कांगड़ा। खराब गुणवत्ता वाला जूस बेचने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने डाबर इंडिया लिमिटेड को शिकायतकर्ता को 60 हजार रुपये मुआवजे देने का फैसला सुनाया है।

खराब जूस पीने से टूटा व्रत

इसके अलावा 10 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के तौर पर अदा करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही कंपनी को जिला उपभोक्ता कल्याण कोष, कांगड़ा में 30 हजार रुपये जमा करवाने का भी आदेश दिया गया है।

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उपभोक्ता ने कंपनी पर ठोका केस

आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि फैसले की प्रति प्राप्त होने के 45 दिनों के भीतर सभी निर्देशों का पालन किया जाए। यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया जाता है तो कंपनी को शिकायत दायर होने की तिथि से लेकर भुगतान किए जाने तक 60 हजार रुपये की राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

मिला 60 हजार मुआवजा

यह निर्णय जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा तथा सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की खंडपीठ ने सुनाया। मामला कांगड़ा जिले के इंदौरा निवासी करणवीर सिंह पटियाल द्वारा दायर की गई शिकायत से जुड़ा है।

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एक लीटर मोसंबी जूस खरीदा था

शिकायत के अनुसार करणवीर सिंह पटियाल ने 26 जुलाई 2024 को इंदौरा स्थित राजू कन्फेक्शनरी एंड बेकर्स से डाबर इंडिया लिमिटेड का एक लीटर क्षमता वाला रियल फ्रूट पावर मोसंबी जूस खरीदा था। उनके अनुसार जूस का निर्माण मई 2024 में हुआ था और उसकी उपयोग अवधि (एक्सपायरी) नवंबर 2024 तक निर्धारित थी।

बोतल में लगी थी फफूंद

शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि सावन माह के धार्मिक व्रत के दौरान शरीर में पानी की कमी पूरी करने के उद्देश्य से उन्होंने जूस का सेवन किया। जूस का स्वाद असामान्य लगने पर जब उन्होंने बोतल की जांच की तो उसके भीतर काफी मात्रा में काली फफूंद दिखाई दी। उनका आरोप था कि खराब जूस पीने के कारण उनका धार्मिक व्रत भंग हो गया, जिससे उन्हें मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक पीड़ा का सामना करना पड़ा।

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कंपनी ने किया इग्नोर

करणवीर सिंह पटियाल ने बताया कि घटना वाले दिन ही उन्होंने ईमेल के माध्यम से कंपनी को शिकायत भेजी थी, लेकिन उन्हें संतोषजनक समाधान नहीं मिला। इसके बाद 1 अगस्त 2024 को कंपनी और संबंधित विक्रेता को कानूनी नोटिस भी भेजा गया। नोटिस के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने पर उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दायर कर न्याय की मांग की।

आयोग के पास पहुंचा मामला

मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने उपलब्ध तथ्यों और पक्षों की दलीलों पर विचार किया। इसके बाद आयोग ने शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए डाबर इंडिया लिमिटेड को मुआवजा, मुकदमे का खर्च तथा जिला उपभोक्ता कल्याण कोष में निर्धारित राशि जमा करवाने के आदेश जारी किए। साथ ही आयोग ने समयसीमा में आदेश का पालन सुनिश्चित करने और देरी होने की स्थिति में ब्याज सहित भुगतान करने के निर्देश भी दिए।

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