कुल्लू। हिमाचल प्रदेश की देवभूमि में इन दिनों कुल्लू घाटी पूरी तरह भक्तिमय रंग में रंगी हुई है। घाटी के आराध्य देव बिजली महादेव की वार्षिक परिक्रमा को लेकर हर गांव, हर रास्ते और हर चेहरे पर आस्था साफ झलक रही है।
भव्य रथ पर देवता की परिक्रमा यात्रा
मंगलवार का दिन इस धार्मिक परंपरा के लिए खास रहा, जब देवता अपने प्राचीन देवालय से भव्य रथ पर विराजमान होकर परिक्रमा यात्रा के लिए रवाना हुए। जैसे ही देव रथ ने मंदिर परिसर से प्रस्थान किया, ढोल-नगाड़ों की गूंज और श्रद्धालुओं के जयकारों ने पूरे वातावरण को दिव्यता से भर दिया।
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सीधी पहाड़ी से नीचे गांव तक
इस यात्रा का सबसे रोमांचक और श्रद्धा से भर देने वाला दृश्य उस समय देखने को मिला, जब देव रथ को खड़ी और सीधी पहाड़ी से नीचे गांव तक पहुंचाया गया। परंपरा के अनुसार, इस दुर्गम रास्ते को पार करने के लिए रस्सियों का सहारा लिया गया।
रस्सियों का लिया गया सहारा
कई श्रद्धालु और सेवादार एकजुट होकर इस कार्य में लगे और धीरे-धीरे रथ को सुरक्षित नीचे उतारा गया। यह नजारा न केवल आस्था का प्रतीक था, बल्कि लोगों की एकता और विश्वास की मिसाल भी बना। हर कोई इस पल को अपनी आंखों में कैद करता नजर आया।
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हर घर में उत्साह
देव यात्रा का पहला पड़ाव जिया गांव तय किया गया है, जहां देवता के स्वागत के लिए ग्रामीणों ने विशेष तैयारियां की हैं। गांव के हर घर में उत्साह है और लोग अपने आराध्य के स्वागत के लिए फूलमालाएं और पारंपरिक भेंट तैयार कर रहे हैं।
बिरशु मेले का आयोजन
इससे पहले देवता का रात्रि ठहराव भ्रैंण गांव में होगा, जहां सदियों पुरानी परंपरा के तहत प्रसिद्ध बिरशु मेले का आयोजन किया जाएगा। इस मेले में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ देवता की आराधना करते हैं।
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देव रथ सुरक्षित पहुंचाना चुनौती
भ्रैंण से जिया तक का रास्ता बेहद कठिन माना जाता है। ऊंची चढ़ाई, संकरी पगडंडियां और सीधी पहाड़ी इस मार्ग को जोखिम भरा बनाती हैं। ऐसे में देव रथ को सुरक्षित पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं होता। लेकिन स्थानीय लोगों की आस्था और सहयोग इस कठिनाई को आसान बना देता है। रस्सियों के सहारे रथ को नीचे उतारने का दृश्य हर किसी को रोमांचित कर देता है- यहां डर और विश्वास एक साथ चलते हैं, लेकिन अंत जीत आस्था की ही होती है।
तीन दिन तक चलेगा मेला
जिया गांव के पूर्व पंचायत प्रधान संजू पंडित के अनुसार, बैसाख संक्रांति पर हर साल देवता का गांव में आगमन होता है, जिसका लोगों को पूरे साल इंतजार रहता है। इस बार भी गांव में तीन दिनों तक भव्य मेले का आयोजन किया जाएगा।
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मेले के दौरान पारंपरिक लोकनृत्य, सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे। खास बात यह है कि महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में समूह नृत्य प्रस्तुत करती हैं, जो कुल्लू की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर देता है।
सुख-समृद्धि की करेंगे कामना
देवता के आगमन पर श्रद्धालु फूलमालाओं और भेंट के साथ उनका स्वागत करेंगे और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। इन दिनों पूरा क्षेत्र भक्ति में डूबा हुआ है और हर कोई इस पावन परिक्रमा का हिस्सा बनने के लिए उत्साहित नजर आ रहा है।
