शिमला। हिमाचल प्रदेश में नशे (चिट्टा) की एक बहुत बड़ी खेप की सप्लाई होने से पहले ही शिमला पुलिस ने सीमा पार पंजाब में घुसकर ड्रग सिंडिकेट के एक बड़े और मुख्य किंगपिन (तस्कर) को दबोचने में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। पुलिस ने आरोपी के ठिकाने से भारी मात्रा में चिट्टा बरामद किया है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 25 लाख रुपये से भी अधिक आंकी जा रही है। इतनी भारी मात्रा में नशे की खेप को सामने देखकर एक बार तो खुद पुलिस अधिकारी और जांच टीम भी दंग रह गई। हैरान कर देने वाली बात यह है कि इस बड़े मगरमच्छ की गिरफ्तारी कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि पहले से सलाखों के पीछे बंद एक नशा तस्कर के 'बैकवर्ड लिंकेज' (कड़ियों को पीछे से जोड़ने) की गहन तफ्तीश के चलते संभव हो पाई है।
कड़ियां जुड़ीं और सलाखों के पीछे पहुंचा किंगपिन
इस पूरे अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क के भंडाफोड़ की कहानी 10 जून 2026 से शुरू होती है। शिमला के सदर पुलिस थाना में दर्ज एक मामले (FIR नंबर 74/2026) के तहत पुलिस ने राहुल ठाकुर (निवासी धर्मपुर, जिला मंडी) को 7 ग्राम चिट्टे और 23 हजार रुपये कैश के साथ गिरफ्तार किया था।
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आमतौर पर पुलिस छोटे पैडलर्स को पकड़कर केस बंद कर देती है, लेकिन इस बार शिमला पुलिस ने 'सप्लाई चेन' को जड़ से उखाड़ने की ठानी। पुलिस ने राहुल के फोन के डिजिटल साक्ष्य, व्हाट्सएप चैट और बैंक ट्रांजेक्शन खंगाले। कड़ियां जुड़ती गईं और आखिरी सिरा पंजाब के खरड़ में बैठे बड़े सप्लायर हरप्रीत सिंह उर्फ हैरी (पुत्र जसबीर सिंह, निवासी गोल्डन एस्टेट, खरड़) तक जा पहुंचा।
309 ग्राम चिट्टा देख उड़े पुलिस के होश
पुख्ता तकनीकी सबूत हाथ लगते ही 13 जून को थाना सदर शिमला की स्पेशल टीम ने पंजाब के खरड़ में हैरी के गुप्त ठिकाने पर अचानक दबिश दी। पुलिस ने जब वहां तलाशी ली तो उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं। आरोपी के पास से 309 ग्राम शुद्ध चिट्टा (हेरोइन) और 61,900 रुपये ड्रग मनी बरामद हुई। इस केस में अब तक कुल 316 ग्राम चिट्टा जब्त हो चुका है, जिसकी बाजार में कीमत लगभग 25 लाख रुपये है। हिमाचल में इतनी बड़ी खेप खपाने की तैयारी थी, जिसे समय रहते नाकाम कर दिया गया।
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व्हाट्सऐप से चलता था पूरा कारोबार
पुलिस जांच में इस शातिर सप्लायर के काम करने के तरीकों का भी सनसनीखेज खुलासा हुआ है। आरोपी हरप्रीत सिंह उर्फ हैरी इतना चालाक था कि वह पुलिस ट्रैपिंग से बचने के लिए साधारण फोन कॉल कभी नहीं करता था; वह सिर्फ व्हाट्सएप कॉल और चैट के जरिए ही अपने ग्राहकों और एजेंटों से बात करता था।
यही नहीं, नशे के काले कारोबार से आने वाले लाखों रुपयों को वह कभी अपने बैंक खाते में नहीं मंगवाता था। वह पैसे अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों के खातों में ट्रांसफर करवाता था और बाद में चुपके से कैश निकाल लेता था ताकि कानून की नजरों से बचा रह सके।
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2026 में 38 अंतरराज्यीय नेटवर्क ध्वस्त
शिमला पुलिस के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक नशा तस्करी के खिलाफ अभियान के दौरान लगभग 2.5 किलोग्राम हेरोइन जब्त की जा चुकी है। इस वर्ष एनडीपीएस एक्ट के तहत 157 मामले दर्ज किए गए हैं और 272 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इनमें से दर्जनों गिरफ्तारियां बैकवर्ड लिंक जांच के जरिए हुई हैं, जिनके तार पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र और केरल तक जुड़े पाए गए हैं। पुलिस ने इस वर्ष अब तक 38 अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क का भंडाफोड़ करने में सफलता हासिल की है।
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नशे के स्रोत तक पहुंच रही पुलिस
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अब कार्रवाई केवल छोटे स्तर के तस्करों या नशा बेचने वालों तक सीमित नहीं है। रणनीति का मुख्य उद्देश्य नशे की सप्लाई करने वाले बड़े नेटवर्क, मुख्य सप्लायरों और संगठित गिरोहों तक पहुंचकर उन्हें पूरी तरह ध्वस्त करना है। फिलहाल गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ जारी है और पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है। जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
