नाहन। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के कालाअंब थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाली वारदात ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं। अवैध खनन के आरोप में जब्त एक टिप्पर को अज्ञात चोरों ने थाने के बाहर से चुरा लिया, जो न केवल सुरक्षा व्यवस्था की लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हो चुके हैं।

पुलिस ने अवैध खनन पर सीज किया था टिप्पर

यह टिप्पर हरियाणा के अंबाला जिले के उजल माजरी गांव निवासी मुख्त्यार पुत्र अमरनाथ का बताया जा रहा है। पुलिस ने इसे 18 मई को अवैध खनन के मामले में जब्त किया था। 27 मई को अदालत से टिप्पर की रिहाई के आदेश दिए थे, लेकिन उसी रात यह टिप्पर थाने के बाहर से रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया। इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन में भी हड़कंप मच गया है।

पुलिस थाने के बाहर भी सुरक्षित नहीं वाहन

चोरी हुआ टिप्पर थाने के बाहर खड़ा किया गया था, क्योंकि थाने के भीतर पर्याप्त जगह नहीं थी। यह पुलिस व्यवस्था की एक ऐसी खामी है, जो अब एक बड़े नुकसान का कारण बन चुकी है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि थाने के सामने से चोरी हो सकती है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा की कितनी गारंटी है।

 

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वाहन मालिक को भारी नुकसान

पीड़ित टिप्पर मालिक मुख्त्यार ने पुलिस अधीक्षक निश्चिन्त नेगी को पत्र सौंपते हुए मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि इस टिप्पर की कीमत लगभग 45 लाख रुपए है और इसकी अनुपलब्धता की वजह से उन्हें रोजाना लगभग 35 हजार रुपए का नुकसान हो रहा है। उन्होंने एसपी से गुहार लगाई है कि उनका टिप्पर जल्द से जल्द ढूंढ कर उन्हें दिलाया जाए, ताकि वह नुकसान से बच सके।

 

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पुलिस की सफाई और आश्वासन

पुलिस अधीक्षक निश्चिन्त नेगी ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने माना कि थाने में जगह की कमी एक समस्या है, जिसके चलते जब्त वाहन अक्सर थाने के बाहर ही खड़े किए जाते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि जल्द ही चोरी हुए टिप्पर को बरामद कर लिया जाएगा।

 

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सिस्टम पर सवालिया निशान

यह घटना न केवल एक वाहन चोरी का मामला है, बल्कि यह पुलिस की लचर निगरानी, सुरक्षा प्रबंधन की असफलता और संसाधनों की कमी का एक चिंताजनक उदाहरण है। जिस स्थान को अपराधियों के लिए सबसे असुरक्षित माना जाना चाहिए, वहीं से चोरी हो जाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरा आघात है। अब देखना यह है कि पुलिस इस मामले में कितनी तेजी, पारदर्शिता और निष्पक्षता से कार्रवाई करती है।

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