सिरमौर। देवभूमि हिमाचल की देव संस्कृति, लोक आस्था और सनातन परंपराओं का एक अद्भुत और भावनात्मक दृश्य सिरमौर जिले के टिटियाना गांव में देखने को मिला। कल यहां गांव की करीब 350 विवाहित बेटियां एक जैसी पारंपरिक वेशभूषा धारण कर छत्रधारी चालदा महासू महाराज (पश्मी) के दर्शन के लिए सामूहिक रूप से रवाना हुईं।
देवता साहिब के दर्शन करने पहुंची 350 विवाहित बेटियां
इन विवाहित बेटियों को स्थानीय बोली में "घिटियां" कहा जाता है। इस अनूठे धार्मिक आयोजन ने न केवल श्रद्धालुओं को भाव-विभोर किया, बल्कि क्षेत्र की सदियों पुरानी देव परंपराओं को भी नई ऊर्जा प्रदान की।
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पूरे गांव में उत्साह का माहौल
सुबह से ही टिटियाना गांव में धार्मिक उत्साह का माहौल बना हुआ था। अलग-अलग गांवों और परिवारों में विवाह के बाद बस चुकी बेटियां अपने मायके की सांस्कृतिक पहचान और देव आस्था से जुड़ने के लिए एक स्थान पर एकत्रित हुईं।
गांव में जयकारों की गूंज
सभी महिलाओं ने पारंपरिक परिधान पहनकर इस धार्मिक यात्रा में भाग लिया। जिससे पूरा वातावरण रंग-बिरंगी लोक संस्कृति और श्रद्धा से सराबोर नजर आया। तीन बसों और अन्य वाहनों में सवार होकर जब श्रद्धालुओं का यह विशाल जत्था महासू महाराज के दर्शनों के लिए रवाना हुआ तो गांव जयकारों से गूंज उठा।
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चांदी का छत्र किया भेंट
"महासू महाराज की जय" के उद्घोषों के बीच महिलाओं के चेहरों पर श्रद्धा, उत्साह और आत्मिक आनंद साफ झलक रहा था। इस दौरान महिलाओं ने छत्रधारी चालदा महासू महाराज को श्रद्धापूर्वक चांदी का छत्र भी भेंट किया और देव आशीर्वाद प्राप्त किया।
सदियों से चली आ रही परंपरा
ग्रामीणों और क्षेत्र के बुजुर्गों का कहना है कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक यात्रा भर नहीं है, बल्कि अपनी जड़ों, संस्कृति और देव विश्वासों से जुड़े रहने की एक सशक्त परंपरा भी है। वर्षों से निभाई जा रही यह परंपरा समाज को एक सूत्र में बांधने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम बनी हुई है।
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जब देव परिसर पहुंची बेटियां....
महासू महाराज के देव परिसर में पहुंचने के बाद जब गिरिपार क्षेत्र की इन सैकड़ों बेटियों ने सामूहिक रूप से पारंपरिक "रासा" डाला तो पूरा वातावरण लोक संस्कृति के रंग में रंग गया।
एक जैसी पोशाकों में सजी महिलाएं
एक जैसी पोशाकों में सजी महिलाओं की एकजुटता, लोकगीतों की मधुर धुन और देव जयकारों की गूंज ने ऐसा अलौकिक दृश्य प्रस्तुत किया, जिसे देखने वाला हर व्यक्ति भावुक हो उठा। यह दृश्य देवभूमि हिमाचल की उस सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक बन गया, जिसे पीढ़ियों से सहेजकर रखा गया है।
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चालदा महासू पूरी करते हैं हर मनोकामना
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार छत्रधारी चालदा महासू महाराज अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं तथा उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। इसी अटूट विश्वास के साथ महिलाओं ने देव चरणों में शीश नवाया और अपने परिवारों की खुशहाली, बच्चों के उज्ज्वल भविष्य, क्षेत्र की उन्नति तथा समाज में सुख-समृद्धि की कामना की।
देव संस्कृति आज भी है
यात्रा के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक लोकगीतों और देव स्तुतियों के माध्यम से हिमाचल की समृद्ध लोक संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन भी किया। सैकड़ों महिलाओं की एक साथ उपस्थिति और देव संस्कृति के प्रति उनका समर्पण यह साबित करता है कि देवभूमि हिमाचल की सांस्कृतिक विरासत आज भी उतनी ही जीवंत, मजबूत और सम्मानित है, जितनी सदियों पहले थी।
