शिमला/नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर अक्सर केंद्र स्तर पर प्रदेश से जुड़े अहम मुद्दों को उठाते रहे हैं। इसी कड़ी में अब उन्होंने एक बार फिर हिमाचल के पर्यटन से जुड़े बेहद महत्वपूर्ण विषय एयर स्पोर्ट्स] खासकर पैराग्लाइडिंग में बढ़ते हादसों को संसद में जोरदार तरीके से उठाया है।
लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान अनुराग ठाकुर ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय का ध्यान हिमाचल और उत्तराखंड के प्रमुख पैराग्लाइडिंग स्थलों पर हो रही लगातार दुर्घटनाओं की ओर दिलाया। उन्होंने कहा कि मनाली और बीड़-बिलिंग जैसे विश्व प्रसिद्ध स्थलों पर हर साल हजारों पर्यटक आते हैं, लेकिन सुरक्षा मानकों की कमी के कारण हादसों का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
बढ़ते हादसे बने चिंता का कारण
अनुराग ठाकुर ने सदन में जानकारी देते हुए कहा कि पिछले छह वर्षों में हिमाचल प्रदेश में पैराग्लाइडिंग दुर्घटनाओं में 30 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इनमें बीड़-बिलिंग क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहा है, जहां विदेशी पर्यटकों समेत कई लोगों की मौत हुई है। उन्होंने इन घटनाओं को गंभीर बताते हुए कहा कि इससे राज्य की पर्यटन छवि पर भी असर पड़ रहा है।
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हादसों के पीछे ये कारण
उन्होंने कहा कि इन दुर्घटनाओं के पीछे कई अहम कारण हैं ढीले नियम, अपर्याप्त प्रशिक्षण प्राप्त पायलट, उपकरणों की गुणवत्ता में कमी, अचानक बदलने वाला मौसम और सुरक्षा प्रोटोकॉल का अभाव। इन कमियों के चलते न सिर्फ पर्यटकों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है, बल्कि प्रदेश अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की मेजबानी से भी वंचित हो रहा है।
7 सूत्रीय प्लान से सुधार की मांग
अनुराग ठाकुर ने इन समस्याओं के समाधान के लिए संसद में एक विस्तृत सात सूत्रीय योजना भी पेश की। उन्होंने मांग की कि नेशनल एयर स्पोर्ट्स गाइडलाइंस 2023 को कानूनी दर्जा दिया जाए, ताकि नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित हो सके और उल्लंघन पर कार्रवाई हो।
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लाइसेंसिंग और प्रशिक्षण पर जोर
उन्होंने पैराग्लाइडिंग, स्काईडाइविंग और हॉट एयर बैलूनिंग के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अनिवार्य लाइसेंसिंग और प्रमाणन प्रणाली लागू करने की मांग की, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो। साथ ही समय-समय पर पायलटों का पुनः प्रमाणन भी जरूरी बताया।
ट्रैकिंग और मौसम निगरानी जरूरी
तकनीकी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अनुराग ठाकुर ने सभी उड़ानों में जीपीएस आधारित ट्रैकिंग सिस्टम और इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर अनिवार्य करने की बात कही। उन्होंने रीयल-टाइम मौसम निगरानी और खराब मौसम में उड़ान पर रोक लगाने की व्यवस्था को भी जरूरी बताया।
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राष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण संस्थान बनाने की मांग
उन्होंने हिमाचल में एक राष्ट्रीय पैराग्लाइडिंग स्कूल स्थापित करने के लिए केंद्र से फंडिंग की मांग की, ताकि प्रशिक्षित पायलट तैयार किए जा सकें और प्रदेश अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की मेजबानी के लिए सक्षम बन सके।
सुरक्षा निगरानी के लिए विशेष सेल का प्रस्ताव
इसके अलावा अनुराग ठाकुर ने एयर स्पोर्ट्स के लिए एक समर्पित राष्ट्रीय सेफ्टी और ट्रैकिंग सेल बनाने का प्रस्ताव भी रखा, जो उड़ानों की निगरानी, सुरक्षा उपकरणों की जांच और आपदा प्रतिक्रिया एजेंसियों के साथ समन्वय का काम करे।
मुआवजा और जांच व्यवस्था की भी मांग
उन्होंने सभी हादसों की स्वतंत्र जांच और पीड़ितों के लिए न्यूनतम मुआवजा व पुनर्वास नीति लागू करने की भी मांग की।
