#हादसा
July 23, 2026
हिमाचल : भारी बारिश में ढहा 150 साल पुराना मकान, चंद मिनटों में मलबा बनी 4 पीढ़ियों की विरासत
चार पीढ़ियों की विरासत थी यह इमारत, पर्यटकों के आकर्षण का था प्रमुख केंद्र
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा में मंगलवार सुबह बादल फटने और भूस्खलन से आई भीषण आपदा ने केवल घरों और पशुशालाओं को ही नहीं उजाड़ा, बल्कि क्षेत्र की एक अमूल्य सास्कृतिक धरोहर भी हमेशा के लिए मिटा दी। शाहपुर विधानसभा क्षेत्र की बोह घाटी के गडघूं गांव में स्थित करीब 150 वर्ष पुराना तीन मंजिला पुश्तैनी हेरिटेज होम देखते ही देखते मलबे में समा गया।
बताया जा रहा है कि यह मकान ओंकार सिंह और करतार चंद के परिवार की पुश्तैनी विरासत था। महज दस मिनट के भीतर आए मलबे और तेज बहाव ने चार पीढ़ियों के इतिहास को अपने साथ बहा दिया। अब उस ऐतिहासिक भवन की जगह सिर्फ मलबे का ढेर बचा है।
यह भवन पारंपरिक कांगड़ी-पहाड़ी वास्तुकला का एक दुर्लभ नमूना माना जाता था। परिवार भले ही वर्षों पहले कोटला के सोलधा क्षेत्र में बस गया था, लेकिन उन्होंने अपने पूर्वजों की इस निशानी को न तो तोड़ा और न ही आधुनिक रूप दिया। इसे मूल स्वरूप में सुरक्षित रखा गया था ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी सांस्कृतिक जड़ों को देख और समझ सकें।
गडघूं गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित प्रसिद्ध खबरू वाटरफॉल घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए यह हेरिटेज होम खास आकर्षण का केंद्र था। पहाड़ी शैली में बने इस ऐतिहासिक मकान के सामने फोटो और सेल्फी लेना लगभग हर पर्यटक की यादगार यात्रा का हिस्सा बन चुका था। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस भवन को देखे बिना और उसके सामने तस्वीर लिए बिना कई पर्यटकों को अपनी यात्रा अधूरी लगती थी।
तीन मंजिला इस भवन की बनावट भी अनोखी थी। भूतल पर पशुओं के लिए स्थान बनाया गया था, पहली मंजिल पर परिवार के रहने के कमरे और सामने बरामदा था, जबकि सबसे ऊपरी मंजिल पर पारंपरिक पहाड़ी रसोई बनाई गई थी। यह मकान केवल लकड़ी, पत्थर और मिट्टी से बना ढांचा नहीं था, बल्कि हिमाचल की लोक संस्कृति, पारिवारिक परंपराओं और पहाड़ी जीवनशैली का जीवंत प्रतीक था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस हेरिटेज होम का खत्म होना केवल एक परिवार का नुकसान नहीं है। बल्कि पूरी बोह घाटी और हिमाचल की सांस्कृतिक विरासत को लगा ऐसा घाव है, जिसकी भरपाई शायद कभी नहीं हो सकेगी।