मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के कोटली क्षेत्र में एक महिला को फोन पर ही तीन घंटे तक मानसिक बंधक बनाकर ठगने की कोशिश की गई। शातिर ठगों ने महिला को उसके बेटे के नाम पर ब्लैकमेल किया और 1.60 लाख रुपये की फिरौती मांगी। हालांकि, एक दुकानदार की सूझबूझ से महिला बड़ी ठगी का शिकार होने से बच गई।
खेत में काम कर रही थी महिला
बताया जा रहा है कि बटेहड़ गांव की रहने वाली महिला जब खेतों में काम कर रही थी, तभी उसके मोबाइल पर एक अनजान कॉल आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर महिला को बताया कि उसका बेटा और उसके दोस्त एक लड़की के साथ बलात्कार के केस में फंसे हैं और पीड़िता की हालत गंभीर है।
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डर के मारे गहने लेकर भागी
फोन करने वाले ने कहा कि आपका बेटा शरीफ लगता है, हम उसे बचा सकते हैं, लेकिन इसके लिए आपको ₹1.60 लाख तुरंत देने होंगे। बेटे को बचाने की बात सुनकर घबराई महिला अपने गहने लेकर कोटली बाजार पहुंच गई। वहां उसने बर्तन की दुकान चलाने वाले मनीष शर्मा से ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करने की मदद मांगी।
जब मनीष ने महिला से पूरी बात पूछी, तो उसे शक हुआ कि यह कोई ऑनलाइन ठगी का मामला है। महिला ने पहले तो फोन देने से इनकार कर दिया, लेकिन बाद में मनीष ने खुद फोन लेकर बात की।
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ठगी से कैसे बची महिला?
फोन पर मौजूद व्यक्ति ने मनीष को नई कहानी सुनानी शुरू कर दी—अब वह कहने लगा कि वह महिला का भाई है और महिला ने उससे ₹20,000 उधार लिए थे, जो अब वापस चाहिए।मनीष को पूरा यकीन हो गया कि यह फ्रॉड कॉल है। उसने फोन करने वाले को सख्त शब्दों में जवाब देते हुए महिला को ठगी से बचा लिया।
समझदारी ने रोकी बड़ी ठगी
इस पूरी घटना से यह साफ है कि ऑनलाइन ठग अब बेहद चालाक और भावनात्मक तौर-तरीकों से लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। अगर मनीष शर्मा जैसे जागरूक लोग समाज में सक्रिय न हों, तो ऐसे कई मामले असली धोखाधड़ी में बदल सकते हैं।
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अनजान कॉल्स पर न दें भरोसा
पुलिस और साइबर सेल लगातार लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं कि-
- अनजान नंबर से आए धमकी भरे या संदिग्ध कॉल्स की पुलिस से तुरंत पुष्टि करें।
- कभी भी गहने या नकदी लेकर किसी की बातों में आकर पैसे ट्रांसफर न करें।
- डर और भावनात्मक दबाव में कोई निर्णय न लें।
