मंडी: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ लोगों को हैरान कर दिया है, बल्कि कई ग्रामीणों को अपनी पसंद पर भी सवाल उठाने पर मजबूर कर दिया है। जिस व्यक्ति पर ग्रामीणों ने पंचायत की बागडोर संभालने का भरोसा जताया, उसी पंचायत प्रतिनिधि का पंचायत घर के भीतर कथित तौर पर शराब पीते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। हैरानी की बात यह है कि वीडियो में पंचायत सचिव भी उसके साथ नजर आ रहे हैं।

 

मामला विकास खंड द्रंग की ग्राम पंचायत बल्ह के पंचायत कार्यालय से जुड़ा बताया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद सरकारी भवन में इस तरह की गतिविधि को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है और पंचायत व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

पंचायत घर में छलक रहे थे जाम!

पंचायत घर ग्रामीणों के लिए सरकारी कामकाज और विकास योजनाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण केंद्र होता है। यहीं ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं और पंचायत प्रतिनिधियों के साथ मिलकर गांव के विकास से जुड़े फैसले लिए जाते हैं। लेकिन वायरल वीडियो में कथित तौर पर इसी पंचायत भवन के भीतर शराब का सेवन करते हुए कुछ लोग दिखाई दे रहे हैं।

 

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बताया जा रहा है कि वीडियो में एक पंचायत प्रतिनिधि और पंचायत सचिव नजर आ रहे हैं। दोनों के हाथ में शराब के गिलास दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। इस पूरी घटना को गांव के ही एक स्थानीय युवक ने अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड किया और बाद में इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

कैमरे में कैद हुई पूरी घटना

स्थानीय युवक द्वारा बनाए गए इस वीडियो के सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। वीडियो को लेकर ग्रामीणों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लोगों का कहना है कि पंचायत भवन जैसे सरकारी कार्यालय में इस तरह की गतिविधियां किसी भी स्थिति में उचित नहीं मानी जा सकतीं। हालांकि, वायरल वीडियो कब का है, उसमें दिखाई दे रहे लोग कौन हैं और घटना किन परिस्थितियों में हुई, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में वीडियो की सत्यता और पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।

 

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ग्रामीणों में रोष, पंचायत व्यवस्था पर उठे सवाल

वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत प्रतिनिधियों से लोग जिम्मेदारी, अनुशासन और जनसेवा की उम्मीद करते हैं। ऐसे में यदि सरकारी कार्यालय में ही इस तरह की गतिविधि होती है तो यह आम लोगों के भरोसे को प्रभावित करने वाला मामला है। लोगों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वीडियो कब बनाया गया था और इसमें दिखाई दे रहे लोगों की भूमिका क्या थी।

 

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जांच के बाद ही साफ होगी तस्वीर

फिलहाल वायरल वीडियो के आधार पर लगाए जा रहे आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन या संबंधित विभाग की ओर से इस मामले में क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। अब सवाल यह है कि जिस पंचायत घर में ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान और गांव के विकास की योजनाएं तैयार होनी चाहिए थीं, वहां कथित तौर पर जाम कैसे पहुंचा? वायरल वीडियो ने पंचायत प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी और सरकारी कार्यालयों के अनुशासन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

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