मंडी। हिमाचल प्रदेश में सुक्खू सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए गए "व्यवस्था परिवर्तन" के सकारात्मक परिणाम धरातल पर दिखने लगे हैं। कभी सुविधाओं और गुणवत्ता की कमी के कारण उपेक्षित माने जाने वाले सरकारी स्कूलों में आज एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है। सुक्खू सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों में सीबीएसई (CBSE) प्रणाली लागू करने का साहसिक और दूरदर्शी निर्णय अब एक शिक्षा क्रांति बनकर उभरा है। कभी घटती छात्र संख्या से जूझ रहे सरकारी विद्यालय आज फिर से अभिभावकों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं। 

इस स्कूल में एक हजार से अधिक दाखिले

इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल मंडी जिला के जोगेंद्रनगर स्थित पीएमश्री राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बनकर उभरा है, जहां छात्रों की संख्या 1000 का आंकड़ा पार कर चुकी है। यहां कुल 1051 विद्यार्थियों का पंजीकरण हुआ है, जो सरकारी शिक्षा प्रणाली पर बढ़ते भरोसे का एक बड़ा प्रतीक है।

 

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सरकारी स्कूलों की ओर रूख करने लगे अभिभावक

यह उपलब्धि केवल एक संख्या नहीं, बल्कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था में लौटते विश्वास की कहानी है। जिस दौर में अभिभावक भारी फीस चुकाकर निजी स्कूलों की ओर रुख करते थे, वही अब सरकारी स्कूलों की ओर तेजी से लौट रहे हैं। जोगेंद्रनगर स्कूल में इस सत्र में सैकड़ों छात्रों ने निजी स्कूलों को छोड़कर दाखिला लिया है, जो इस बदलाव की सबसे मजबूत तस्वीर पेश करता है।

निजी स्कूलों के सैंकड़ों छात्रों ने लिया दाखिला

इस पाठशाला में 241 छात्र निजी स्कूलों को छोड़कर सरकारी पाठशाला की दहलीज पर पहुंचे हैं। इतना ही नहीं 134 छात्र अन्य सरकारी स्कूलों से भी स्थानांतरित होकर यहां आए हैं। स्कूल में बेटियों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। विभिन्न कक्षाओं और संकायों में छात्राओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक सामाजिक बदलाव का संकेत है। वहीं, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए भी स्कूल प्रशासन द्वारा संवेदनशीलता के साथ सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

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क्या कहते हैं प्रधानाचार्य

स्कूल के प्रधानाचार्य मनोज चौहान के अनुसार उनका लक्ष्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि सीबीएसई के उच्च मानकों के अनुरूप विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना है। अभिभावकों का बढ़ता विश्वास उनके लिए प्रेरणा के साथ.साथ जिम्मेदारी भी है।

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सुक्खू सरकार की व्यवस्था परिवर्तन की जीत

हिमाचल की सुक्खू सरकार का 'शिक्षा मॉडल' अब अन्य क्षेत्रों के लिए एक मिसाल बन चुका है। सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू होने से शिक्षा की गुणवत्ता में जो सुधार आया है, उसने सरकारी स्कूलों को एक बार फिर 'जीवित' कर दिया है। यह स्पष्ट है कि यदि इरादे नेक हों और नीति में स्पष्टता हो, तो सरकारी तंत्र निजी संस्थानों से कहीं बेहतर परिणाम दे सकता है। जोगेंद्रनगर का यह कीर्तिमान न केवल प्रदेश की शिक्षा नीति की सफलता है, बल्कि सरकारी स्कूलों में सुनहरे भविष्य की उम्मीदों को नया पंख देने वाला कदम भी है।