शिमला। हिमाचल प्रदेश में भ्रष्टाचार की जड़ें लगातार गहरी होती जा रही हैं। आए दिन हिमाचल में रिश्वत के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसा ही एक बड़ा मामला अब राजधानी शिमला से सामने आया है। यहां एक इनकम टैक्स ऑफिसर ने मामला निपटाने के लिए पांच लाख की रिश्वत मांग ली। अधिकारी ने यह रिश्वत 17.94 लाख रुपए की देनदारियों का मामला निपटाने के लिए मांगी थी। जिसके बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो ; सीबीआई ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। आरोपी अधिकारी फिलहाल फरार है और सीबीआई उसे पकड़ने के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है।
कारोबारी को भेजा था आयकर रिकवरी नोटिस
मामला सोलन जिले के अर्की क्षेत्र से जुड़े कारोबारी लाभचंद से संबंधित है। आरोपों के अनुसार, आयकर अधिकारी वरुण खारी की ओर से कारोबारी को 7 अगस्त को आयकर रिकवरी से संबंधित नोटिस भेजा गया था। नोटिस में वर्ष 2017 के लिए 8 लाख 97 हजार 160 रुपये और वर्ष 2018 के लिए 6 हजार 10 रुपये की पेनल्टी जमा करने का उल्लेख था। कारोबारी ने इस कार्रवाई पर अपने कंसल्टेंट के माध्यम से आयकर विभाग के पोर्टल पर आपत्ति दर्ज कराई।
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दस्तावेज लेकर अधिकारी से मिलने पहुंचा कारोबारी
आपत्ति दर्ज कराने के बाद कारोबारी 8 सितंबर को संबंधित दस्तावेजों के साथ आयकर अधिकारी से मिलने पहुंचा। आरोप है कि इसी मुलाकात के दौरान मामले ने नया मोड़ लिया। कारोबारी के मुताबिक, अधिकारी ने पेनल्टी के साथ ब्याज की रकम जोड़ते हुए उसकी कुल देनदारी करीब 17.94 लाख रुपये बताई।
रिश्वत की पेशकश का आरोप
शिकायत के अनुसार कारोबारी पर कथित देनदारी जमा करने का दबाव बनाया गया। आरोप है कि इसी दौरान आयकर अधिकारी ने रकम कम कराने और मामले को निपटाने के बदले 5 लाख रुपये रिश्वत की मांग की। कारोबारी ने इस बातचीत को डिजिटल रिकॉर्डर में रिकॉर्ड कर लिया। यही रिकॉर्डिंग बाद में CBI की जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य बनी।
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पहले 4 लाख, फिर 5 लाख देने की बात
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार कथित तौर पर शुरुआत में 4 लाख रुपये की मांग की गई थी। बातचीत आगे बढ़ने पर रकम को लेकर कथित रूप से समझौता हुआ और 3 लाख रुपये तत्काल तथा 2 लाख रुपये एक सप्ताह के भीतर देने की बात सामने आई। आरोप है कि पहली किस्त उसी शाम करीब सात बजे तक देने की बात तय हुई थी।
रिश्वत देने के बजाय कारोबारी ने CBI से की शिकायत
कारोबारी ने कथित तौर पर रिश्वत की रकम अधिकारी को देने के बजाय पूरे मामले की जानकारी CBI को दी। इसके बाद जांच एजेंसी ने शिकायत में लगाए गए आरोपों की अपने स्तर पर पड़ताल शुरू की। उपलब्ध साक्ष्यों और प्रारंभिक जांच के आधार पर आरोपों में प्रथम दृष्टया दम पाए जाने के बाद CBI ने केस दर्ज करने की कार्रवाई की।
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CBI ने आरोपी आयकर अधिकारी वरुण खारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया है। यह धारा लोक सेवक द्वारा अनुचित लाभ या रिश्वत मांगने अथवा स्वीकार करने से संबंधित है। एफआईआर दर्ज होने के बाद एजेंसी ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
CBI की दबिश, आरोपी अधिकारी की तलाश तेज
मामला दर्ज होने के बाद CBI की टीम आरोपी अधिकारी की तलाश में सक्रिय हो गई है। जांच एजेंसी की ओर से उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दिए जाने की सूचना है। हालांकि, अब तक आरोपी अधिकारी का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। CBI उसकी तलाश के साथ-साथ मामले से जुड़े अन्य तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की भी जांच कर रही है।
आयकर विभाग के अधिकारी पर लगे गंभीर आरोप
सरकारी विभाग के एक अधिकारी पर कारोबारी का टैक्स संबंधी मामला निपटाने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप लगने से यह मामला गंभीर हो गया है। हालांकि, आरोपी अधिकारी के खिलाफ लगे आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी। फिलहाल CBI ने एफआईआर दर्ज कर जांच का दायरा बढ़ा दिया है।
