कि-
  • लीड वाई (LTA) उपकरण की पहचान करना और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों और हिमानी झील को प्राथमिकता देना
  • सभी उच्च जोखिम का आकलन करने के लिए क्षेत्र अभियान चलाना
  • हिमनदों की निगरानी में राज्यों को उनके समर्थन को सुव्यवस्थित करना
  • भारत-तिब्बत सीमा पुलिस की भागीदारी सुनिश्चित करना

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