शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों के बीच अक्सर जीत हासिल करने के लिए उम्मीदवार कई तरह के रास्ते चुनते हैं, लेकिन शिमला जिले से एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है जिसने सबको चौंका दिया है। नाल्देहरा पंचायत में प्रधान पद की एक महिला उम्मीदवार द्वारा दर्ज कराई गई मारपीट की शिकायत पुलिस जांच में पूरी तरह से मनगढ़ंत और झूठी पाई गई है।

 

इस खुलासे के बाद अब राजनीतिक गलियारों और आम जनता के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि महिला ने मतदाताओं का समर्थन और सहानुभूति बटोरने के लिए ही इस पूरी घटना का नाटक रचा था, ताकि चुनाव में उसे इसका फायदा मिल सके।

महिला ने लगाए थे मारपीट के आरोप

दरअसल शिमला जिले की नालदेहरा पंचायत में प्रधान पद की एक महिला उम्मीदवार द्वारा लगाए गए मारपीट के आरोपों ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। आरोप था कि नामांकन वापस लेने के लिए जाते समय दो नकाबपोश लोगों ने उनका रास्ता रोककर धक्का-मुक्की की और उन्हें झाड़ियों में फेंक दिया। घटना के बाद क्षेत्र में चुनावी माहौल गर्म हो गया था और इसे महिला उम्मीदवार पर हमला तथा चुनावी हिंसा का मामला माना जा रहा था।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल : पंचायत में OBC परिवार ही नहीं... फिर भी प्रधान पद किया रिजर्व, प्रशासन की गलती- चुनाव कैंसिल

शिकायत के बाद हरकत में आई पुलिस

महिला उम्मीदवार भीमलता उर्फ सुषमा देवी ने 15 मई को थाना सुन्नी में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में उन्होंने दावा किया था कि हमले के बाद वह बेहोश हो गई थीं और बाद में उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। चुनाव के दौरान सामने आए इस मामले ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए थे।

चिकित्सीय जांच में नहीं मिले चोट के निशान

जांच के दौरान महिला उम्मीदवार का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मशोबरा में चिकित्सीय परीक्षण कराया गया। पुलिस जांच में सामने आया कि उनके शरीर पर किसी भी प्रकार की चोट या मारपीट के निशान नहीं थे। इतना ही नहीं, जिस स्थान पर झाड़ियों में फेंके जाने का दावा किया गया था, वहां भी संघर्ष या गिरने के कोई प्रमाण नहीं मिले।

यह भी पढ़ें : दो दोस्तों ने लूटी छात्रा की इज्जत, कंप्यूटर सेंटर में हुई थी दोस्ती- वीडियो भी बनाई

पूछताछ में बदला बयान

पुलिस की गहन पूछताछ के दौरान शिकायतकर्ता ने अपना बयान बदल दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें भ्रम हुआ था और पहले भी इस तरह की स्थिति का अनुभव हो चुका है। संभवतः इसी कारण उन्हें लगा कि उनके साथ मारपीट हुई है। इसके बाद पुलिस ने सभी तथ्यों, चिकित्सीय रिपोर्ट और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों का मिलान किया।

पुलिस जांच में आरोप साबित नहीं

पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह के अनुसार जांच में किसी भी प्रकार के हमले या मारपीट की पुष्टि नहीं हुई। न तो घटनास्थल से कोई प्रमाण मिला और न ही चिकित्सीय रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि हुई। इसी आधार पर मामले को तथ्यहीन और कल्पना पर आधारित मानते हुए बंद कर दिया गया।

यह भी पढ़ें- हिमाचल में नहीं मिलेंगी दवाइयां : बंद रहेंगी मेडिकल शॉप, मरीजों को हो रही परेशानी

सहानुभूति वोट पाने की कोशिश पर उठे सवाल

अब जब पुलिस जांच में पूरी कहानी झूठी साबित हो चुकी है तो क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या चुनावी माहौल में सहानुभूति हासिल करने और मतदाताओं का समर्थन पाने के लिए यह कहानी गढ़ी गई थी। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद यह मामला चुनावी गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।

चुनाव जीतने के लिए नए-नए हथकंडों पर बहस

पंचायत चुनावों में जीत हासिल करने के लिए उम्मीदवार हर संभव प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में नालदेहरा का यह मामला चुनावी रणनीतियों और नैतिकता को लेकर भी बहस छेड़ गया है। जिस घटना को पहले महिला उम्मीदवार पर हमले के रूप में देखा जा रहा था, वह अब जांच के बाद एक मनगढ़ंत कहानी साबित हुई है। इससे चुनावी माहौल में अफवाहों और बिना प्रमाण लगाए गए आरोपों की गंभीरता भी उजागर हुई है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें